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Monday, August 8, 2022

कर्नाटक : 8 दलितों को मंदिर में प्रवेश करवाने के लिए क्यों लगानी पड़ी धारा 144?

28 सालों से दलितों के मंदिर में प्रवेश पर सवर्णों ने रोक लगा रखी थी। सवर्णों के भारी विरोध के बाद दलितों ने मांगी थी पुलिस सुरक्षा।
-पुलिस अधीक्षक ने धारा 144 लागू कर तैनात किया पुलिस बल। दलितों को मंदिर में प्रवेश करने के लिए क्षेत्रीय पुलिस के भी छूट रहे थे पसीने।
-कानून व्यवस्था बिगड़ने के डर से 8 दलितों को पुलिस की गाडी में स्कॉर्ट करके मंदिर में प्रवेश कराया गया। पूजा करने की नहीं मिली अनुमति, मात्र दर्शन करके लौटे 8 लोग।
-दलित परिवार के लोगों में अभी भी भरा हुआ है डर, न नींद आती है न ही खाना खा पा रहे हैं। मंदिर में पुलिस ने बनाई छावनी, गांव में गश्त करती है पीआरवी।

कर्नाटक। राज्य के यादगीर जिले के केम्भावी क्षेत्र में एक हनुमान मंदिर में लगभग 28 सालों से दलितों के प्रवेश पर पाबंदी थी। दलितों से छीने जा रहे इस हक को लेकर कुछ दलित परिवार के लोग अपना हक पाने के लिए क्षेत्रीय पुलिस के पास पहुंचे। क्षेत्रीय पुलिस ने मदद करने से इनकार कर दिया। मामला जिले के एसपी तक पहुंचा तो उन्होंने दलितों को प्रवेश कराने और उनका हक दिलाने के लिए जिले में धारा 144 लागू कर दी। यही नहीं दलित परिवार की सुरक्षा को देखते हुए दर्शन के दौरान क्षेत्र में AK-47 लिए हुए भारी पुलिस बल भी तैनात कर दिया।

क्षेत्रीय दलित लोगों के मुताबिक, पुलिस अधीक्षक ने उनकी पूरी मदद की और सुरक्षा दी, लेकिन पूजा की तारीख तक क्षेत्रीय पुलिस दलित परिवारों को सुरक्षा देने की जगह उनसे यही कह रहे थे, “आप लोग मंदिर जाने का कार्यक्रम निरस्त कर दीजिए। दूसरे लोगों की संख्या ज्यादा है जबकि पुलिस की संख्या कम है। हम आप लोगों को सुरक्षा नहीं दे पाएंगे।”

हालांकि, एसपी यादगीर ने चेतावनी दी थी, “यदि कोई कानून तोड़ता है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी” इसके बाद क्षेत्रीय पुलिस ने 8 लोगों को पुलिस की गाड़ी में स्कॉर्ट करके मंदिर में प्रवेश कराया। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि, इस दौरान उन्हें बस दर्शन ही करने दिया गया। मंदिर के अंदर कार्यक्रम करने की इजाजत नही मिल पाई। सुरक्षा के नजरिये से पुलिस ने मंदिर में छावनी बना रखी है, इसी के साथ ही पुलिस गांव में गश्त भी कर रही है।

क्षेत्रीय दलित परिवारों का कहना है, मंदिर में दर्शन के बाद से डरे हुए हैं। वह न तो ठीक तरीके से खा पा रहे हैं और न ही सो पा रहे हैं। लोगों का कहना है कि, अभी भी उन्हें और उनके परिवार पर हमले और जान का खतरा सता रहा है। हालांकि, पुलिस लगातार क्षेत्र में गश्त कर रही है।

स्थानीय दलित ग्रामीण [फोटो- सत्य प्रकाश भारती, द मूकनायक]
स्थानीय दलित ग्रामीण [फोटो- सत्य प्रकाश भारती, द मूकनायक]

क्या है पूरा मामला?

कर्नाटक के यादगीर जिले के शोरापुर तालुक के हुविनाहल्ली गांव स्थित क्षेत्रीय लोगों के मुताबिक, इस गांव में लगभग 40 दलित परिवार रहते हैं। इन 40 घरों में लगभग 250 लोग रहते हैं। जबकि दो हजार से अधिक सवर्ण जाति के लोगों के घर हैं। इस गांव से आधा किलोमीटर की दूरी पर अंजेनेया मंदिर (हनुमान मंदिर) मौजूद है।

स्थानीय दलित परिवारों के मुताबिक, इस मंदिर में लगभग 28 सालों से दलितों के प्रवेश की अनुमति नहीं थी। यह रोक क्षेत्रीय नेता संगन गौड़ा ने 28 साल पहले लगाई थी, जो कि अभी तक चली आ रही है। दलित परिवार में यदि कोई कार्यक्रम होता है तो उन्हें मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जाता था, मंदिर के बाहर ही पूजा करके लौटना पड़ता था। यहां तक कि दलितों को मंदिर का दीवार और गेट छूने तक की पाबंदी थी।

दलित महिलाएं [फोटो- सत्य प्रकाश भारती, द मूकनायक]
दलित महिलाएं [फोटो- सत्य प्रकाश भारती, द मूकनायक]

जात्रा पूजा को लेकर दलितों ने मांगा अपना हक

हुविनाहल्ली गांव के रहने वाली ज्योति बताती हैं, 28 मई से करीब एक सप्ताह पहले सभी दलित परिवारों ने मंदिर में जात्रा पूजा करने की ठान ली। जब सवर्णों को इस बात का पता चला तो वह विरोध पर उतर आए। ज्योति बताती है कि, “हिन्दू होने के कारण मंदिर में पूजा करना मेरा अधिकार है। मैं लोकतांत्रिक देश मे रहती हूं। पूजा के लिए सवर्णों के विरोध के बात मेरे पति और गांव की अन्य लोगों के घर वालों ने इस हक को पाने के लिए पुलिस के पास जाकर मदद मांगी।”

ज्योति आगे बताती हैं, “मेरे पति और गांव के कई अन्य परिवारों के घर वाले पुलिस से मदद मांगने के लिए सुबह 7 बजे घर से निकलते थे, और रात में 12 बजे घर लौटते थे। स्थानीय थाने से मदद से इनकार कर दिया था। फिर सभी SP ऑफिस गए। SP ने पूरी मदद और सुरक्षा देने का वादा किया।”

पुलिस अधीक्षक यादगीर डॉ. सी. बी. वेदमूर्ति ने दलित परिवार की गुहार के बाद उन्हें उनका हक दिलाने की ठान ली थी। 27 मई को पुलिस अधीक्षक ने हुविनाहल्ली गांव का निरीक्षण किया। दोनों पक्षों के लोगों से बात की। हालांकि, इस दौरान सवर्णों ने पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में पहले विरोध किया। स्थिति तनावपूर्ण हो गई। सुरक्षा को देखते हुए क्षेत्र में धारा 144 लागू कर दी गई। ज्योति ने बताया, “पुलिस अधीक्षक ने हम सभी को कार्यक्रम की तैयारी करके रखने को कहा, साथ ही यह भी बताया कि पुलिस पूरी सुरक्षा देगी।”

दलितों को मंदिर तक पहुंचाने के लिए पुलिस अपने वाहन में सुरक्षा के बीच मंदिर ले जाती हुई [फोटो- सत्य प्रकाश भारती, द मूकनायक]
दलितों को मंदिर तक पहुंचाने के लिए पुलिस अपने वाहन में सुरक्षा के बीच मंदिर ले जाती हुई [फोटो- सत्य प्रकाश भारती, द मूकनायक]

पुलिस अधीक्षक ने लागू की धारा 144, तैनात किए भारी सुरक्षा बल

दलितों को मंदिर में प्रवेश कराने के लिए धारा 144 लागू की गई, देश में शायद पहला ऐसा मामला सामने आया है। पुलिस अधीक्षक ने सुरक्षा की दृष्टि से इस क्षेत्र में 10 सब-इंस्पेक्टर, 150 सिविल कांस्टेबल और दो प्लाटून, जिला सशस्त्र रिजर्व और कर्नाटक राज्य रिजर्व पुलिस से एक-एक को तैनात किया।

28 मई की सुबह क्षेत्रीय पुलिस आनाकानी करने लगी

क्षेत्रीय दलितों ने बताया, “28 मई की सुबह कार्यक्रम की पूरी तैयारी की गई थी। कुछ दलित परिवार अपने बच्चों का मुंडन संस्कार भी करना चाहते थे, उसकी भी व्यवस्था लोगों ने की थी। घर मे पकवान बनाने के साथ ही मेहमानों को भी निमंत्रण दिया गया था। लगभग 10 बजे कार्यक्रम की तैयारी थी। पुलिस मौके पर नही पहुंची तो दलित परिवार के कुछ सदस्य फिर केम्भावी पुलिस स्टेशन गए।”

आरोप है कि, जब पुलिस वालों से सुरक्षा मांगी गई तो, पुलिस ने उल्टा डराना शुरू कर दिया। पुलिस का कहना था कि, हमारे पास जितनी पुलिस है उससे ज्यादा विरोध करने वाले लोग हैं। क्षेत्रीय लोगों के अनुसार, पुलिस कर्मचारियों में भी डर भरा हुआ था। पुलिस का कहना था कि वह उन्हें सुरक्षा नहीं दे पाएंगे।

केवल 8 लोगों को मंदिर में मिला प्रवेश

मामला फिर पुलिस अधीक्षक के पास पहुंचा जिसके बाद शाम लगभग 4 बजे पुलिस की एक स्कॉर्ट गांव में पहुंच गई। क्षेत्रीय निवासी के मुताबिक, “पुलिस केवल 8 लोगों को अपनी गाड़ी में बैठाकर मंदिर ले गई थी। इस दौरान पुलिस के आगे पीछे भी पुलिस की गाड़ियां स्कॉर्ट कर रही थी। इन 8 लोगों में 6 दलित महिलाएं – लक्ष्मी, येलम्मा, लक्ष्मी बाई, श्यामला, देवम्मा, जयश्री जबकि 2 पुरुष – येमप्पा और भीमप्पा शामिल थे।”

मंदिर में लगाया ताला, नहीं करने दी गई पूजा

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि, जब वह मन्दिर पहुंचे थे तब मंदिर में ताला लगा दिया गया था। पुलिस ने बड़ी मशक्कत के बाद ताला खुलवाया। स्थानीय दलितों ने बताया कि वह मंदिर में जात्रा पूजा करना चाहते थे। कुछ दलित परिवार अपने बच्चों का मुंडन संस्कार भी करना चाहता थे, लेकिन इसकी अनुमति नहीं मिली। पुलिस ने मंदिर के अंदर 8 लोगों के दर्शन कराकर वापस उनके घर छोड़ दिया।

तनावपूर्ण रहा माहौल, भूखे पेट लौटे मेहमान

स्थानीय दलितों ने बताया कि 28 मई को पुलिस की मदद से पूजा और सभी कार्यक्रम पूरी तरह हो जाने की संभावना थी। इसके लिए खास इंतजामात भी किये गये थे। स्थानीय दलितों को पुलिस ने मंदिर में प्रवेश कराकर दर्शन तो करवा दिए थे, लेकिन लोगों के विरोध और बवाल हो जाने के डर से पूजा नहीं करवा सकी।

एक परिवार ने बताया, “घर में मेहमानों के लिए खाना बनाया गया था, पूजा की भी तैयारी थी। माहौल इतना तनाव पूर्ण हो गया था। कोई भी खुश नहीं था। सब बिना खाना खाएं ही लौट गए।

मंदिर में पुलिस ने बनाई छावनी, गांव में गश्त करती है पुलिस

क्षेत्रीय लोगों के मुताबिक, मंदिर में पुलिस की एक टुकड़ी ने डेरा जमा रखा है। पुलिस की इस पहल के कारण अब दलित समाज के लोग शनिवार को मंदिर में जाकर दर्शन कर पा रहे हैं। इसके साथ ही पुलिस लगातार गांव में गश्त भी कर रही है।

अनहोनी का खतरा, मुश्किल से आती है नींद

एक दलित परिवार ने बताया, “मंदिर में प्रवेश के बाद से दलित परिवारो को लेकर तरह-तरह की बात हो रही है। उनका आरोप है कि, सवर्ण जाति के लोग पुलिस के हटने का इंतजार कर रहे हैं। पुलिस के हटने के बाद दर्शन करने वाले परिवारों को खतरा हो सकता है। इस डर से लोगों को देर रात घर से बाहर निकलने में भी डर महसूस हो रहा है। लोगों को यह सब सोचकर नींद नहीं आ रही है। वह न तो ठीक तरीके से सो पा रहे हैं और न ही खा पा रहे हैं।

एसपी वेदमूर्ति ने कहा, मौजूदा समय में गांव में स्थिति शांत है। ग्रामीण किसी भी समय मंदिर के दर्शन कर सकते हैं। पुलिस उनकी रक्षा करेगी। हालांकि, किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए गांवों में पुलिस सुरक्षा जारी है।

Satya Prakash Bharti
Satya Prakash Bharti, Journalist The Mooknayak

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