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Thursday, May 19, 2022

दलित का हाथ काटने का मामला- भाई ने बताया, स्थिति गम्भीर, सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं

रीवा। रीवा में मजदूरी मांगने पर दलित का हाथ काट देने की ख़बर पर ट्विटर समेत सभी सोशल मीडिया पर आक्रोश दिखाई दिया। ख़ासकर बहुजन समाज के लोगों ने मुद्दे पर नाराज़गी जताई और अशोक साकेत के लिए न्याय की मांग की। मगर पूरे मामले में मध्य प्रदेश सरकार या केन्द्र सरकार की तरफ से कोई भी बयान या मदद की घोषणा नहीं हुई है।

क्या था मामला-

अशोक साकेत के सगे बड़े भाई शिवकुमार साकेत ने द मूकनायक के साथ पूरी बात साझा की। उन्होंने बताया कि शनिवार सुबह साढ़े 11 बजे अशोक घर से कहकर निकले कि उन्हें गणेश मिश्रा ने मजदूरी देने के लिए बुलाया है। अशोक अपने साथ एक दोस्त को भी ले गए थे। जब अशोक वहां पहुंचे तो गणेश मिश्रा ने अशोक को गालियां दीं। शिवकुमार के मुताबिक अशोक से गणेश मिश्रा ने कहा, ‘तुम साले चमार, तुम्हारा कोई पैसा नहीं है यहां, भागो यहां से’। इसपर जब अशोक ने अपनी मजदूरी देने की ज़िद की तो गणेश अपने घर के अंदर से तलवार निकाल लाया। गणेश ने अशोक की गर्दन पर वार किया। अशोक ने बचने के लिए हाथ आगे किया तो उसका हाथ कटकर गिर गया। एक कान भी कटा है और गर्दन पर गहरा घाव है। इसके बाद लहुलुहान हालत में अशोक के साथ गए दोस्त ने उसे गाड़ी पर बैठाया और सिरमौर ले आए। यहां उनकी मरहम पट्टी की गई लेकिन हालत गम्भीर होने की वजह से उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।

भाई ने बताया सरकार से कोई मदद नहीं मिली-

अशोक साकेत के भाई शिवकुमार से सोमवार को मूकनायक टीम ने बात की। शिवकुमार ने बताया कि अशोक मुश्किल से ही कुछ बोल पा रहे हैं। डॉक्टर इलाज कर रहे हैं लेकिन स्थिति में ख़ास सुधार नहीं हो रहा है। साथ ही शिवकुमार कहते हैं कि सरकार की तरफ से कोई मदद या किसी तरह का कोई आश्वासन नहीं मिला है। गरीब परिवार किसी तरह से इलाज का खर्चा उठा रहा है। मजदूरी करके घर चलाने वाले इस परिवार का गुज़ारा ऐसे ही मुश्किल से चलता है ऐसे में इस तरह के खर्चे कहां से पूरे होंगे।

Shubhi Chanchal
शुभी चंचल, मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट, द मूकनायक | Email: shubhi.chanchal@themooknayak.in | शुभी चंचल द मूकनायक से बतौर मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट जुड़ी हैं। शुभी लगभग 10 वर्षों से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में काम कर रही हैं। इसके साथ ही सोशल मीडिया हैंडलिंग और विडियो कंटेंट पर भी काम किया है। शुरुआती पढ़ाई लखनऊ से करने के बाद आईआईएमसी से हिन्दी पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। फिर हिन्दुस्तान हिन्दी, दी लल्लनटॉप, नवभारतटाइम्स जैसे मीडिया संस्थानों में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर काम करने के बाद लगभग ढाई वर्ष तक महिलाओं और वंचित समुदाय की न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने वाली संस्था आली के साथ काम किया है। हाशिए पर मौजूद समुदायों के साथ खड़े रहने को हमेशा तत्पर हैं। ब्राह्मणवादी पितृसत्तात्मक सोच के कतई ख़िलाफ़ हैं। चाहती हैं कि हम सब ऐसे समाज की तरफ बढ़ सकें जहां सभी समान हों, सभी को समान अवसर मिले।

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