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Monday, August 8, 2022

राजस्थान : अपने रेपिस्ट को मारने वाली 14 साल की लड़की के दिमाग में आखिर चल क्या रहा था? जानें पूरा मामला…

राजस्थान। अलवर जिले में 14 साल की एक लड़की के साथ कथित तौर पर रेप, और उसके बाद आरोपी की हत्या का मामला सामने आया है। आरोप है कि, मृतक कथित तौर पर लड़की के साथ रेप और उसे ब्लैकमेल कर रहा था। साथ ही आरोपी अपने दोस्तों के साथ संबंध बनाने का दबाव उस पर डाल रहा था। मृतक पूर्व सरपंच का बेटा बताया जा रहा है, उसकी लाश 18 मई को अलवर के कोटकासिम इलाके में सड़क के किनारे मिली।

घटना को लेकर विक्रम उर्फ लाला (45) के परिजनों ने 18 मई की सुबह करीब 5 बजे पुलिस थाने में सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल की जांच की। उसके बाद शव का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए घटना के बाद उच्च अधिकारियों ने भी मौका मुआयना किया। यह घटना स्थानीय लोगों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, पीड़िता दसवीं में पढ़ती है, और वह विक्रम के घर पानी भरने जाया करती थी। करीब डेढ़ महीने पहले लड़की ने विक्रम का फोन मांगा था, अपने एक दोस्त से बात करने के लिए। विक्रम ने फोन तो दिया लेकिन लड़की और उसके दोस्त की बातचीत उसने रिकॉर्ड कर ली। आरोप है कि, इसके बाद विक्रम उसे ब्लैकमेल करने लगा कि उसके दोस्त के बारे में वो सबको बता देगा। इसके बाद उसने कथित तौर पर नाबालिग का रेप किया।

मामले को लेकर ASP अतुल साहू बताते हैं कि, “विक्रम से पहले गांव के दो और लड़के भी नाबालिग का रेप कर रहे थे। करीब छह महीने पहले उन लोगों को नाबालिग के दोस्त के बारे में पता चला था। पीड़िता गांव के ही युवक के साथ पिछले एक साल से रिलेशनशिप में थी। इसी बात को लेकर पहले दो युवकों और फिर विक्रम ने रेप किया. विक्रम नाबालिग पर अपने दोस्तों के साथ भी शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बना रहा था. इसी से परेशान होकर लड़की ने उसकी हत्या कर दी।”

ASP अतुल साहू के मुताबिक, 17 मई की शाम विक्रम शराब के नशे में धुत्त था. उसी समय नाबालिग पानी भरने के बहाने उसके घर गई. और विक्रम को पास के खेत में आने का इशारा किया. करीब रात 9:30 बजे विक्रम नशे में खेत में गया। इसी बात का नाबालिग ने फायदा उठाया और अपने दुपट्टे से गला घोंट कर विक्रम को मार दिया, और शव सड़क किनारे फेंक दिया।

ASP अतुल साहू ने ये भी कहा कि, ये पूरा मामला बेहद पेचीदा था। घटनास्थल से हमें कोई ज्यादा सबूत नहीं मिले थे। कई लोगों से पूछताछ और तकनीकी सहायता के जरिए हम नाबालिग तक पहुंचे। पूछताछ की तो यह सारा खुलासा हुआ।

मामले में नाबालिग ने कोटकासिम थाने में सोमवार को रेप का मामला दर्ज करवाया है।

पुलिस को मौके पर विक्रम का मोबाइल, जला हुआ दुपट्टे का टुकड़ा और खून के निशान मिले. मोबाइल में पुलिस को नाबालिग की रिकॉर्डिंग भी मिली. इसके बाद पुलिस ने नाबालिग को हिरासत में लेकर अलवर नारी निकेतन में भेजा. और पूछताछ की तो उसने पूरी कहानी बता दी. नाबालिग ने विक्रम सहित तीन लोगों के खिलाफ 6 जून को रेप का मामला दर्ज करवाया है.

विक्रम के दो बेटे हैं। बड़ा बेटा ग्रेजुएशन कर चुका है। छोटा बेटा दिल्ली यूनिवर्सिटी में बीएससी फाइनल ईयर का स्टूडेंट है।

कोटकासिम थाना अधिकारी महावीर सिंह शेखावत ने बताया कि मामला सामने आने के बाद नाबालिग को हिरासत में लेकर अलवर के नारी निकेतन में भेजा गया है। नाबालिग ने विक्रम समेत तीन लोगों के खिलाफ सोमवार को रेप का मामला दर्ज करवाया है।

सेल्फ डिफेंस में हुई हत्या में कोर्ट रिआयत बरतती है: सीनियर अधिवक्ता दिशा वाडेकर

इस तरह के मामलों में कोर्ट की कार्यवाही को लेकर सीनियर लॉयर दिशा वाडेकर से द मूकनायक ने बात की। दिशा वाडेकर भारत के सर्वोच्च न्यायालय में वकील हैं और संवैधानिक और भेदभाव विरोधी कानून पर काम करती हैं। वह सबरीमाला मंदिर प्रवेश मामले और पदोन्नति में आरक्षण जैसे मामलों में वकील रही हैं। वाडेकर बताती हैं कि, “इस तरह के ज्यादातर केस में कोर्ट पीड़िता को लेकर रिआयत बरतती है। केस में ये देखा जाता है कि मर्डर किसी प्लान के तहत तो नहीं किया गया है या किसी आधुनिक हथियार की मदद तो नहीं ली गई है। किसी के साथ मिलकर इसको अंजाम तो नहीं दिया गया है। अगर ऐसा होता है तो कोर्ट सख्ती से पेश आती है।”

वाडेकर आगे बताती हैं कि, कोर्ट ये भी सुनिश्चित करती है कि अगर सेल्फ डिफेंस में ये सब किया गया है तो रिआयत मिलती है। देखा जाता है कि किन परिस्थितियों में घटना हुई है। हिट ऑफ द मूवमेंट में अगर एक्शन लिया गया है और खुद का बचाव करने की कोशिश की गई की गई तो कोर्ट उन सब में चीजों मध्यनज़र रखते हुए केस स्टडी करती है और आगे की कार्यवाही सुनिश्चित करती है।

बच्चों को चाइल्ड एब्यूज के बारे में जानकारी देना बेहद जरूरी: मनोचिकित्सक डॉ. ओम प्रकाश

वहीं इस तरह के केस में पीड़िता की मनोस्थिति क्या रहती है ये जानने के लिए द मूकनायक ने मनोचिकित्सक डॉ. ओम प्रकाश से बात की। डॉ. ओम प्रकाश, वरिष्ठ मनोचिकित्सक, मानव व्यवहार और संबद्ध विज्ञान संस्थान, आइएचबीएएस (इहबास), नई दिल्ली में कार्यरत हैं। डॉक्टर ओम प्रकाश बताते हैं, “सबसे पहले हमें अपने बच्चों को चाइल्ड एब्यूज के बारे में बताना चाहिए, उनसे समय-समय पर बात करते रहना चाहिए ताकि वो ऐसी किसी भी चीज को बताने में संकोच न करें। वैसे हम एक समाज के तौर पर ऐसी घटनाओं को रोकने में बिलकुल फेल साबित हुए हैं। हम विकास की बात करते हैं लेकिन ऐसी चीजे हमारी मूलभूत जरूरतें हैं। चाइल्ड एब्यूज के बारे में बच्चों को पढ़ाया जाना चाहिए।”

डॉक्टर ओम प्रकाश बताते हैं कि, ऐसे केस में बच्चे कुंठा और क्रोध से भरे रहते हैं जो स्वाभाविक है। बच्चे का व्यवहार भले ही अपराधिक प्रवृति का न रहा हो लेकिन फिर भी अंत में वो ऐसे कदम उठाने पर मजबूर हो जाते हैं और उनका ये गुस्सा ऐसी घटनाओं के रूप में सामने आता है।

इस केस के बारे में बात करते हुए वो आगे कहते हैं कि, ऐसा शायद ही रहा होगा कि बच्ची ने अपने परिजनों या अपनों को इसके बारे में बताने की कोशिश न ही हो। बच्चे ने कोशिश की होगी लेकिन शायद उसके आसपास रहने वाले लोग उसे समझने में नाकामयाब रहे। यही नाकामयाबी हमें एक समाज के तौर पर शर्मिदा करती है, और सोचने पर मजबूर करती है। हमें एक समाज के रूप में बच्चों के ऐसे मामलों में बहुत काम करने की जरूरत है, साथ ही बच्चों को जागरूक और सचेत करने की जरूरत है।

Arun Kumar
Arun Kumar, Journalist The Mooknayak

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