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Friday, October 7, 2022

आज़ादी के 75 साल बाद भी यूपी के इस दलित बस्ती में ना पहुंची बिजली, ना ही पक्की सड़क!

आजादी के 75 साल बाद भी गांव को न सड़क मिली न बिजली। सांप-बिच्छू के काटने से हो चुकी हैं कई मौतें। डीजल का दिया जलाकर बच्चे करते हैं पढ़ाई। सूरज ढलने के बाद अनहोनी के डर से बेटियां घरों में हो जाती हैं कैद।

झांसी। उत्तर प्रदेश के विकास मॉडल के किस्से अपने देश के प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और यूपी के मुख्यमंत्री एवं मंत्रिमंडल से सुने होंगे। यूपी के विकास मॉडल की तस्वीरें आपने टीवी और अखबारों में भी खूब देखी होंगी। लेकिन द मूकनायक झांसी जिले से आपके सामने यूपी मॉडल की ऐसी तस्वीरें लेकर आया है जहां सूरज ढलते ही गांव की बहू बेटियां घरों से नहीं निकलती है। इसका मुख्य कारण आजादी के 75 साल बाद भी गांव में लाइट का कनेक्शन और सड़क ना होना है। दलित बस्ती में रहने वाले लोगों के घरों में आजादी के 75 साल बाद आज तक बिजली कनेक्शन नहीं हुए हैं। मुख्य गांव से जोड़ने वाली पक्की सके नहीं हैं।

स्थानीय लोगों से पता चला कि, गांव में लाइट की व्यवस्था ना होने के कारण सांप, बिच्छू जैसे जहरीले जानवरों के काट लेने से कई मौतें भी हो चुकी हैं। गांव में पढ़ने वाले युवा डीजल की ढिबरी [गांव में रोशनी के लिए जलाया जाने वाला एक तरह का दीपक] जलाकर उसकी रोशनी में पढ़ाई करते हैं। मोबाइल और बैटरी चार्ज करने के लिए लोग अपने मजरे [गांव/क्षेत्र] से लगभग 1 किलोमीटर दूर ककवारा गांव जाकर अपने परिचितों के घर जाते हैं। घर की गृहणियां जो खाना सुबह बनाती हैं, उसे ही पूरा परिवार रात में भी खाता है।

जानिए क्या है पूरा मामला?

यूपी के झांसी जिले की मऊ रानी तहसील में ककवारा गांव पड़ता है। इसी गांव का एक मजरा सिध्दपुरा दलित बस्ती के नाम से जाना जाता है। इस दलित बस्ती में लगभग 50 मकान बने हुए हैं। जबकि गांव में लगभग 300 लोग रहते हैं। स्थानीय निवासियों के मुताबिक यह गांव आजादी से पहले से बसा हुआ है। गांव में लाइट ना होने के कारण स्थानीय लोगों को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है। शाम को सूरज ढल जाने के बाद गांव की बहन, बहू-बेटियां घर से नहीं निकलती हैं। स्थानीय ग्रामीणों का मानना है कि, वह अनहोनी हो जाने के डर से बहू-बेटियों को अंधेरा होने के बाद घर के बाहर नहीं जाने देते हैं।

दलित बस्ती की कच्ची सड़क सरकारी सेवाओं से जोड़ती है

ककवारा गांव से लगभग 1 किमी दूर बसी सिध्दपुरा दलित बस्ती को एक कच्ची सड़क जोड़ती है। ककवारा गांव में सरकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राइमरी विद्यायल है। ककवारा गांव सहित सरकारी सेवाओं में बिजली के कनेक्शन हैं,लेकिन दलित बस्ती में कनेक्शन नहीं दिए गए हैं। कच्ची सड़क होने के कारण बारिश के दिनों में यहां की स्थिति और भी बदहाल हो जाती है। जहरीले स्तनपायी जानवरो का खतरा और भी बढ़ जाता है।

ककवारा गांव के सिध्दपुरा की दलित बस्ती रहने वाले विवेक इंटर की पढ़ाई कर रहे हैं। विवेक बताते हैं, “रात को पढ़ाई करने के लिए डीजल की ढिबरी जलाते हैं, मोबाइल चार्ज करने के लिए ककवारा गांव में अपने दादा के घर जाते हैं। दादा का घर दलित बस्ती से 1 किलोमीटर की दूरी पर है।”

“रात में घर के बाहर निकलने से डर लगता है। अंधेरा हो जाने के कारण सांप बिच्छू का पता नहीं चल पाता है। सांप के काटने के कारण पिछले 3 महीने में चार लोगों की मौत हो गई है,” विवेक ने द मूकनायक को बताया।

सिध्दपुरा दलित बस्ती की स्थानीय निवासी कस्तूरी देवी (55) से द मूकनायक ने बात की। कस्तूरी देवी के पति की मौत 8 साल पहले हो चुकी है। कस्तूरी देवी का आरोप है कि, विधवा पेंशन भी अब नही मिलती, जिसके कारण घर चलाना मुश्किल होता है। कस्तूरी देवी के दो बेटे और उनका परिवार है। कस्तूरी देवी बताती हैं कि, “बेटे किसी तरह मजदूरी करके अपने परिवार का ही पेट पाल पा रहे हैं।” वह एक झोपड़ी में रहकर अपना जीवन बिता रही हैं। PM आवास योजना की तरफ से उन्हें मकान भी नहीं दिया गया है। लाइट की समस्या को लेकर कस्तूरी देवी बताती हैं कि, “लड़कियों की शादी नहीं हो पाती है। बच्चों पढ़ नहीं पा रहे हैं। मिट्टी का तेल कोटे से मिलना बंद हो गया है। महंगे डीजल से आदमी कब तक दिया जलाएगा। चुनाव के समय केवल वोट लेने के लिए माता-बहन करके नेता आते हैं, पैर तक छू जाते हैं, लेकिन इसके बाद कोई नजर नहीं आता है।”

बिजली कनेक्शन न होने के कारण अंधेरे में खाना बनाती कस्तूरी देवी [फोटो- सत्य प्रकाश भारती, द मूकनायक]
बिजली कनेक्शन न होने के कारण अंधेरे में खाना बनाती कस्तूरी देवी [फोटो- सत्य प्रकाश भारती, द मूकनायक]

कस्तूरी देवी लाइट की समस्या से परेशान होने के कारण आगे कहती हैं, “चुनाव के बाद प्रधानमंत्री कहां है, मुख्यमंत्री कहां हैं… कोई पता नहीं। यहां जीतने भी विधायक हैं, यहां आते हैं और, कोई भी व्यक्ति चाहे वह कूड़े में रह रहा हो, सबके पैर छूते हैं, लेकिन बाद में यह तक नहीं झांकने आते की आदमी जी रहा है कि मर रहा है।”

“एक 20 साल का लड़का खत्म हो गया। हाई स्कूल की पढ़ाई उसने कर ली थी। उसकी शादी तय हो चुकी थी। बिच्छू काटने की वजह से उसकी मौत हो गई। एक 15 साल की लड़की कविता खत्म हो गई। एक 10-15 साल का लड़का था वह भी खत्म हो गया। तीन आदमी खत्म हो गए लेकिन कोई सुनवाई नहीं करता है। अंधेरे में बड़े-2 सांप आ जाते है। सभी अधिकारी के पास गये थे। न तब सुनवाई हुई थी न अब सुनवाई हुई है,” अपने दर्द को याद करते हुए कस्तूरी देवी बताती हैं।

कस्तूरी आगे बताते हुए कहती हैं, “मिट्टी का तेल भी मिलना बंद हो गया है। बच्चे पढ़ नहीं पाते हैं। इन बच्चों का क्या करें कहा पटक दें, कुएं में फेंक दें कि सल्फास [जहर] खिला दें! उजियारा [रोशनी] नहीं है तो बच्चे कहां से पढ़ेंगे। गांव में 50 साल से लाइट नहीं है।”

“ककवारा गांव से सिध्दपुरा तक सड़क नहीं है, न ही कोई पुलिया बनी है। सड़क न होने के कारण बारिश में रास्ते खराब हो जाते हैं। किसी के घर में महिला गर्भवती होती है और तबियत खराब होती है और डिलीवरी होनी होती है तो, बारिश के कारण सड़क नाला बन जाती है। उन्हें अस्पताल तक ले जाना मुश्किल हो जाता है,” कस्तूरी बताती हैं।

ककवारा गांव की सिध्दपुरा दलित बस्ती की रहने वाली माधुरी देवी का कहना है, लाइट न होने के कारण रात में खाना बनाने और खाने में दिक्कत होती है। बच्चे पढ़ नहीं पाते हैं। मिट्टी का तेल मिलता था, वह भी अब बंद कर दिया गया है।

ककवारा गांव की सिध्दपुरा दलित बस्ती की रहने वाले लगभग 60 वर्षीय कमल बताते हैं, “गांव में लाइट की बहुत समस्या है। हमने तो बचपन से गांव में लाइट नहीं देखी है।”

गांव के सिध्दपुरा दलित बस्ती की रहने वाले अवधेश कुमार (50) अहिरवार बताते हैं, जब से यह बस्ती बसी हुई है, तब से आज तक गांव में लाइट की कोई व्यवस्था नहीं है। मिट्टी का तेल मिलता था, वह भी अब नहीं मिलता है। डीजल महंगा है। अंधेरे में जीवन बसर करते हैं। अंधेरे में बच्चे इधर-उधर खेलते हैं, लाइट न होने के कारण सांप और बिच्छू के काटने से 4-6 बच्चे मर गए। लेकिन लाइट की कोई व्यवस्था नहीं हुई है।

ककवारा गांव की सिध्दपुरा दलित बस्ती के रहने वाले 16 साल का विवेक बारहवीं का छात्र हैं। वह आर्मी का जवान बनना चाहता है। विवेक लाइट की समस्या को लेकर कहता है,”डीजल के लैम्प की रोशनी में रोज पढ़ाई करनी पड़ती है। लाइट चार्ज करने के लिए 2km दूर जाना पड़ता है। कोई लाइट चार्ज कर देता है, कोई नहीं करता है। कभी बैट्री वाली लाइट की रोशनी में पढ़ता हूँ, कभी डीजल का दिया जलाकर। डीजल वहां के पेट्रोल टँकी से खरीदकर लाते हैं। डीजल महंगा हो गया है, जेब मे पैसे न होने के कारण कभी कभी डीजल नहीं ला पाता हूँ। बारिश के समय मे पक्की सड़क न होने के कारण कीचड़ में जाना पड़ता है।”

टार्च और दिए की रोशनी में पढ़ाई करता छात्र विवेक [फोटो- सत्य प्रकाश भारती, द मूकनायक]
टार्च और दिए की रोशनी में पढ़ाई करता छात्र विवेक [फोटो- सत्य प्रकाश भारती, द मूकनायक]

विवेक आगे बताते हैं, “गांव में कई बार अधिकारी आये हैं। DM साहब आये हैं, विधायक भी आये हैं। सब बस वीडियो बनाकर ले जाते हैं। चुनाव के समय मे विधायक वोट मांगने के लिए आते हैं, दलितों के पैर छूकर जाते हैं। मंत्री बन जाने के बाद वह देखने नहीं आते की बच्चे पढ़ाई कैसे कर रहे हैं। मेरे दो भाई और एक बहन है वह भी ऐसे ही दिये की रोशनी में ही पढ़ते हैं।”

पारीछा थर्मल पावर प्लांट
पारीछा थर्मल पावर प्लांट

झांसी के पारीछा से पूरे यूपी में सप्लाई होती है बिजली

उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन ने पारीछा थर्मल पावर प्लांट को 1985 में स्थापित किया गया था। पारीछा के इस प्लांट पर होने वाले बिजली उत्पादन को पूरी यूपी की सप्लाई दी जाती है। लेकिन पारीछा से 70 km दूर बसे ककवारा गांव की दलित बस्ती सिद्धपुरा के घरों में एक भी कनेक्शन नहीं है। इस पावर प्लांट मे 110 मेगावाट की नंबर एक इकाई को जुलाई 2016 में बंद कर दिया गया था। जबकि 110 मेगावाट की दूसरी इकाई को जनवरी 2020 में बंद किया जा चुका है। वर्तमान में प्लांट में 210 मेगावाट की दो व 250 मेगावाट की दो इकाइयां स्थापित हैं, जिनसे उत्पादन हो रहा है।

किसान कांग्रेस कमेटी के चेयरमैन ने प्रदर्शन कर उठाया मुद्दा

दलित बस्ती सिद्धपुरा के लोगों के बीच पहुंच किसान कांग्रेस कमेटी के चेयरमैन शिव नारायण सिंह परिहार ने 3 जून को ग्रामीणों की सड़क बिजली की समस्या को लेकर ग्रामीणों के साथ “मोदी बिजली दो” और “योगी सरकार मुर्दाबाद” के जमकर नारे लगाए थे। शिव नारायण परिहार ने बताया, “यहां ऐसे कई गांव हैं जहाँ आज भी बिजली नहीं है। अभी तक उन्होंने प्रशासन से लड़कर कई गांवों को कनेक्शन दिलवाए हैं। ककवारा गांव की दलित बस्ती के मामले में भी मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री के साथ अधिकारियों को कई बार लिखित ज्ञापन दिया है, लेकिन आजतक कोई सुनवाई नहीं हुई।”

लगभग 1 किमी दूरी पर है पावर हाउस

दलित बस्ती ककवारा के रहने वाले बृज किशोर(40) बताते हैं, “गांव से लगभग 1 किमी की दूरी पर दो साल पहले रेवन गांव और बेरवई गांव के बीच नया पावर हाउस बनाया गया था। इससे रेवन गांव, बेववई गांव और ककवारा गांव में बिजली की सप्लाई होती है। इससे पहले मऊरानी पावर हाउस से बिजली सप्लाई होती थी। दलित बस्ती की कच्ची सड़क सरकारी सेवाओं से जोड़ती है।”

विधायक और अधिकारियों से प्रधान ने भी कई बार शिकायत

ककवारा गांव के मौजूदा प्रधान सर्वेश राय ने बताया कि गांव में 1987 से प्रधानी चली आ रही है। अब तक 6 प्रधान कार्यकाल बिता चुके हैं,लेकिन इस समस्या का समाधान नहीं हो सका है। ग्राम प्रधान सर्वेश राय अधिकारियों की शिकायत करते हुए कहते हैं, “मैंने खुद SDM और पूर्व भाजपा विधायक बिहारी लाल आर्य से तीन साल पहले शिकायत की थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। 2005 में गांव में लाईट की व्यवस्था के लिए खंभे मंगाए गए थे। वह खंभे आज भी एक किनारे पड़े हुए हैं.”

जिम्मेदारों का रैवैया जानिए

गांव की इस समस्या पर द मूकनायक ने मंडलायुक्त और UPPCL के MD को CUG नम्बर पर फोन और मैसेज दोनों किया, लेकिन उन्होंने न तो फोन उठाया, और न ही इसका कोई जवाब मिला।

इस मामले में जिलाधिकारी झांसी के CUG नम्बर पर 5 जून रविवार 2:36PM से सम्पर्क किया गया। जिलाधकारी का कॉल डायवर्ट होकर उनके आवास जा पहुंचा। कॉल फोन ओपरेटर ने उठाया। उसने कहा, “साहब कहीं बाहर निकले हुए हैं। आप अपनी समस्या बता दीजिये नोट कर लेता हूँ।” यह कहकर फोन रख दिया गया। इसके बाद जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार को CUG नम्बर पर 2:44 PM पर मामले की जानकारी देते हुए द मूकनायक ने मैसेज किया-,

“झांसी की मऊरानी तहसील में ककवारा गांव पड़ता है। उसके मजरे दलित बस्ती में आजादी के 75 साल बाद भी घरों में बिजली का कोई कनेक्शन नहीं है। लगभग गांव में 50 परिवार रहते हैं और 300 की आबादी है। लोग वहां पर डीजल से दिया जलाकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। आपका फोन मिलाया गया लेकिन वह आपके आवास पर ट्रांसफर हो जा रहा है।कृपया इस मामले में आप क्या कहना चाहेंगे अवगत करा दें।”

मैसेज के लगभग चार घण्टे बाद शाम 6:22 PM पर जिलाधिकारी आवास ने द मूकनायक से सम्पर्क किया और बताया कि जिलाधिकारी आपसे बात करना चाहते हैं। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार ने कहा, “तहसील दिवस में जनता दर्शन लगता है, लेकिन मामले को लेकर किसी आदमी ने अप्रोच नहीं किया, न ही संज्ञान में आया है, दिखवाता हूं।”

हालांकि, इस मामले में उत्तर प्रदेश कांग्रेस किसान कमेटी के चेयरमैन शिव नारायण सिंह परिहार जिलाधिकारी की बातों का खंडन करते हुए बताते हैं, “27 नवम्बर 2020 को लेटर हेड पत्रांक संख्या -20/मऊ/1-3/200 के माध्यम से मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री,मंडलायुक्त ,जिलाधिकारी सहित कई अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया था।”

द मूकनायक के सवालों ने अधिकारियों में मचा दी खलबली

सभी अधिकारियों से कॉल और मैसेज से सम्पर्क करने के बाद किसी अधिकारी ने पूरा मामला झांसी जिला प्रशासन के व्हाट्सएप ग्रुप पर डाल दिया, जिसके बाद अधिकारियों में हड़कम्प मच गया। इस ग्रुप में झांसी जिला प्रशासन के लगभग सभी अधिकारी मौजूद हैं। पूरे मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण एस के अग्रवाल ने द मूकनायक से 5 जून को ही 9:03 PM पर सम्पर्क किया और मामले की पूरी जानकारी मांगी। SP ग्रामीण झांसी ने कहा, “DM साहब को आपने कोई कम्प्लेन की होगी। मऊरानी मेरे पास है। आज टीम भेजकर सर्वे करवा लेते हैं। देखते क्या कहां, और कैसे होगा। बिजली विभाग के झांसी के GM साहब ने व्हाट्सएप ग्रुप में मैसेज डाला। तो हम लोगों ने उसे तुरंत उठाया।”

वीडिओ स्टोरी यहां देखें:

Satya Prakash Bharti
Satya Prakash Bharti, Journalist The Mooknayak

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