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Wednesday, November 30, 2022

राजस्थान: आदिवासी कालबेलिया समाज के 51 लोगों को पीएम आवास स्वीकृत, मकान बनाने के लिए जमीन ही नहीं!

लाभांवित परिवारों ने कलक्टरी पर किया प्रदर्शन, कलेक्टर के सामने बीन बजाकर रखी मांग।

बाड़मेर। कालबेलिया नृत्य से देश-विदेश में प्रसिद्ध आदिवासी कालबेलिया समाज की आर्थिक व सामाजिक हैसियत क्या है, इसका एक उदाहरण हाल में राजस्थान के बाड़मेर जिले में देखने को मिला। यहां आदिवासी कालबेलिया समाज के 51 परिवार पीएम आवास स्वीकृत होने के बावजूद जमीन नहीं होने से मकान नहीं बना पा रहे हैं। समाज के लोग कलेक्टर के आगे बीन बजाकर जमीन आवंटन करने की मांग की है। मामला बाड़मेर जिले के समदड़ी पंचायत समिति के बामसीन ग्राम पंचायत का है। समुदाय के लोगों ने कलेक्टर को ज्ञापन देकर जमीन आवंटन करने की मांग की है।

दरअसल, बाड़मेर जिले भर में कालबेलिया समाज की बड़ी आबादी रहती है। यह परिवार हमेशा से मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहा है। घरों में बीन बजाकर अपना व अपने परिवार का पेट पालते हैं। समदड़ी पंचायत समिति के बामसीन ग्राम पंचायत में कालबेलिया समुदाय 150 परिवार 40 सालों से गोचर भूमि पर रह रहे हैं। इसमें से 51 परिवार को पीएम आवास स्वीकृत हुआ, लेकिन भूमिहीन होने की वजह से यह परिवार आवास नहीं बना पा रहे हैं।

समुदाय ने इस समस्या को लेकर समदड़ी विकास अधिकारी व तहसीलदार को ज्ञापन देकर जमीन आवंटन करने की मांग की थी। सोमवार को कालबेलिया समाज के लोग चौहटन प्रधान रूपाराम के नेतृत्व में कलेक्टर लोक बंधु से मिले। इस दौरान कालबेलिया परिवार के लोगों ने कलेक्टर के सामने बीन बजाकर अपने हुनर भी दिखाया। कलेक्टर ने कालबेलिया समाज के लोगों का आश्वासन दिया है कि एसडीएम व तहसीलदार से बात कर पीएम आवास योजना से आवास बनाने के लिए जमीन आवंटन की जाएगी।

कालबेलिया समाज के शुमारनाथ का कहना है कि, “जमीन आवंटन नहीं होने की वजह से पीएम आवास स्कीम का 51 परिवार को फायदा नहीं मिल रहा है। हमने कलेक्टर साहब के सामने बीन बजा कर यह संदेश दिया कि साहब हमारे पास धन दौलत जमीन के नाम पर यह बीन ही है। इसी को बजा कर पीढ़ियों से गुजारा कर रहे हैं अगर अब आप हमारे जमीन आवंटित कर देंगे तो हमें भी सर्दी-गर्मी व बारिश में रहने के लिए एक पक्की छत मिल जाएगी।”

कौन हैं कालबेलिया?

राजस्थान के जनजातीय समूहों में से एक है कालबेलिया। इन्हें सपेरा, सपेला जोगी या जागी भी कहा जाता है। कालबेलिया जनजाति की सर्वाधिक आबादी राजस्थान के पाली जिले में है, इसके बाद अजमेर, चित्तौड़गढ़, उदयपुर व बाड़मेर का स्थान आता है। यह एक खानाबदोश समूह है। प्राचीन काल में यह लोग घुमंतू जीवन व्यतीत करते थे। इनका पारंपरिक व्यवसाय साँप का खेल दिखाकर जीविका कमाना है। साथ हीं महिलाएं नृत्य भी करती हैं, इसी कारण इस लोक नृत्य का स्वरूप और इसको प्रस्तुत करने वाले कलाकारों के परिधान में साँपों से जुड़ी चीजें झलकती हैं। वहीं कालबेलिया लोक नृत्य काफी पसंद भी किया जाता है।

Azrudin
अजरूद्दीन स्वतंत्रत पत्रकार हैं. अजरूद्दीन ने जनतंत्र टिवी, जन टिवी राजस्थान, प्राइम न्यूज़ टीवी, मैगजीन प्रिन्ट मीडिया में काम कर चुके हैं. इन्हें पत्रकारिता क्षेत्र में 3 वर्ष हो चुके हैं. अजरूद्दीन ने शुरूआती पढ़ाई बाड़मेर जिले के सिवाना कस्बे से की है. इन्होंने हमेशा दलित, मुस्लिम, पिछड़ों के अधिकारों की आवाज उठाने का काम किया है.

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