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Wednesday, November 30, 2022

इंदौर और पलक्कड़ आईआईटी का शोधः हृदय की गतिविधियों के आधार पर डिवाइस लगाएगी पूर्वानुमान

भोपाल। देश में बढ़ते हृदय रोग और हार्टअटैक से होने वाली मौतों को कम करने और समय पर उपचार के लिए आईआईटी इंदौर और आईआईटी पलक्कड़ मिलकर एक ऐसी डिवाइस के निर्माण पर काम कर रहे हैं, जो हृदय से निकलने वाले सिग्नल का विश्लेषण कर बीमारियों के बारे में सचेत कर देगी। दरअसल 50 प्रतिशत हृदय के रोगियों को समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण मौत हो जाती है। इलाज में देरी भी इसलिए होती है क्योंकि हृदय से जुड़ी परेशानी देरी से समझ आती है।

इस शोध से एक ऐसी घड़ी तैयार की जा रही है, जो मोबाइल से अटैच होकर हृदय संबंधी बीमारियों का सटीक पूर्वानुमान लगाएगी। इसे इस तरह विकसित किया जा रहा है कि मरीज के साथ-साथ परिजन व डॉक्टरों तक भी जानकारी पहुंच सके। एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में हार्ट अटैक के करीब 50 फीसदी मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। पिछले दिनों ही डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि हर तीन में से मरने वाले एक की मौत दिल की बीमारी के कारण से होती है।

हार्ट की गतिविधियों को समझने की डिवाइस का शोध आईआईटी इंदौर के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. डॉ. राम बिलास पचौरी व आईआईटी पलक्कड़ के डॉ. एम. सबरीमलाई मणिकंदन के नेतृत्व में किया जा रहा है। आईआईटी इंदौर के शोधार्थी नबस्मिता फुकान, अचिंत मंडल और आईआईटी पलक्कड़ के शोधार्थी फवाज अब्दुल रजाक, जोमोल वर्गिस इसके लिए संयुक्तरूप से काम कर रहे है। टीम ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च को भी प्रस्ताव दिया है। टीम को भारत सरकार ने 1.23 करोड़ रुपए का अनुदान दिया है।

मरीज से जुड़ी जानकारी परिजन और डॉक्टरों तक भी पहुंचेगी सिग्नल की क्वालिटी पर जोर दिया जा रहा है। ताकि बीमारियों और हार्टअटैक को लेकर सटीक पूर्वानुमान मिले। डॉ. पचोरी के मुताबिक अस्पतालों और डॉक्टरों के पास ऐसी कई डिवाइस हैं, जिनकी मदद से बीमारियां और हार्टअटैक का पूर्वानुमान लगा सकते हैं, लेकिन यह सारे उपकरण एक ही स्थान पर इस्तेमाल किए जा सकते हैं। साथ ही अगर उस डिवाइस से जुड़े इलेक्ट्रोड मरीज के शरीर पर गलत जगह पर लग जाते हैं तो सिग्नल भी खराब मिलते हैं। हमने एक ऐसी मशीन तैयार की है, जो आसानी से शरीर पर पहनी जा सके और प्राप्त होने वाले ईसीजी सिग्नल उच्च गुणवत्ता के हों। यह वायरलेस सिस्टम होगा। बैटरी लाइफ बढ़ाने और गलत सूचना पर अलर्ट जारी न हो, इसे लेकर भी विशेष ध्यान रखा गया है। इस शोध में टीम ने डीप लर्निंग और डाटा क्रिप्टो कंप्रेशन की सहायता ली है। इसके पेटेंट की तैयारी भी की जा रही है।

इस डिवाइस में हृदय के सिग्नल के माध्यम से शारीरिक गतिविधि, भावनात्मक स्थिति और आस-पास के पर्यावरण की स्थिति की जानकारी भी ली जाएगी। डिप्रेशन या अत्यधिक तनाव है तो इसकी जानकारी भी परिजन को दी जा सकती है। शराब, अनियमित खान-पान, धूम्रपान की जानकारी भी ईसीजी सिग्नल के माध्यम से मिल सकेगी। इन सभी सिग्नलों का विश्लेषण कर, उन्हें आईओटी प्लेटफॉर्म और जीपीएस सेंसर से जोड़ा जाएगा, ताकि आगामी विश्लेषण के लिए विशेषज्ञों के पास पहुंच सके

डब्ल्यूएचओ ने जारी की थी रिपोर्ट

हाल ही में डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में तीन में से एक व्यक्ति की मौत हृदय की बीमारियों से होना बताया था। रिपोर्ट के अनुसार दिल के रोग से मरने वालों की संख्या काफी ज्यादा है। करीब 11 करोड़ 79 लाख लोग, सालाना दिल के रोग के कारण जान दे रहे हैं। इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि तीन में से एक मौत दिल के रोगियों की हो रही है। हालांकि अच्छी बात यह है कि 88 प्रतिशत लोग जागरूकता के कारण दिल के रोगों से खुद का बचाव भी कर रहे हैं।

द मूकनायक ने भोपाल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुमित भटनागर से बातचीत की। उन्होंने बताया कि बहुत अच्छी बात है कि ऐसी डिवाइस बनाने पर शोध किया जा रहा है। हालांकि हार्ट की गतिविधियों की निगरानी के लिए पहले ही बहुत से उपकरण मशीनें मौजूद है। लेकिन अब इस नई डिवाइस कैसे और बेहतर काम करेगी ये डिवाइस के आने के बाद ही पता चल सकेगा। डॉ. भटनागर ने हार्टअटैक पर कहा कि बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल, हैवी जिमिंग व एक्सरसाइज, स्ट्रेस और स्मोकिंग हार्ट अटैक का मुख्य कारण है। कोविड काल के बाद से इसकी चपेट में आए लोगों के ब्लड में हल्का गाढ़ापन देखा गया है। यह भी हार्ट अटैक का कारण है। भटनागर ने कहा दिल को तंदुरुस्त रखने के लिए रूटीन एक्सरसाइज व अच्छी डाइट लेना चाहिए। फल व सलाद को भी नियमित भोजन में शामिल करना चाहिए।

Ankit Pachauri
Journalist, The Mooknayak

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