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Thursday, May 19, 2022

स्कूल में दलित भोजनमाता के हाथ से बना खाना खाने से सवर्ण छात्रों ने किया इंकार, भोजनमाता की नियुक्ति रद्द

कथित तौर पर बच्चे परिवार के दबाव के चलते भोजनमाता सुनीता देवी के हाथों से बना खाना नहीं खा रहे थे। दलित भोजनमाता के विरोध में बच्चों के परिवार वालों ने भी प्रशासन पर दबाव बनाया।

चंपावत: उत्तराखंड के चम्पावत से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दरअसल ये मामला पिछले तीन दिन से चल रहा है। चम्पावत जिले के सूखीढांग इंटर कॉलेज में सवर्णों के बच्चों ने भोजन खाने से इंकार कर दिया। इसका कारण ये है कि भोजन बनाने का काम जिन भोजनमाता को सौंपा गया, वह दलित वर्ग की हैं। दलित महिला के भोजन बनाने पर सवर्ण छात्रों ने आपत्ति जताई और खाना ही नहीं खाया। न सिर्फ बच्चे बल्कि इन बच्चों के परिवार वालों ने भी इसको लेकर हंगामा कर दिया। पिछले तीन दिन से जारी इस विवाद में भोजनमाता पर गाज गिरी है।

क्या है पूरा मामला

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, चम्पावत के सूखीढांग इंटर कॉलेज में 60 छात्र-छात्राएं पढ़ाई करते हैं। 60 बच्चों में ज्यादा बच्चे सवर्ण है। इनमें से सामान्य वर्ग के 40 और अनुसूचित जाति के 20 बच्चे हैं। यहां पर भोजन बनाने के लिए जिस भोजनमाता की नियुक्ति की गई है वो दलित हैं। बच्चों के लिए खाना पकाने का काम वो कर तो रही थी लेकिन एक दिन बच्चों ने ही उनके हाथ का बना खाना खाने से इंकार कर दिया।

स्कूल में दलित वर्ग की भोजनमाता की नियुक्ति के बाद छात्रों ने एक दिन भोजन करने से मना कर दिया। कथित तौर पर बच्चे परिवार के दबाव के चलते भोजनमाता सुनीता देवी के हाथों से बना खाना नहीं खा रहे थे। अधिकांश बच्चे अपने घर से ही टिफिन लेकर कॉलेज आ रहे थे। सिर्फ बच्चे ही नहीं बल्कि उनके परिवार वालों ने भी प्रशासन पर दबाव बनाया।

नियुक्ति हुई रद्द

पिछले तीन दिन से ये विवाद जारी था। विवाद बढ़ने के बाद हरकत में आए शिक्षा विभाग ने जांच बिठा दी है। इस मामले को सुलझाने के लिए 22 दिसम्बर यानि की आज एक बैठक की गई और इस बैठक में दलित भोजनमाता सुनीता देवी को ही बलि का बकरा बना दिया गया। घटनाक्रम से दबाव में आए शिक्षा विभाग ने सुनीता की नियुक्ति ही रद्द कर दी है। सुनीता अब स्कूल में भोजन नहीं बनाएंगी। नई नियुक्ति होने तक सहायक भोजन माता विमला उप्रेती को ही दोपहर का खाना बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

नियुक्ति में धांधली के आरोप

आपको बता दें कि, इस पूरे मामले में भोजन माता सुनीता देवी की नियुक्ति पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। एक तरफ प्रधानाचार्य इस नियुक्ति को नियमों के हिसाब से बता रहे हैं तो दूसरी तरफ अभिभावक संघ का आरोप है कि नियुक्ति एक सवर्ण भोजनमाता की होनी थी, लेकिन प्रस्ताव के खिलाफ दलित वर्ग की महिला को नियुक्त कर दिया गया।

न्यूज़-18 के अनुसार, चंपावत के राजकीय इंटर कॉलेज सूखीढांग में पहले भोजनमाता के रूप में शकुंतला देवी कार्यरत थीं। 60 साल की हो जाने पर उनको रिटायर कर दिया गया। पीटीए और एसएमसी की बैठक में नई भोजनमाता के तौर पर पुष्पा भट्ट की नियुक्ति का निर्णय लिया गया था। अब आरोप है कि प्रधानाचार्य ने बैठक में पारित प्रस्ताव की जगह एक दलित महिला को भोजनमाता के रुप में नियुक्त कर दिया।

सुनीता ने लगाया प्रताडऩा का आरोप

वैसे इस मामले में खुद सुनीता देवी ने भी आरोप लगाए हैं। दैनिक जागरण के अऩुसार मामले में सुनीता ने पुलिस अधीक्षक व जिलाधिकारी को शिकायती पत्र भेजकर जाति सूचक शब्दों के प्रयोग का आरोप लगाया। सुनीता ने कहा कि उनको आपत्तिजनक शब्दों से बुलाया गया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बच्चों को उनके हाथ का बना भोजन न खाने के लिए उकसाया गया।

सुनीता ने अपने खिलाफ हुई इस प्रताड़ना की शिकायत न्यायिक मजिस्ट्रेट टनकपुर की अदालत में भी की है।
सुनीता देवी को फिलहाल उनकी नौकरी से निकाल दिया गया है। अब देखना ये होगा कि आगे इस केस में क्या कार्रवाई की जाती है।

Rajan Chaudhary
Journalist, The Mooknayak | Email: rajan.chaudhary@themooknayak.in

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