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Monday, August 8, 2022

कोलकाता : सेंट स्टीफेन स्कूल की टीचर्स ने प्रिंसिपल पर लगाया उत्पीड़न का आरोप, पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट

कोलकाता के सेंट स्टीफेन स्कूल की दो टीचर्स ने अपने प्रिंसपल और स्कूल सेक्रेटरी के खिलाफ उत्पीड़न मामले की शिकायत की। पहले भी प्रिसिंपल को टीचर्स के उत्पीड़न मामले में निलंबित किया जा चुका है।

“मुझे पढ़ाना बहुत अच्छा लगता है। हर साल नए बच्चों के साथ मिलना। बच्चों के साथ बच्चे ही बना जाना। मैं इस स्कूल की ब्रांच में लगभग 10 सालों से पढ़ा रही थी। लेकिन पहले ऐसा कभी नहीं हुआ। जिस तरह से इस बार हो रहा है।” यह कहना है 51 साल की सरिता (बदला हुआ नाम) का। जो कोलकाता के बहुचर्चित स्कूल सेंट स्टीफेन स्कूल में पढ़ाती हैं। आरोप है कि, स्कूल में महिला टीचर्स को कई तरह से प्रताड़ित किया जा रहा है।

कोलकाता का सेंट स्टीफेन स्कूल एक मिशनरी स्कूल है। जिसकी सिर्फ कोलकाता में ही 28 ब्रांच हैं। इसमें बड़ी संख्या में महिला टीचर्स पढ़ाती हैं। लेकिन अब यह स्कूल टीचर्स के साथ उत्पीड़न (हरेसमेंट) के मामले में सुर्खियों में बना हुआ है। स्कूल की विभिन्न ब्रांच की टीचर्स ने उत्पीड़न का जिक्र किया है। जिसमें से कुछ खुलकर अपनी बात को रख रही हैं तो कुछ नौकरी चले जाने के डर से दबी जुबान से अपनी बात को एक दूसरे से कह रही हैं। ताकि उनके जीवनयापन करने में कोई परेशानी न हो।

 प्रिसिंपल को मेनजमेंट का संरक्षण हैं!

टीचर्स के साथ हो रही उत्पीड़न के मामले में सेंट स्टीफेन स्कूल की ब्रांच बारुईपुर की दो टीचर्स सरिता और अनीता (बदला हुआ नाम) ने पुलिस थाने में एफआईआर भी दर्ज कराई है। सरिता इससे पहले इसी स्कूल की दूसरी ब्रांच में लगभग 10 सालों तक टीचर रहीं और साल 2021 में उन्होंने बारुईपुर ब्रांच में दोबारा पढ़ाना शुरु किया।

लगभग 51 वर्षीय सरिता का कहना है कि, “मैं स्कूल में हमेशा ही गलत के खिलाफ रही हूं। पिछले वाले स्कूल को मैंने अपने हाथों से आगे बढ़ाया है। आज मेरे पढ़ाए हुए बच्चे नौकरियां भी कर रहे हैं।” वह कहती है कि, मैंने शुरुआत से ही ज्यादातर ईसाई मिशनरी स्कूलों में पढ़ाया है। मुझे पहले कभी इतनी दिक्कत नहीं हुई है। हां थोड़ी बहुत कमियां तो हर जगह होती है। लेकिन इस बार जो हो रहा था। वह गलत था।

अनीता और सरिता दोनों एक ही स्वर में कहती हैं कि, स्कूल खत्म होने के बाद हमें कई घंटों तक बैठाया जाता है। प्रिसिंपल कहते है कि, अगर मैं स्कूल में हूं तो आप लोग भी यहां रुकिए। वह कहती हैं कि, “हमें बिना किसी काम के प्रिसिंपल पृथ्वीराज चक्रवती अपनी ऑफिस में बैठाकर रखते और इधर-उधर की बातें करते रहते हैं।

अनीता कहती है कि, वह हैंडशेक (हाथ मिलाने) करने के लिए हाथ पकड़ते हैं तो जल्दी छोड़ते ही नहीं हैं। “कई बार ऐसा होता है कि हम जितना पीछे होते हैं प्रिसिंपल उतना ही हमारे सामने आते रहते हैं। कई बार हम लोग खुद ही इस पर असहज महसूस करने लगते हैं। लेकिन उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। प्रिसिंपल को स्कूल मैनेजमेंट का संरक्षण है। इसलिए वह लगातार फीमेल टीचर्स को ऐसे प्रताड़ित कर रहे हैं।” अनीता गुस्से में कहती है।

पुराने स्कूल की टीचर्स ने भी प्रिसिंपल पर लगाया था उत्पीड़न का आरोप

मामले में द मूकनायक ने सेंट स्टीफेन स्कूल बारुईपुर के प्रिसिंपल पृथ्वीराज चक्रवती से बात करने की कोशिश की। पहले उन्होंने इस मामले में कुछ भी कहने से इंकार करते हुए कहा कि, मैंनेजमेंट की तरफ से उन्हें सख्त मनाही है कि वह किसी से भी इस बारे में बात न करें। द मूकनायक की टीम ने जब उनसे पूछा की टीचर्स का आरोप है कि आप उनके साथ उत्पीड़न करते हैं। इस पर उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि, “जिन दो टीचर्स ने आरोप लगाया है उनका टीचिंग कांट्रेंक्ट खत्म हो गया था। मैंने उन्हें स्कूल आने से मना कर दिया था। इसलिए अब वह मुझ पर ऐसे इल्जाम लगा रही हैं। जबकि मैंने कभी किसी महिला टीचर्स के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया है।”

प्रिसिंपल की इस सफाई के बाद द मूकनायक ने कुछ अन्य टीचर्स से बात करने की कोशिश की। कुछ टीचर्स ने नाम न लिखने की शर्त पर बात करने की सहमति जताई। एक टीचर बताती हैं कि, “प्रिसिंपल पृथ्वीराज चक्रवती हमारे ब्रांच के प्रिसिंपल थे। यहां भी उनका यही हाल था। महिला टीचर्स को परेशान करते थे। जिसके कारण उन्हें स्कूल से सस्पेंड कर दिया गया था। जब इतना कुछ पहले ही था तो इस बार किसी स्कूल में उन्हें प्रिसिंपल बनाने की जरुरत नहीं थी। लेकिन यह सारी चीजें स्कूल मैंनेजमेंट की लपरवाही की वजह से हो रही हैं। अगर स्कूल मैंनेजमेंट चाहता तो दोबारा इन्हें स्कूल में बुलाता ही नहीं।”

एक अन्य टीचर का कहना है कि, कई जगहों पर हमलोग भी मजबूर हो जाते हैं जिसके कारण अपनी बात को आगे नहीं रख पाते हैं। स्कूल में महिला टीचर्स का उत्पीड़न तो किया जाता है, लेकिन कोई आगे आकर कहना नहीं चाहता है। लेकिन इस बार दो टीचर्स ने अपनी बात लोगों के बीच रखने के लिए हिम्मत जुटाया है।

मानसिक उत्पीड़न के कारण टीचर को लेनी पड़ी थेरेपी

अनीता और सरिता के अलावा एक और टीचर ने स्कूल मैंनेजमेंट पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। प्रीति (बदला हुआ नाम) बताती हैं कि, स्कूल में किए गए मानसिक उत्पीड़न के कारण उसे डॉक्टर से थेरेपी लेनी पड़ी। यहां तक की वह लंबे समय तक स्टेबल नहीं हो पाई। प्रीति बताती है कि, “स्कूल की प्रिसिंपल ईला चौधऱी और सेक्रेटरी सुकल्याण हलदार ने उनके चरित्र पर सवाल उठाएं। उनकी प्रिसिंपल भी महिला ही है। यह सारी बातें इस साल के मार्च-अप्रैल के दरमियान हुई थी। जिसके बाद प्रीति लगातार मनोवैज्ञानिक के संपर्क में रही। यहां तक की इस साल की गर्मी छुट्टी के बाद स्कूल खुलने पर जब प्रीति स्कूल गई तो उन्हें दोबारा मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उनसे कहा गया कि वह सभी टीचर्स के सामने यह कहे कि अब वह मेंटली स्टेबल (मानसिक रूप से ठीक) है। इस बात पर प्रीति ने सख्ती से स्कूल के प्रिसिंपल से कहा कि आप लोग मुझे दोबारा परेशान कर रहे हैं। इतना कहने के बाद स्कूल से बाहर आ गई। प्रीति की अभी भी थेरेपी में चल रही है।

हमें किसी के साथ बात करने की अनुमति नहीं है: मैनेजमेंट

स्कूल में लगातार महिला टीचर्स के उत्पीड़न के मामले पर ज्यादातर टीचर्स का कहना है कि, यह सारी गलती मैनजमेंट की है। पहले ही जब प्रिसिंपल पर महिला टीचर्स के साथ उत्पीड़न का आरोप लगा था तो उन्हें प्रिसिंपल क्यों बनाया गया। टीचर्स का यह भी आरोप है कि, पिछले साल स्कूल मैनेजमेंट में बदलाव हुआ है। जिसमें सुकल्याण हलदार को सेंट स्टीफेन स्कूल का सेक्रेटरी बनाया गया था। इनके आने के बाद ही चीजें बदली है।

कोरोना काल के दौरान ही सेंट स्टीफेन स्कूल बारुईपुर की स्थापना हुई थी। इस स्कूल की स्थापना के बाद ही नई टीचर्स की नियुक्ति की गई। साथ ही दो साल से निलंबित पृथ्वीराज चक्रवती को प्रिसिंपल बनाया गया। टीचर्स का आरोप है कि, प्रिसिंपल स्कूल के सेक्रटरी के खास है। इसलिए उन्हें दोबोरा से प्रिसिंपल के लिए नियुक्त किया। द मूकनायक ने जब सेक्रेटरी सुकल्याण हलदार से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि, मैनेंजमेंट की तरफ से उन्हें किसी से भी बात करने की अनुमति नहीं है। जब द मूकनायक की टीम ने उनसे पूछा कि आप स्कूल मैनेजमेंट के हेड हैं। अगर आप नहीं बताएंगे तो किनसे बात की जाए? तब उन्होंने भी प्रिसिंपल की तरह रटा रटाया जवाब दिया कि, “इस तरह की एफआईआर से हमें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है। अगर टीचर्स को कुछ प्रॉब्लम थी तो वह स्कूल के मैनेजमेंट को इत्तला (सूचित) करती। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।”

स्कूल में नहीं है आईसीसी

जबकि, एफआईआर करने वाली टीचर्स सरिता और अनीता का कहना है कि, “हमने एफआईआर करने से पहले बिशप सुब्रतो चक्रवती, जो स्कूल की हाई अथॉरिटी थीं, को इस घटना के बारे में बताया था, लेकिन उन्होंने हमारी बात पर गौर नहीं किया।” अनीता कहती है, “जहां तक आईसीसी की बात है। हमारे यहां यह है ही नहीं तो कॉम्पलेन कैसे करते? इसलिए जब हमारी कोई बात सुन नहीं रहा था तो हमने चार जून को बारुईपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई। इसके बाद हमने महिला आयोग में अपनी शिकायत दी, साथ ही डीएम से भी मिलें। ताकि, हमें न्याय मिलें और किसी और टीचर के साथ ऐसा न हो।”

कानून के दायरे में टीचर्स को मिलेगा न्याय!

महिला टीचर्स पर हो रहे उत्पीड़नों पर द मूकनायक ने सीएनआई (चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया) चर्च के हाई अथॉरिटी से बात करने की कोशिश की, लेकिन सीएनआई के जनरल सेक्रेटरी से बात नहीं हो पाई।

मामले पर और जानकारी के लिए द मूकनायक ने एनसीसीआई (नेशनल कांउसिल ऑफ चर्चेस इंडिया) की रेवरन्ट ज्योति सिंह से ने बात करने की कोशिश की। ज्योति सिंह ब्लैक थसडे नाम का एक कैपेन चलाती हैं। इस संस्था में महिलाओं से जुड़ें मुद्दों और उनकी समस्याओं को सामाजिक स्तर पर उठाया जाता हैं। उनका कहना है कि, “हमें टीचर्स का मेल मिला है। हमने उनके मेल पर तुरंत ही एक्शन लेते हुए इसकी जांच शुरु कर दी है। हमारी संस्था पूरी तरह से पीड़िता के साथ है। जितनी संभव मदद हो वह की जाएगी। साथ ही कानून की दायरे में रहते हुए सारा काम किया जाएगा। ताकि दोबारा किसी के साथ ऐसा न हो।”

सरिता और अनीता ने जिस थाने (बारुईपुर) में एफआईआर दर्ज कराई वहां के एएसपी (एडिशनल सुपरिडेंट ऑफ पुलिस) इंद्रजीत बासु ने दोनों पीड़िता को आश्वासन दिया कि, इस केस में आईओ (इंवेस्टिगेशन ऑफिसर) नियुक्त कर दिया गया है। एफआईआर भी हो गई है। अब कानून के हिसाब से कारवाई की जाएगी। ताकि, पीड़िता को न्याय मिल पाए।

Poonam Masih
Poonam Masih, Journalist The Mooknayak

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