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Wednesday, November 30, 2022

जानें नवरात्रि पर पोस्ट करने वाले प्रोफेसर की बर्खास्तगी के पीछे की राजनीति

नई दिल्ली। हाल ही में सोशल मीडिया पर नवरात्रि पर विवादित टिप्पणी करने पर एक दलित प्रोफेसर की यूनिवर्सिटी से छुट्टी कर दी गई है। यह मामला प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का है, जहां के पॉलिटिकल सांइस के गेस्ट फैक्ल्टी मिथिलेश कुमार गौतम को नवरात्रि को लेकर एक सोशल मीडिया पोस्ट किया था, जिसके बाद उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं।

फेसबुक पोस्ट के कारण हुई कार्रवाई

प्रोफेसर मिथिलेश कुमार गौतम ने नवरात्रों के दौरान अपने फेसबुक अकांउट से एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा था, “महिलाओं को नौ दिन नवरात्र व्रत से अच्छा है कि नौ दिन भारतीय संविधान और हिंदू कोड बिल पढ़ लें, उनका जीवन गुलामी और भय मुक्त हो जाएगा। जय भीम।”

प्रोफेसर के इस पोस्ट के बाद पहले तो सोशल मीडिया पर लोगों ने उन्हें ट्रोल किया और उसके बाद उन्हें सेवा समाप्त करने का नोटिस दे दिया गया।

इस मामले पर द मूकनायक ने प्रोफेसर मिथिलेश कुमार गौतम से बातचीत की है। मिथिलेश बताते हैं कि, उन्हें एक दलित होने का खामियाजा भुगतान करना पड़ा है। “मैंने जो भी पोस्ट किया है वह गलत नहीं है। महिलाओं को सिर्फ संविधान पढ़ने के लिए कहा है। जबकि मेरे दूसरे पोस्ट पर जो बुक है वह राहुल सांस्कृत्यान की है। जिसे लंबे समय से लोग पोस्ट करते आएं हैं। उसमें महिषासुर का आदिवासी राजा होने का जिक्र है और छत्तीसगढ़ और अन्य आदिवासी बहुल इलाकों में उनकी पूजा होती है।”

वह कहते हैं कि, “ऐसा नहीं है कि इस बारे में पहली बार मैंने ही पोस्ट किया है। कई सवर्णों ने इस किताब को पोस्ट कर कई चीजों का खंडन किया है। चूंकि मैं दलित हूं इसलिए मुझे टारगेट किया जा रहा है।”

वह कहते हैं कि, “मैंने इसी विश्वविद्यालय से बीए, एमए और पीएचडी की है। अभी पिछले साल ही मेरी गेस्ट फैकल्टी की तौर पर नियुक्ति हुई थी। लेकिन कुछ लोगों को दलितों का आगे बढ़ना अच्छा नहीं लगा। वह कहते हैं कि इसी यूनिवर्सिटी के कुछ पूर्व छात्र जोकि एबीवीपी से जुड़े हैं उन्होंने ही मेरे पोस्ट को गलत तरीके से वीसी के सामने पेश किया और मुझे यूनिवर्सिटी से निकालवा दिया। ये सभी लड़के गुंड़ा प्रवृत्ति के हैं। जिन्होंने पहले भी दो प्रोफेसर के साथ मारपीट की थी। इस बार मारपीट करने में नाकाम रहे तो मुझे नौकरी से ही निकलवा दिया।”

छात्रसंघ चुनाव के मुख्य वजह

प्रोफेसर मुकेश कुमार बताते हैं, उन्हें इस तरह से नौकरी के निकालने के पीछे राजनीतिक कारण है। “यूनिवर्सिटी में पिछले लंबे समय से एबीवीपी की छात्रसंघ चुनाव में हार हो रही है। यहां तक की पीएचडी में रहते हुए मैं स्वयं छात्र राजनीति में बहुत एक्टिव था। हमारे ग्रुप के ही एक सदस्य ने एबीवीपी के उम्मीदवार को हराया था,” वह कहते है कि, “ऐसा करने का एकमात्र मकसद राजनीतिक तौर पर हमें कमजोर करना है। क्योंकि राजनीतिक मुद्दों को लेकर इससे पहले भी ये लोग हमारी शिकायत कर चुके थे। अब इन्हें डर है कि काशी विद्यापीठ के कॉलेजों में भी एबीवीपी हार रही है। लगातार होती हार को देखते हुए हमें टारगेट किया जा रहा है। क्योंकि अगर मैं और मेरे साथी राजनीतिक और वैचारिक तौर पर मजबूत रहेंगे तो एबीवीपी का छात्रसंघ चुनाव में जीतना मुश्किल है। इसलिए इस तरह की हरकतें करके हमें कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।”

वह कहते हैं कि, “मुझे पहले बर्खास्त कर दिया गया। अब यूनिवर्सिटी पर एंट्री पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है, जिससे की मैं अपनी बात भी नहीं रख पाऊं।उन्हें डर है अगर मैं यूनिवर्सिटी गया तो अपनी बात को संविधान के हिसाब से रखूंगा। इसलिए अब मेरे प्रवेश पर ही रोक लगा दिया गया है।”

Poonam Masih
Poonam Masih, Journalist The Mooknayak

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