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Friday, October 7, 2022

मध्य प्रदेश में पोषण आहार घोटाला, प्रदेश में 10 लाख बच्चे कुपोषण का शिकार!

द मूकनायक की खास रिपोर्ट

भोपाल। मध्य प्रदेश में हाल ही में हुए पोषण आहार घोटाले के बाद प्रदेश की बीजेपी सरकार विपक्ष के निशाने पर है। घोटाले को लेकर मची सियासी रार के बीच एक तथ्य यह भी सामने आया है कि मध्यप्रदेश में 10 लाख से ज्यादा लोग कुपोषण का शिकार है। इनमें भी सर्वाधिक संख्या बच्चों और महिलाओं की है। कुपोषित बच्चों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तैर रही है। खासकर आदिवासी इलाकों में स्थिति बहुत नाजुक है। पिछले 18 वर्षों से बीजेपी की सरकार प्रदेश को कुपोषण मुक्त बनाने के दावे करती रही है। लेकिन धरातल पर स्थिति बहुत नाजुक है। पढि़ए द मूकनायक की रिपोर्टः-

विधानसभा में सवाल के बाद हुआ था खुलासा-

मध्यप्रदेश विधानसभा सत्र के दौरान गत मार्च माह में कुपोषण को लेकर पुछे गए सवाल का लिखित जवाब देते हुए सरकारी के मंत्री भारत सिंह कुशवाहा ने बताया था कि प्रदेश में कुपोषण के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसके बाद भी नतीजे बेहतर नहीं आ रहे है। प्रदेश में आज भी 10 लाख से ज्यादा बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। इस जवाब में सरकार ने माना कि स्थतियों में सुधार नहीं हुआ है।

आंकड़ों के अनुसार मध्यप्रदेश में 0 से लेकर 5 वर्ष की उम्र के 65 लाख दो हजार से ज्यादा बच्चे हैं, इनमें से 10 लाख से ज्यादा बच्चे कुपोषित हैं। इनमें से 2 लाख 64 हजार 609 ठिगनेपन और 13 लाख सात हजार 469 दुबलेपन के शिकार हैं। वहीं 6 लाख 30 हजार बच्चे कम वजन के है।

सरकार कुपोषण पर असंवेदनशील

श्योपुर जिले के पातालगढ़ गांव में फरवरी 2005 में एक के बाद एक 13 बच्चों की कुपोषण के कारण मृत्यु हुई थी। उस समय भी यह मुद्दा जोरों से उठा था। हाईकोर्ट ने मामले का संज्ञान लेकर वहां आंगनबाड़ी खोलकर कुपोषण खत्म करने के निर्देश दिए किन्तु कुपोषण सरकार का प्राथमिक मुद्दा नहीं है। इसलिए वहां आंगनबाड़ी नहीं खोली गईं। परिणाम यह हुआ कि मार्च से मई 2006 के बीच वहां फिर 10 बच्चे असामयिक मौत के शिकार हो गए। इस गांव में पिछले तीन सालों में केवल पांच दिन का सरकारी रोजगार ग्रामीणों को मिला है, अस्पताल 63 किलोमीटर दूर है, मध्यान्ह भोजन और आंगनबाड़ी योजना का कोई अस्तित्व नहीं था।

क्या है कुपोषण?

दरअसल कुपोषण के मायने होते हैं आयु और शरीर के अनुरूप पर्याप्त शारीरिक विकास नहीं होना, एक स्तर के बाद यह मानसिक विकास की प्रक्रिया को भी अवरुद्ध करने लगता है। बहुत छोटे बच्चों खासतौर पर जन्म से लेकर 5 वर्ष की आयु तक के बच्चों को भोजन के जरिए पर्याप्त पोषण आहार नहीं मिलने के कारण उनमें कुपोषण की समस्या जन्म ले लेती है। इसके परिणाम स्वरूप बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम होना होता है और छोटी-छोटी बीमारियाँ उनकी मृत्यु का कारण बन जाती हैं। ऐसे बच्चो में प्रोटीन, विटामिन्स, आदि की कमी होती है। रोगप्रतिरोधक झमता कम होने के कारण वह छोटे-मोटे रोग से भी नहीं लड़ पाते और मौत हो जाने का खतरा बढ़ जाता है।

मध्यप्रदेश में पोषण आहार घोटाला!

मध्य प्रदेश में पोषण आहार घोटाले किए जाने का मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री शिवराज की सरकार पर पोषण आहार में गड़बड़ी को लेकर आरोप लग रहे है। दरअसल कैग की रिपोर्ट में प्रदेश में पोषण आहार बांटने में गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद कांग्रेस शिवराज सरकार पर हमलावर हो गई है और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

हालांकि इस पूरे मामले में सरकार अपना पक्ष भी रख रही है। कैग की रिपोर्ट से मचे बवाल पर प्रदेश सरकार की ओर से चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पक्ष भी रखा था।

यहां समझ कैसे हुआ घोटाला

दरअसल, मध्यप्रदेश में महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत काम करने वाली आंगनवाडि़यों में कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं को सरकार की ओर से पोषण आहार वितरित किया जाता है। इस पोषण आहार को लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी जिन निजी कंपनियों को दी गई थी, उन्होंने राशन को लोगों तक नहीं पहुंचाकर सिर्फ कागजों पर इसकी खनापूर्ती कर दी।

कैग रिपोर्ट से सामने आया कि, भोपाल, छिंदवाड़ा, धार झाबुआ, रीवा, सागर, सतना और शिवपुरी जिलों में करीब 97 हजार मैट्रिक टन पोषण आहार का स्टॉक के बारे में बताया गया था, लेकिन उसमें से सिर्फ 87 हजार मीट्रिक टन पोषण आहार बांटने के बारे में बताया गया है। यानी करीब 10 हजार टन आहार में गड़बड़ी हुई है। यह 10 हजार टन कहां है! अब यह जांच का विषय बना हुआ है।

62 करोड़ के घोटाले का आरोप!

हेराफेरी कर कागजों में बटें इस आहार की कीमत करीब 62 करोड़ रुपए है। इसी प्रकार मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले के दो विकासखंडों खनियाधाना और कोलारस में सिर्फ आठ महीने के भीतर पांच करोड़ के आहार के भुगतान की अनुमति दे दी गई, लेकिन इसकी जांच होने पर स्टॉक के रजिस्टर तक नहीं मिले।

महिला बाल विकास को भेजी है रिपोर्ट-

एजी ऑफिस ने महिला बाल विकास विभाग को 1 अप्रैल 2018 से 31 मार्च 2020 के बीच टेक होम राशन से संबंधित प्रारंभिक रिपोर्ट भेजी है। आमतौर पर एजी किसी मामले में जब रिपोर्ट के जरिए तहकीकात करता है, उस प्रक्रिया में जो तथ्य मिलते हैं उसको लेकर एजी ऑफिस संबंधित विभाग को ड्राफ्ट रिपोर्ट भेजता है। एजी के बिन्दुओं पर संबंधित विभाग जांच करके एजी को जवाब देता है। उसके बाद रिपोर्ट बनती है।

Ankit Pachauri
Journalist, The Mooknayak

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