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Friday, October 7, 2022

उत्तर प्रदेश: 10 महीने से लापता दलित नाबालिग को नहीं ढूंढ सकी पुलिस, भाई ने छोड़ दी इकलौती बहन के मिलने की उम्मीद

घटना के बाद, तीन बार बदल चुके हैं संबंधित थाना प्रभारी। थानेदार को नहीं मिल रही बच्ची की गुमशुदगी की फाइल।

लखनऊ। यूपी में दलितों के साथ हो रहे उत्पीड़न की लगातार खबरें सामने आ रही हैं। हाल ही में, एक अन्य मामले में लखनऊ में ही नाबालिग दलित छात्रा के लापता होने के साथ ही पुलिस की लापरवाही के कारण गैंगरेप के बाद हत्या का मामला सामने आया था। वहीं अब 10 महीने पहले लखनऊ के मड़ियांव क्षेत्र के पलटन छावनी इलाके से गायब हुई दलित बच्ची का पुलिस अब तक कोई सुराग नहीं लगा पाई। थाने में अब तक लगभग तीन से अधिक थानेदार बदले जा चुके हैं। नाबालिग बच्ची के बड़े भाई अंकित का कहना है कि पुलिस ने शुरुआत में छानबीन की थी, लेकिन समय बीतने के साथ ही मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। अंकित ने बताया कि, पुलिस जांच के नाम पर थाने में बुलाकर घण्टों तक बैठाकर रखती थी। जिसके बाद अंकित ने अपनी इकलौती छोटी बहन की तलाश की उम्मीद छोड़ दी है।

क्या है पूरा मामला?

लखनऊ के मड़ियांव इलाके पलटन छावनी में अंकित रावत (24) रहते हैं। अंकित के परिवार में उसकी मां ज्ञानवती, दो छोटे भाई सुमित (12), अमित (10) और इकलौती बहन सुधा (14) रहते हैं। अंकित ने बताया कि, उसके पिता की एक साल पहले सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी है। अंकित परिवार चलाने के लिए पहले विज्ञापन लगाने का काम करते थे। पिता की मौत के बाद पूरी जिम्मेदारी उस पर आ गई है।

अंकित ने बताया कि, वह घर के पास महादेव चौराहे पर अंडे का ठेला लगाकर अपना परिवार चला रहा हैं। 25 जुलाई 2021 को उनकी इकलौती बहन सुधा (14) अचानक लापता हो गई। उसे बहुत ढूढ़ने का प्रयास किया लेकिन नहीं मिली। इसकी सूचना उन्होंने थाने पर दी। अंकित के मुताबिक, नाबालिग बहन के लापता होने के 24 घण्टे बाद पुलिस ने FIR दर्ज की। हालांकि अंकित से FIR कॉपी मांगी गई तो वह उपलब्ध नहीं करा पाए।

अंकित ने बताया कि, वह अनपढ़ हैं। उन्हें FIR की तारीख याद नही है। अंकित के मुताबिक, शुरुआत में पुलिस ने उन्हें साथ ले जाकर एक स्थान पर CCTV फुटेज भी दिखवाई, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल पाई। लेकिन अब, समय बीतने के साथ ही उन्होंने अपनी इकलौती बहन की पुलिस द्वारा बरामद होने की उम्मीद छोड़ दी। 

थानेदार को नहीं मिली केस की फाइल और मुकदमा संख्या

मामले में द मूकनायक ने मड़ियांव थाने के थानेदार से कई बार सम्पर्क किया लेकिन उन्होंने बताया कि उन्हें न तो फाइल मिल पाई है। न ही मुकदमा संख्या का पता चल पा रहा है।

पुलिस पूछताछ के नाम पर बुलाकर करती है परेशान

अंकित ने बताया कि, उन्हें अब कोई उम्मीद नहीं है कि उनकी इकलौती बहन उन्हें मिलेगी। वह परिवार चलाने के लिए अंडे का ठेला लगाते हैं। “बहन के लापता होने की शिकायत पुलिस से की थी। पुलिस पूछताछ के लिए बुलाती है और दिनभर थाने में बैठाए रहती है, और शाम को खाली हाथ लौटना पड़ता। इसके कारण उस दिन की कमाई भी चली जाती है।”

पुलिस पीड़ित से ही पूछती है कुछ जानकारी मिली

अंकित ने बताया कि, पुलिस उन्हें थाने बुलाती है। पुलिस खुद जांच के बारे में कुछ नहीं बताती लेकिन उससे ही बहन के मिलने की जानकारी लेती है।

पिता की दुर्घटना में मृत्यु के बाद सारी जिम्मेदारी अंकित पर आ गई। अंकित ने बताया कि, मां की तबियत सही नही रहती है। वह दिमागी रुप से बीमार रहती हैं इसलिए दोनों छोटे भाईयो की देखभाल भी उन्हें ही करनी पड़ती है। और साथ ही मां के इलाज की जिम्मेदारी भी उठा रहा है।

Satya Prakash Bharti
Satya Prakash Bharti, Journalist The Mooknayak

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