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Friday, October 7, 2022

उत्तर प्रदेश: गायब हुई बेटी को खोजने के लिए पुलिस के सामने गिड़गिड़ाता रहा दलित पिता, नाबालिग बेटी की लाश देख पिता ने लगाया गैंगरेप के बाद हत्या का आरोप

स्कूल पढ़ने गई बेटी के गायब होने के बाद, बेटी के न मिलने पर खुद पिता इकट्ठा करता रहा सबूत। पिता का आरोप है कि पुलिस को CCTV फुटेज भी सौंपी फिर भी सोती रही पुलिस। बाद में रेलवे ट्रैक के किनारे मिली लाश। परिजनों का आरोप है कि केस में आरोपी (सवर्ण जाति) पंडित होने की सूचना मिलते ही पुलिस ने साध ली थी चुप्पी। साथ ही पुलिस कमिशनर और एडिशनल कमिशनर दोषी पुलिस वालों पर कार्रवाई से बचते नजर आएमामले में, सदन में MLC भीम राव अम्बेडकर ने उठाया था मुद्दा। 26 मई को चन्द्र शेखर आजाद पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी होने के कारण लखनऊ सुरक्षा की दृष्टि से सबसे संवेदनशील स्थान माना जाता है। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ भी लखनऊ में ही रहते हैं। बताया जाता है कि, किसी भी घटना को लेकर पुलिस भी हमेशा एलर्ट मूड पर रहती है। लेकिन एक ताज़ा गैंगरेप के बाद हत्या के मामले में पुलिस पर असंवेदनशील होने का आरोप है। लोगों में यह भी चर्चा है कि दलित परिवार की बेटी और एक उच्च जाति के युवक का नाम आने पर पुलिस किसी भी कार्रवाई से बचती नजर आई, लेकिन जब पुलिस की खुद की गर्दन फंसने लगी तो पुलिस ने कार्रवाई करना शुरू कर दिया।

क्या है पूरा मामला?

ताजा मामला विकासनगर क्षेत्र के जानकीपुरम का है। एक दलित परिवार की 15 साल की नाबालिग, विकासनगर स्थित एक निजी कालेज में दसवीं की छात्रा थी। स्कूल की छुट्टी दोपहर 2:30 बजे हो जाती थी। स्कूल में हाईस्कूल की परीक्षा की तैयारी को लेकर छुट्टी के बाद 1 घण्टे की अतिरिक्त क्लास का नियम है। अतः छुट्टी 3:30 पर होती थी। घर से स्कूल लाने और ले जाने का काम पिता खुद करते थे। 29 मार्च को जब नाबालिग छात्रा के पिता उसको लेने के लिए स्कूल पहुंचे तो जानकारी हुई, कि बेटी स्कूल से घर जा चुकी है। लेकिन पिता को बेटी के घर न पहुंचने की पूरी जानकारी थी। लगभग एक घण्टे तक पिता अपनी नाबालिग बेटी को ढूढते रहे, लेकिन वह कहीं नहीं मिली। स्कूल से 500 मीटर की दूरी पर विकास नगर थाने की सब्जी मंडी पुलिस चौकी मौजूद है। पिता बेटी को ढूंढने के लिए पुलिस से मदद मांगने गया। पीड़ित पिता ने बताया कि चौकी इंचार्ज जिंतेंद्र पटेल ने उन्हें पूरी तरह अनसुना कर दिया था। जिसके बाद खुद छात्रा के पिता ने कुछ लोगों की मदद से आसपास के घरों और दुकानों में लगे खुद CCTV के जरिये मिली फुटेज को निकालकर पुलिस को सौंप दिया।

पिता का आरोप है कि, “सीसीटीवी फुटेज देने पर भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। पूरी रात बीत जाने के बाद, पुलिस ने 30 मार्च की सुबह लगभग 11 बजे CCTV फुटेज के आधार पर दो युवकों को हिरासत में लिया।” पिता का आरोप है कि, घटना में एक ब्राम्हण जाति के व्यक्ति का नाम भी सामने आया था। इससे तत्कालीन थानेदार आनंद कुमार तिवारी ने उसका नाम दबाव डालकर तहरीर से हटवा दिया।

छात्रा के पिता के मुताबिक, पुलिस ने ठीक दोपहर 2:20 बजे FIR तो कर ली थी, लेकिन पुलिस दो दिन तक हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। पुलिस की लापरवाही और अनदेखी का आलम यह रहा कि 1 अप्रैल को घर से 130 किमी दूर सीतापुर जिले की GRP पुलिस ने बेटी के रेलवे ट्रैक पर गम्भीर रुप से घायल पड़े होने की जानकारी दी। पिता ने 5 अप्रैल को पुलिस से मेडिकल कराने के लिए निवेदन भी किया लेकिन पुलिस का कोई जवाब नहीं मिल। 7 अप्रैल को नाबालिग ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। पिता का आरोप है कि, पुलिस की लापरवाही और लचर पैरवी के कारण दो आरोपी बेल पर आजाद हो गए जबकि अन्य दो युवकों को ऊंची जाति ( ब्राह्मण) होने के कारण पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने से बच रही है।

दलित नाबालिग को स्कूटी पर बैठा कर ले जाता आरोपी का CCTV फुटेज / फोटो - सत्य प्रकाश भारती, द मूकनायक
दलित नाबालिग को स्कूटी पर बैठा कर ले जाता आरोपी का CCTV फुटेज / फोटो – सत्य प्रकाश भारती, द मूकनायक

पिता ने खुद CCTV फुटेज निकलवाकर पुलिस को सौंपा

दलित नाबालिग के पिता ने स्कूल से आन- जाने वाले सभी रास्तों में पड़ने वाले घरों और दुकानों पर लगे CCTV फुटेज दिखाने के लिए मिन्नते की। इस दौरान स्कूल जाने वाले मार्ग पर एक क्लीनिक के बाहर लगे कैमरे में छात्रा प्लाजा के जीने पर बैठी नजर आई थी। जिसके बाद दो युवक सफेद कलर की स्कूटी UP 32 KB 2668 से पहुंचते हैं और नाबालिग छात्रा को अपने साथ ले जाते हैं। घटना की CCTV फुटेज 29 मार्च को ही चौकी इंचार्ज जिंतेंद्र पटेल को दिखाई गई। इसके साथ ही पिता ने चौकी इंचार्ज के नम्बर पर शाम 8:37 पर CCTV फुटेज भेजी लेकिन पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही।

‘पैसे लेकर नाबालिग को सीतापुर में बेच आये युवक’

नाबालिग के पिता के मुताबिक, 30 अप्रैल को सुबह पुलिस ने इंदिरानगर के रहने वाले कृष्णा गुप्ता और हर्षवर्धन को हिरासत में लिया और पूछताछ की। दोनों आरोपियों ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि उन्होंने नाबालिग को सीतापुर ले जाकर रंजीत त्रिवेदी को सौंप दिया। रंजीत त्रिवेदी ने इसके लिए उन्हें कुछ नगद रुपये दिए थे। पुलिस के अनुसार नाबालिग बच्ची का युवक के साथ पहले से प्रेम-प्रसंग चल रहा था।

पुलिस ने FIR से हटवाया रंजीत त्रिवेदी का नाम, CM जनसुनवाई पर भी दर्ज की गई थी शिकायत

पिता ने थाने में कृष्णा गुप्ता, हर्षवर्धन और रंजीत के नाम लिखित तहरीर दी। पिता का आरोप है कि, तत्कालीन थानेदार आनंद कुमार तिवारी सजातीय युवक होने के कारण रंजीत त्रिवेदी का नाम तहरीर से हटवा दिया। पिता ने मदद के लिए CM हेल्पलाइन 1076 पर कॉल की लेकिन फोन नहीं मिला। उन्होंने, 30 मार्च को ही एक शिकायत जनसुनवाई पोर्टल पर भी की, जिसमे उन्होंने घटना में रंजीत त्रिवेदी के शामिल होने की जानकारी दी है। वहीं 30 मार्च को दर्ज की गई FIR में रंजीत त्रिवेदी का नाम नहीं मौजूद है। वहीं पुलिस ने कृष्णा गुप्ता और हर्षवर्धन को जेल भेज दिया था। छात्रा के पिता ने बताया कि, मजबूत पैरवी न होने के कारण दोनों आरोपी 6 मई को जमानत पर रिहा कर दिए गए। हालांकि, छात्रा की मौत के बाद पुलिस ने धाराएं बढाई।

FIR के बाद नाबालिग की मौत का इंतजार करती रही पुलिस

छात्रा के पिता ने पुलिस को CCTV फुटेज भी खुद निकलवा कर दिया था। जिसके आधार पर पुलिस ने 30 मार्च को FIR दर्ज की थी और दो लोगों को हिरासत में लिया था। पुलिस की पूछताछ में दोनों ने रंजीत त्रिवेदी का नाम लिया था। छात्रा के पिता का आरोप है कि, पुलिस ने इसके बाद कोई कर्रवाई नहीं की। “1 अप्रैल को सुबह घर से 130 km दूर सीतापुर जिले के बिसवां में रेलवे पुलिस ने बेटी के रेलवे ट्रैक पर पड़े होने की सूचना दी। जिसके बाद छात्रा को सीतापुर जिले में भर्ती कराया गया। हालत गम्भीर होने के कारण छात्रा को लखनऊ ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया था।”

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार नाबालिग छात्रा से हुई थी मारपीट

छात्रा के पिता के मुताबिक, रेलवे पुलिस ने उन्हें बेटी के साथ हुई घटना की जानकारी दी। वहां पर मौजूद कुछ लोगों ने उन्हें जानकारी दी कि सुबह एक लड़का लड़की को रेलवे ट्रैक के किनारे पीट रहा था। लड़के से बचकर भागते समय वह रेलवे ट्रैक पर गिर गई थी। क्षेत्रीय लोगों ने लड़के (रंजीत) को पकड़कर पीट दिया और पुलिस को सूचना दी थी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों को सीतापुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। जिसके बाद शाम करीब 3 बजे उसे लखनऊ ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया।

विकास नगर पुलिस से मेडिकल परीक्षण कराने के लिए गुहार लगाते रहे पिता

छात्रा के पिता ने जानकारी देते हुए बताया कि, उनकी बेटी का इलाज ट्रामा सेंटर में चल रहा था। उन्होंने विकास नगर थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर आनंद कुमार तिवारी से कई बार बेटी का मेडिकल परीक्षण कराने के लिए कहा। पिता का मानना था कि बेटी के साथ गैंगरेप भी किया गया है, जिसके कारण मेडिकल होना जरूरी था। 5 अप्रैल को छात्रा के पिता ने इंस्पेक्टर के सीयूजी नम्बर पर मेडिकल कराने के लिए भी अनुरोध किया था। लेकिन, पुलिस ने एक न सुनी, और 7 अप्रैल को छात्रा की मौत हो गई।

पोस्टमार्टम में हुई गैंगरेप की पुष्टि

नाबालिग छात्रा की मौत के बाद उसका पोस्टमार्टम कराया गया।पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई की पोल खोल कर रख दी। छात्रा के पिता बार-बार जिस बात का अंदेशा लगा रहे थे वही हुआ। घटना के लगभग दो महीने पूरे होने को थे,पुलिस ने कलम फंसते देखी तो 21 मई को पॉक्सो एक्ट और 304 और 120B की बढोत्तरी की।

घटना के लगभग दो महीने बाद गिरफ्तार किये गए मुख्य आरोपी

पुलिस के मुताबिक, 1 अप्रैल को छात्रा और रंजीत दोनों को ही पुलिस जिला अस्पताल इलाज के लिए ले गई थी। पुलिस ने यह भी बताया कि 1 अप्रैल की दोपहर रंजीत अस्पताल से भाग गया था। वहीं छात्रा की मौत के बाद हुए पोस्टमार्टम में जब पुलिस को गैंगरेप की जानकारी हुई तो पुलिस ने नाटकीय ढंग से रंजीत को घटना के दो महीने बाद गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

‘आरोपियों को बचा रही पुलिस, दो की गिरफ्तारी नहीं हुई’

छात्रा के पिता के मुताबिक, घटना में दो अन्य लोगों के संलिप्त होने का आरोप लगाया गया है — रजत शुक्ला और दीपू, लेकिन पुलिस उन्हें बचा रही है। पुलिस ने अभी तक रंजीत त्रिवेदी, हर्षवर्धन और कृष्ना गुप्ता को ही गिरफ्तार किया है। जिसमे कृष्णा गुप्ता और हर्षवर्धन 6 मई को बेल पर छूट गए थे। वहीं पुलिस द्वारा दी गई एक रिपोर्ट में बताया गया है कि अब किसी की गिरफ्तारी शेष नहीं है।

सदन में गूंजा मामला

बहुजन समाज पार्टी के MLC भीम राव अम्बेडकर ने विधान सभा मे इस मामले को विस्तार से बताते हुए पुलिस की लापरवाही पर कई सवाल खड़ा किये थे।

पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाकर कोर्ट में खींचने की बात कही

आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चन्द्र शेखर आजाद ने 26 मई को पीड़िता के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने इस पूरे मामले में कहा है कि, दिल्ली में दलित प्रोफेसर ने टिप्पणी की इस पर पहले FIR की गई, फिर जांच की गई। लेकिन दलित नाबालिग छात्रा के मामले में पुलिस पहले जांच करती रह गई, बाद में FIR दर्ज की गई। भीम आर्मी चीफ ने आपत्ति जताते हुए कहा कि कानून का इस्तेमाल दो तरीके से कैसे किया जा सकता है। सरकार दलितों, वंचितों का उत्पीड़न कर रही है। इस मामले में उन्होंने पुलिस की लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए दोषी पुलिस कर्मियो को कोर्ट में खींचने की बात कही है।

पुलिसकर्मियों की लापरवाही पर कुछ भी कहने से बचते नजर आए जिम्मेदार

मामले पर द मूकनायक ने क्षेत्रीय पुलिस की लापरवाही पर लखनऊ के कमिशनर डीके ठाकुर से सम्पर्क किया गया। PRO ने मीटिंग में व्यस्त होने की बात कही। जिसके बाद पुलिस कमिशनर के डीके ठाकुर से वॉट्सऐप पर बात हो सकी। कमिशनर भी जोनल अधिकारी से जानकारी लेने की बात कहकर कुछ भी कहने से बचते नजर आए। जबकि, मामले में एडीसीपी नार्थ प्राची सिंह को फोन किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। एडीसीपी प्राची से व्हाट्सएप के जरिये सम्पर्क किया गया। पूरी घटना को लेकर दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई करने के प्रश्न पर उन्होंने कुछ भी नहीं कहा।

Satya Prakash Bharti
Satya Prakash Bharti, Journalist The Mooknayak

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