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Friday, October 7, 2022

हजारीबाग घटनाः 10 हजार के चक्कर में मेरी बेटी की जान चली गई- मिथिलेश कुमार मेहता

पिछले सप्ताह दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एनडीटीवी के एक प्रोग्राम में लोन रिकवरी का जिक्र करते हुए कहा था कि लोन नहीं भर पाने की स्थिति में सरकार अपने करीबियों के लोन को माफ कर देती है। वहीं दूसरी ओर अगर कोई मध्यमवर्गीय और गरीब परिवार लोन की कुछ किस्ते नहीं भर पाता है तो उसकी कुर्की कर दी जाती है।

केजरीवाल का कथन हजारीबाग की लोन रिकवरी वाली घटना से एकदम मेल खाता है। जहां समय से लोन की किस्त नहीं भर पाने की कीमत एक परिवार को अपनी गर्भवती बच्ची को खोकर चुकानी पड़ी है। दरअसल, झारखंड के हजारीबाग जिले के इचाक प्रखंड के सिझुआ गांव से 16 सितंबर के दिन अखबारों में खबर आई की महिन्द्रा फाइसेंस के रिकवरी एजेंन्ट ने एक गर्भवती महिला के गाड़ी के नीचे रौंद दिया।

दरअसल हजारीबाग के सिझुआ गांव के मिथिलेश कुमार मेहता एक विकलांग किसान है। जिनके पास कुछ अपनी जमीन है और कुछ वह पट्टे पर लेकर खेती करते है ताकि अपना जीवन गुजार सकें। लोन रिकवरी एजेंट द्वारा गर्भवती बेटी को कुचले जाने के बाद ही उनके परिवार में मातम पसरा हुआ है। द मूकनायक की टीम ने इस घटना के बारे में मिथिलेश कुमार मेहता से विस्तार से जानने की कोशिश की है।

मृतक मोनिका

मिथिलेश इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत करते हुए कहते हैं कि 15 सितंबर के दिन मैं सुबह खेत में काम कर रहा था। तभी मोनिका मेरे पास आई और बोली की पापा फाइनेंस वाले ट्रैक्टर को ले जा रहे हैं इतना सुनने के तुरंत बाद ही मैं और मेरी बेटी दोनों ही बाइक से उनका पीछा करने लगे।

वह बताते है कि मेरा ट्रैक्टर घर के ही पास एक पेट्रोल पंप खड़ा रहता था। फाइनेंस कंपनी वाले डाला को खोलकर ट्रैक्टर को लेकर जाने की तैयारी कर रहे थे। मोनिका ने उन्हें समझाने की कोशिश की पर वह नहीं माने। जिसके बाद में वह दौड़कर खेत से मुझे बुलाने के लिए चली गई।

गाड़ी से रौंदने की दी धमकी

वह बताते हैं कि हमने उनका पीछा किया और उनकी कार तक पहुंच गए और आगे जाकर उनसे बात करने की कोशिश की। मोनिका ने रिकवरी एजेंट रोशन सिंह से रिकवरी के पेपर दिखाने को कहा। इतना ही देर में कार से एरिया मैनेजर ने मोनिका को डांटते हुए कहा कि “तुमको पेपर चाहिए, गाड़ी के सामने से हटो नहीं तो गाड़ी चढ़ा देंगे”। वह कहते हैं इतनी ही बात होती है इतने में पहले वह गाड़ी से बेटी को टक्कर मारते हैं और फिर गाड़ी को पीछे कर उसे रौंद देते हैं। स्थिति को देखते हुए ट्रैक्टर में बैठा ड्राइवर भी वैगन आर गाड़ी में उनके साथ बैठता और चला जाता है और ट्रैक्टर वहीं छोड़ देता है।

इस घटना के बाद मोनिका के पिता ने इचाक थाना में शिकायत दर्ज करवाई। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार मामले की जांच कर रहे अधिकारी और इचाक थाना प्रभारी एसआई धनंजय सिंह ने बताया कि मिथिलेश कुमार मेहता की शिकायत पर 16 सिंतबर को इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। जिसके अंतर्गत आईपीसी की धारा 302 के तहत हत्या का मामला दर्ज किया गया। जिसमें एक नामजद के अलावा तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है। वहीं इस घटना के पांच दिन बाद मोनिका के परिवार ने द मूकनायक को बताया कि उनका लोन रिकवरी एजेंट रोशन सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

मोनिका और उसका पति कुलदीप

इतनी देर में मोनिका के पति कुलदीप हमें बताते हैं कि रोशन सिंह गिरफ्तार तो हो गया है। लेकिन हमलोग इससे खुश नहीं है। वह कहते हैं कि “मैं चाहता हूं कि मेरी पत्नी के हत्यारे को फांसी की सजा हो। मोनिका और मेरे बच्चे को न्याय मिले।“

इतना कहते हुए वह रुक जाते हैं और एक लंबी सांस लेते हुए कहते हैं कि अभी पिछले साल ही मेरी और मोनिका की 24 मई को शादी हुई थी। वह दो महीने की गर्भवती थी। हम दोनों ही अपनी आने वाले बच्चे को लेकर बहुत खुश थे। लेकिन पलभर में ही सबकुछ खत्म हो गया। न्याय की मांग करते हुए कुलदीप कहते हैं कि मैं चाहता हूं कि अगर फांसी से भी कोई बड़ी सजा हो तो वह उस दरिंदे को मिलनी चाहिए।

वहीं दूसरी ओर मिथिलेश कुमार मेहता कहते हैं कि इस घटना के बाद ही पता नहीं कोई हमारा घर के पास टैक्टर को लगाकर चला गया है। लेकिन कंपनी की तरफ से अभी तक कोई मिलने नहीं आया है। यहां तक की महिंद्रा फाइनेंस की ऑफिस भी बंद है।

सिर्फ दस हजार में बिगड़ी बात

मिथिलेश मेहता हमें इस घटना की शुरुआत से जानकारी देते हुए कहते हैं कि उन्होंने साल 2018 में पुराना ट्रैक्टर एक्सचेंज में देकर महिंद्र फाइसेंस कंपनी से लोन पर एक नया ट्रैक्टर लिया था। जिसकी मासिक किस्त (ईएमई) 14 हजार थी। वह बताते हैं कि ट्रैक्टर फाइनेंस के बाद ही वह लगातार उसकी किस्त भरते आएं है। लेकिन लॉकडाउन के दौरान कोई भी रिकवरी एजेंट लोन की किस्त लेने को आया ही नहीं। लगभग छह महीने तक कोई नहीं आया। जबकि इससे पहले रोशन सिंह हमारे यहां हर महीने नियमित रूप से किस्त लेने आया करता था।

वह बताते हैं कि इसके बाद जब छह महीने बाद लोन रिकवरी के लिए आएं तो उसमें ब्याज लग चुका था और रकम ज्यादा हो चुकी थी। आपको बता दें लॉकडाउन के दौरान रिजर्व बैंक ने लोनधारकों को राहत देते हुए उस वक्त लोन की किस्त नहीं भर पाने की छूट दी थी। लेकिन इसके बदले में लोनधारकों को उतने समय का ब्याज देना था।

वह कहते हैं कि अब इतनी रकम हो चुकी थी कि भर पाना कठिन हो रहा था। इसलिए फाइनेंस कंपनी के अधिकारी मेरे घर आएं और 1 लाख 20 हजार में मामला तय हुआ। जिसे इसी साल जुलाई के महीने में भरना था।

वह बताते हैं कि मैंने सारी रकम इकट्ठा कर ली थी और 18 जुलाई को इसे भरने के लिए फाइनेंस कंपनी भी गया। लेकिन वहां तो मामला कुछ और ही था। वह कहते हैं कि मैं जब ऑफिस पहुंचा तो मुझे रोशन सिंह फोन कर कहता है कि 1 लाख 30 हजार भरना है। मैंने उससे कहा कि अधिकारियों के सामने तो 20 में बात पक्की हुई थी। अब 30 क्यों मांगा जा रहा था। मैं कभी देर तक वहां बैठा रहा। उसके बाद रोशन सिंह ने मुझे मैनेंजर से मिलने को कहा। मैं मैनेंजर के पास गया तो उन्होंने भी 1 लाख 30 हजार देने की ही बात कही। मैंने उनसे कहा कि फिलहाल ये रकम ले लें और 10 हजार मैं बाद में दें दूंगा। लेकिन फाइनेंस कंपनी के लोगों ने मेरी एक नहीं सुनी और मैं वापस आ गया। इसके बाद घर में रखी रकम अन्य कामों में खर्च हो गई। वह कहते काश उस दिन कंपनी वाले पैसे ले लेते तो आज मेरी बेटी हमारे साथ होती।

इतने में ही मोनिका का पति कहते हैं कि रोशन सिंह हमलोगों से पैसा लेना चाह रहा था और मैंनेजर उसके साथ मिला हुआ था तभी उन्होंने तय रकम लेने से मना कर दिया था।

इस घटना के बाद लगभग दो महीने बाद फिर एक बार 14 सितंबर को अधिकारी और रोशन सिंह एक बार फिर घर आएं और 1 लाख 20 हजार रुपए देने की बात कही। उन्होंने मुझसे ही पूछा कि मैं कब तक पैसे दे सकता हूं। मैंने 22 सितंबर को रकम भरने के लिए हां कहा।

लेकिन वह तो पहले ही हमारा यहां आ गए। वह बताते हैं कि 14 को अधिकारी हमारे घर से गए और 15 के यह घटना हुई। जबकि इस बारे में हमें कोई भी लिखित जानकारी नहीं दी गई थी।

बीबीसी की खबर के अनुसार इस पूरे मामले पर झारखंड हाईकोर्ट के वकील सोनल तिवारी का कहना है कि इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट की एक गाइडलाइन है। जिसके मुताबिक आप मसलमैन या रंगदारों को भेजकर लोन रिकवरी नहीं कर सकते हैं। इसके अलावा अगर किसी व्यक्ति के वाहन की रिकवरी करने जाते हैं तो इसकी जानकारी आपको पहले लिखित में देनी होती है।

इस घटना पर महिंद्र राज कंपनी के एमडी एंड सीईओ डॉ अनीश शाह ने प्रेस रिलीज जारी कर इस पार दुख व्यक्त किया। जिसको महिंद्रा के मालिक आनंद महिंद्र ने रीट्वीट करते हुए इस घटना पर दुःख व्यक्त किया और इस दुःख की घड़ी में परिवार को सांत्वना दी।

Poonam Masih
Poonam Masih, Journalist The Mooknayak

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