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Friday, October 7, 2022

राजस्थानः अस्पताल में चिकित्सक न नर्सिंग स्टॉफ, परिसर के बाहर ट्रैक्टर-ट्रॉली में ही डिलीवरी

सवाईमाधोपुर के मलारना स्टेशन प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर रात में नहीं मिला चिकित्सा स्टाफ, अस्पताल के बाहर ट्रैक्टर-ट्रॉली में महिला का प्रसव, जच्चा-बच्चा घर ले गए परिजन

जयपुर। राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में निशुल्क दवा वितरण योजना, मुख्यमंत्री निशुल्क जांच योजना व मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना जैसी जनउपयोगी योजनाओं की देश भर में मिसाल दी जाती है, लेकिन ग्रामीण अंचल के प्राथमिक व सामुदायिक स्तर के सरकारी अस्पतालों की बदहाल व्यवस्था आमजन को परेशान कर रही है।

ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी अस्पताल की बदहाली का एक मामला सवाईमाधोपुर जिले के बौंली ब्लॉक से सामने आया है। यहां राजकीय प्राथमिक अस्पताल मलारना स्टेशन के बाहर एक घण्टे तक एक प्रसूता प्रसव पीड़ा से तड़पती रही। परिजनों ने यहां कार्यरत एएनएम को भी फोन कर मदद मांगी, लेकिन नर्स ने खुद को बाहर बताते हुए अस्पताल आने से इनकार कर दिया।

इसी जद्दोजहद के बीच ट्रैक्टर-ट्रॉली में ही प्रसव हो गया। गांव से साथ आई महिलाओं ने बिना मेडिकल सहायता के प्रसव करवाया। प्रसव के बाद भी कोई अस्पताल नहीं पहुंचा तो परिजन जच्चा-बच्चा को वापस घर ले गए। जच्चा-बच्चा सुरक्षित हैं।

कांतटड़ा नदी से आए थे प्रसूता को लेकर

प्रसूता राजवती पुत्री जगदीश बैरवा राजस्थान के करौली जिले की ग्राम पंचायत हाड़ौती के कांतटड़ा बनास नदी की रहने वाली है। राजवती इन दिनों अपने पीहर में रह रही है। शुक्रवार रात प्रसव पीड़ा हुई तो परिजन अस्पताल ले जाने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली में बैठा लिया। हाथों में बैटरी टॉर्च लेकर रिश्तेदार महिलाएं भी साथ बैठ गईं। पहले प्रसव के लिए करौली जिले के हाड़ौती के सरकारी अस्पताल जाना चाहते थे, लेकिन नदी में पानी का बहाव होने से दूसरी तरफ सवाईमाधोपुर जिले के मलारना स्टेशन सरकारी अस्पताल पहुंचे। रात के लगभग साढ़े 8 बजने वाले थे। अस्पताल के बाहर अंधेरा था। प्रसूता के साथ आई महिलाओं ने बताया कि अस्पताल में कोई भी नहीं था। प्रसूता दर्द से तड़प रही थी। हमे कोई मदद नहीं मिली।

हालात बदतर

द मूकनायक को मलारना स्टेशन के रहने वाले एडवोकेट राकेश गुर्जर ने बताया कि रात 9 बजे अस्पताल के बाहर ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़ा था। एक महिला दर्द से कराह रही थी। मैंने उनसे बात की तो अस्पताल में चिकित्साकर्मी नहीं होने की बात कही। रात में कोई नहीं था। मैं भी कुछ मदद नहीं कर सका। यहां के सरकारी अस्पताल में ऐसी लापरवाही की घटनाएं रोज सामने आती हैं। रात के समय कोई नहीं रहता। अस्पताल में चिकित्सक कौन है। इस बारे में कोई नहीं जानता। दिन के समय भी कम्पाउंडर व नर्स ही मरीजों का उपचार करते हैं।

द मूकनायक ने प्रसूता के पिता जगदीश बैरवा से बात की तो उन्होंने कहा- “मेरी बेटी का प्रसव हुआ है। वो लोग रात में मलारना स्टेशन के सरकारी अस्पताल गए थे। वहां चिकित्सक नहीं मिले। शुक्र जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित है।

द मूकनायक ने इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. धर्मसिंह मीना से बात की उन्होंने कहा- “ग्रामीण इलाके के अस्पतालों में रात के समय चिकित्साकर्मी नहीं मिलने की शिकायतें मिल रही है। मलारना स्टेशन अस्पताल के बाहर ट्रैक्टर ट्रॉली में प्रसव का वीडियो मिला है। जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेंगे।“

Abdul Mahir
अब्दुल माहिर 2003 से लगातार राजस्थान पत्रिका में बतौर रिपोर्टर के रूप में काम कर चुके हैं। इसके अलावा पत्रिका टीवी में भी कार्य कर चुके हैं। मौजूदा समय में अब्दुल माहिर राजस्थान से द मूकनायक के लिए रिपोर्ट कर रहे हैं।

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