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Saturday, July 2, 2022

मुंडका अग्नि कांड: प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा, ‘फैक्ट्री में मोबाइल फोन कंपनी जमा करा लेती थी, इस वजह से बहुत से लोग मदद के लिए संपर्क नही कर पाए’

दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के मुंडका में, मुंडका मेट्रो स्टेशन के समीप स्थित एक चार मंजिला फैक्ट्री से शुक्रवार को दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। फैक्ट्री में सीसीटीवी कैमरा, राउटर आदि इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाए जाते थे। इस चार मंजिला फैक्ट्री में भीषण आग लगने की वजह से लगभग दो दर्जन से अधिक लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटनास्थल से अब तक 27 लोगों के शव मिले हैं। घटना में 16 घायल हैं, जबकि 20 से अधिक लोगों के लापता होने की बात कही जा रही है।

शनिवार को इमारत से कुछ शरीर के अवशेष मिले हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि कितने शव हैं। घटना इतनी भयानक थी कि, जिसने भी इस भीषण आग की लपटों को देखा वह दहल गया। घटना में मृत लोगो में से सिर्फ 8 लोगों की पहचान हो पाई है। पहचान के लिए डीएनए सैंपल लिए गए हैं। पीड़ित परिवार वालों का बुरा हाल है, कई लोगों के उनके अपने अभी तक नही मिल पाए हैं, जिनकी खोज जारी है। इस घटना में महिलाओं की सबसे अधिक मृत्य हुई है। 27 मृतकों में 21 महिलाएं हैं। इस घटना में फैक्ट्री मालिक के पिता अमरनाथ गोयल की भी बुरी तरह झुलस जाने के कारण मृत्य हो गई है।

भयावह आग की दुर्घटना में लापता अपनों को हॉस्पिटल में खोजते हुए उनके परिजन [फोटो- हुमा नाज़, द मूकनायक]
भयावह आग की दुर्घटना में लापता अपनों को हॉस्पिटल में खोजते हुए उनके परिजन [फोटो- हुमा नाज़, द मूकनायक]

द मूकनायक ने उस भयावह मंजर के चश्मदीदों से बात करने की कोशिश की जो फैक्ट्री से किसी प्रकार जान बचा कर निकले पाए। वैजयंती नाम की महिला जो वहां काम करती थीं, वह बताती हैं, “ये घटना 4:15 बजे के आजपास की है। उस वक्त फैक्ट्री में मीटिंग चल रही थी। ज्यादातर लोग दूसरी और तीसरी मंजिल पर थे।”

वैजयंती बताती है, “वह तीसरी मंजिल पर थी जब ये घटना हुई। आग नीचे की तरफ लगी थी, जीने (छत का एक हिस्सा) के पास साइड में जेनरेटर भी रखा था और जीने पर सामान रखा होने की वजह से आग पूरे जीने में फैल गया और बाहर निकलने का मात्र एक रास्ता भी बंद हो गया। पूरी फैक्ट्री में धुआं फैल गया। यह बहुत ही भयनाक मंजर था। फायर बिग्रेड और पुलिस को आने में देर हुई जिसकी वजह से ये घटना और भी भयावह हो गई।”

फैक्ट्री में काम करने वाली एक अन्य महिला ने बताया, “गेट पर आग लगने की वजह से लोग नही निकल पाए, इस फैक्ट्री में मोबाइल फोन कंपनी जमा कर लेती थी, जो छुट्टी के वक्त ही वापिस मिलती थी। बहुत से लोग इस वजह से संपर्क नही कर पाए। कुछ लोगों ने किसी प्रकार अपना फोन लिया और अपनो से संपर्क करने की कोशिश की। वह उनकी आखिरी कोशिश थी।

सोने लाल की पत्नी भी लापता है, घटना के दिन आखिरी बार पत्नी से बात हुई थी [फोटो- हुमा नाज़, द मूकनायक]
सोने लाल की पत्नी भी लापता है, घटना के दिन आखिरी बार पत्नी से बात हुई थी [फोटो- हुमा नाज़, द मूकनायक]

सोने लाल, जिनकी पत्नी वहां काम करती थीं, द मूकनायक से बताते हैं, “द्वारका में था जब पत्नी ने बताया कि आग लग गई है। मेरी पत्नी की वह अंतिम बातचीत थी।” वह दुखी मां से बताते हैं कि, अब तक उनकी पत्नी का पता नही चल पाया है।

इशरत, इनकी बहन मोशर्रत भी घटना में लापता हैं [फोटो- हुमा नाज़, द मूकनायक]
इशरत, इनकी बहन मोशर्रत भी घटना में लापता हैं [फोटो- हुमा नाज़, द मूकनायक]

इसी तरह, इशरत की बहन मोशर्रत भी घटना के बाद वहीं से लापता हैं। मोशर्रत का छोटा बच्चा मात्र ढाई वर्ष का है। उनकी मां का डीएनए लिए गया है।

घटना में लापता लोगों के बीच, 18 वर्षीय निशा भी गायब है, उस पर उसके पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी। पिता मानसिक रोगी हैं, मां और बहनों का बुरा हाल है। द मूकनायक ने देखा कि, संजय गांधी अस्पताल में लोग अपनों को ढूंढते फिर रहे हैं।

निशा लापता है, उनकी छोटी बहन [फोटो- हुमा नाज़, द मूकनायक]
निशा लापता है, उनकी छोटी बहन [फोटो- हुमा नाज़, द मूकनायक]

दमकल विभाग के निदेशक अतुल गर्ग ने बताया कि, “बिल्डिंग में वह सभी चीजें मौजूद थीं जिसमें आग लगने पर बड़ा हादसा हो सकता था। बिल्डिंग का जो एकमात्र जीना था उसी पर बिजली के मीटर लगे थे, जीने पर ही जनरेटर और भारी संख्या में पैक हुआ समान रखा गया था। आग ने जीने पर रखे सारे सामान को अपने चपेट में लिया और तेजी से आगे बढ़ता चला गया, जिसके कारण किसी को निकलने का मौका नहीं मिला। आश्चर्यजनक बात है कि, देश की राजधानी में ऐसी फैक्ट्री को चलाने की अनुमति कैसे दी गई? और यह अब तक शासन-प्रशासन की नजरो में कैसे नही आई। जबकि नियम साफ कहते है कि, किसी भी व्यवसायिक इमारत में 2 द्वार का होना अनिवार्य है। जिससे किसी भी आपात स्थिति में दूसरे द्वार का उपयोग किया जा सके। समय-समय पर फायर डिपार्टमेंट भी ऐसी जांच भी करता है। सुरक्षा के मानकों में इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई। हर बार एक दुर्घटना होती है, सरकारें भूल जाती हैं। कितने परिवार उजड़ जाते हैं, ऐसी लापरवाही से। इन सब पर कड़ी से कड़ी करवाई होनी चाहिए।”

इसी फैक्ट्री में लगी थी भीषण आग [फोटो- हुमा नाज़, द मूकनायक]
इसी फैक्ट्री में लगी थी भीषण आग [फोटो- हुमा नाज़, द मूकनायक]

पुलिस सूत्रों का कहना है कि, “आग पहली मंजिल से लगना शुरू हुई। पहली मंजिल पर ही कंपनी का आफिस था।”

बाहरी दिल्ली के डीसीपी समीर शर्मा ने बताया, “मामले में हरीश और वरुण गोयल को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनके खिलाफ भारतीय दंड सहिता की धारा 304, 308, 120 और 34 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। बिल्डिंग के मालिक की पहचान मनीष लाकरा के रुप में हुई है। अब तक मिली सूचना के अनुसार मनीष लाकरा की भी गिरफतारी हो चुकी है।”

जानकारी के मुताबिक, इमारत लाल डोरा की जमीन पर बनी हैं जहां इंडस्ट्री चलाने की अनुमती नही मिलती और न ही फैक्ट्री मालिक ने किसी भी प्रकार का लाइसेंस ही लिया था। नरेला जोन के लाइसेंस इंस्पेक्टर संदीप कौशिक, जनरल ब्रांच और हाउस टैक्स डिपार्टमेंट के ऑफिसर बीआर मीना को सस्पेंड किया गया है। नॉर्थ दिल्ली के कमिश्नर संजय गोयल ने कहा कि इन दोनों ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घटना पर शोक जताया और प्रधानमंत्री राहत कोष से आश्रितों को 2-2 लाख और घायलों को 50-50 हजार देने की घोषणा की है।

जबकि, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने घटनास्थल का दौरा किया। घटना पर, केजरीवाल ने कहा कि “मजिस्ट्रेटियल जांच के आदेश दे दिए गए हैं। मृतकों के परिवार को 10-10 लाख और घायलों को 50-50 दिया जाएगा।”

Huma Naaz
Huma Naaz, Journalist The Mooknayak

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