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Wednesday, November 30, 2022

20 सालों से क्यों नही महसूस किया सरकार ने हमारा दर्द-बोले दिव्यांग

पंचायत मंत्री ने तीन माह का समय मांग कर समाप्त कराई स्वाभिमान यात्रा

भोपाल। मध्यप्रदेश में दिव्यांगों ने अपनी लंबित मांगों के लिए दिव्यांग स्वभिमान यात्रा निकाली। यात्रा की शुरुआत गुना जिले की राघोगढ़ तहसील से हुई थी, जिसमें पूरे प्रदेश के दिव्यांगों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था, 7 नवम्बर को शुरू हुई यात्रा के दूसरे ही दिन कलेक्टर और एसपी दिव्यांगों के पास पहुंचे, लेकिन दिव्यांगों ने उन्हें अपना ज्ञापन नहीं दिया। दिव्यांग इस जिद पर आड़े रहे कि प्रभारी मंत्री या गृह मंत्री ही हमारी यात्रा को बीच में समाप्त कर सकते है, दिव्यांग स्वाभिमान पद यात्रा अपने दूसरे पड़ाव पर ही पहुंची थी कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया ने दिव्यांगों से 3 माह का समय मांगा और दिव्यांगों प्रतिनिधि मण्डल को मुख्यमंत्री आवास पर मिलकर अपनी बात रखने की व्यवस्था करने के लिए कहा, तब कहीं जाकर दिव्यांगों ने अपनी यात्रा को 3 माह के लिए स्थगित किया है।

दिव्यांगों का कहना है कि हमारी लड़ाई जारी रहेगी, दिव्यांगों ने यह भी कहा कि सामान्य व्यक्ति के लिए भी 40 किमी की पैदल यात्रा आसान नहीं होती हमारे लिए तो 40 किमी की यात्रा 4 हजार किमी के बराबर है फिर भी दिव्यांग 40 किमी की पैदल यात्रा पर निकले थे। करीब 2 दर्जन दिव्यांगों की पैदल चलकर गंभीर हालत हो चुकी थी किसी के हाथों से खून निकल रहा था। तो किसी के पैरों से और किसी के घुटने सड़क की रगड़ से छिल चुके थे।

दिव्यांगों के लिए यह तीन दिन की यात्रा किसी हिमालय पर चढ़ने से कम नहीं थी फिर दिव्यांग अपनी मांगों के लिए पूरे 40 किमी पैदल चलने पर आड़े हुए थे, दिव्यांगों ने कहा कि सरकार को इस बात की गंभीरता को समझना चाहिए की दिव्यांग वर्ग कितनी पीड़ा में पैदल चल रहा है, साथ ही दिव्यांगों ने यह भी कहा कि यदि 3 माह में कानून बनाकर हमारी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो यह यात्रा वही से शुरू होगी जहां से आज स्थगित हो रही है, हमारी लड़ाई जब तक जारी रहेगी तब तक सरकार हमारी मांगांे को पूरा कर देती!

यह थी प्रमुख मांगें

दिव्यांगों ने बताया कि ये सिर्फ उनकी कुछ मांगे नहीं है बल्कि उनकी तकलीफ और उनका दर्द है। जिसे शासन सुनकर भी अनसुना कर रहा है। इसलिए इस यात्रा के जरिेए वह और दर्द सहकर सरकार तक पहुंचा रहे हैं। समाज का सबसे कमजोर और पीडि़त वर्ग यदि कोई है तो वो दिव्यांग है। इस यात्रा के बाद भी सरकार यदि हमारी मांगों को पूरा नहीं करती है तो वह भोपाल मुख्यमंत्री आवास तक भी पैदल यात्रा निकालेंगे।

10 सूत्रीय मांगें

-दिव्यांगों का रिजर्वेशन होरीजोंटल से वर्टिकल किया जाए।

-आउटसोर्स भर्ती में दिव्यांगों को प्राथमिकता दी जाए।

-यदि युगल दिव्यांग हैं, तो 2 लाख और यदि 1 दिव्यांग है, तो 5 लाख रुपये दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन राशि दी जाए।

-पेंशन को 600 से बढ़ाकर 5000 रुपए प्रतिमाह किया जाए।

-सामाजिक न्याय निशक्तजन कल्याण मंत्रालय से निशक्तजन कल्याण मंत्रालय को अलग किया जाए।

-पंचायत, विधानसभा, संसद सभी पटलों पर दिव्यांगों को अनिवार्य रूप से प्रतिनिधित्व दिया जाए।

-सभी भर्तियों में बैकलाक के पद दिए जाएं।

-शिक्षा के क्षेत्र में निशुल्क उच्च शिक्षा के अवसर और मुफ्त छात्रावास का प्रावधान हो।

-प्रत्येक जिले में दिव्यांग सहायता केंद्र की स्थापना हो, जो दिव्यांग योजनाओ को समझाकर उनका समुचित क्रियान्वयन कर सकें।

-दिव्यांगों के लिए आयुक्त एवं मुख्य आयुक्त के पद पर दिव्यांग व्यक्ति की ही नियुक्ति की जाए।

दिव्यांग स्वाभियान यात्रा के अध्यक्ष सुनील पंत ने बताया कि हमारी मांगें प्रशासन से नहीं हैं। शासन से हैं। हम 17 तारीख को गुना पहुंचकर ही कलेक्टर को ज्ञापन देंगे। दिव्यांग स्वाभिमान यात्रा की तैयारी दिव्यांगजनों द्वारा पिछले एक साल से की जा रही थी। अपने स्तर और प्रदेश में घूमकर दिव्यांगों को इस यात्रा में शामिल होने का निवेदन किया। हालांकि यात्रा के बीच में पहुंचे पंचायत मंत्री ने मांगों पर विचार करने के लिए तीन माह का समय मांगा और यात्रा समाप्त करा दी।

Ankit Pachauri
Journalist, The Mooknayak

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