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Friday, October 7, 2022

“लाइफस्टाइल और जातिवाद के कारण दलित जितेंद्रपाल मेघवाल की चाकू से गोदकर की हत्या” – जितेंद्र का करीबी मित्र

आरोप है कि, सोशल मीडिया पर मूछों पर ताव देते हुए जितेंद्रपाल द्वारा फोटो डालना आरोपियों के लिए नागवार गुजरा। पहले रैकी की और मौका पाकर पीछे से चाकू घोंपकर कर दी हत्या।

राजस्थान। राजनेता दलितों के नाम अपनी सियासत चमकाने में मसरूफ है लेकिन धरातल पर उसकी सच्चाई कुछ और ही है। राजस्थान में एक दलित युवक की चाकू से गोद कर निर्मम हत्या इसलिए कर दी गई क्योंकि वह दलित था और तनी हुई मूंछे रखने का शौकीन था।

क्या है पूरा मामला?

राजस्थान के पाली जिले के बारवा निवासी जितेंद्रपाल मेघवाल पुत्र देवाराम मेघवाल बाली अस्पताल में कोविड हेल्थ सहायक के रूप में कार्यरत थे। मंगलवार 15 मार्च, को बाली कस्बे के सेसली मार्ग पर जितेंद्र अपने साथी कर्मचारी के साथ करीब सवा तीन बजे गांव जा रहा था। जितेन्द्र का पीछा करते हुए दो लोग (सूरजसिंह राजपुरोहित व रमेशसिंह) पीछे से जितेंद्रपाल की पीठ में चाकू घोंप दिए। बाइक से जितेंद्र गिरा तो उन्होंने जितेंद्र पर तोबड़तोड़ चाकू से कई वार किए जिससे वह मरणासन्न स्थति में आ गया। चाकू का हमला इतना ताबड़तोड़ था कि उसे इलाज हेतु सुमेरपुर ले जाते समय उसकी मौत हो गई।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि, जितेन्द्र द्वारा सोशल मीडिया पर मूछों पर ताव देते हुए फोटो लगाए जाना आरोपियों के आँख में खटकता था इसी के चलते आरोपी सूरत से 800 किमी. बाइक लेकर जितेंद्र को मारने पहुंचे। आरोपियों ने एक दिन पहले ही जितेन्द्र के आने-जाने की रैकी कर घटना को अंजाम देने की तैयारी कर चुके थे।

जानकारी के मुताबिक, जितेंद्रपाल और आरोपियों के बीच पूर्व में भी मारपीट का मामला पुलिस तक पहुंचा था। उसके बाद आरोपी गुजरात के सूरत में शिफ्ट हो गए थे। कुछ समय बाद जितेंद्र की बाली अस्पताल में कोविड हेल्थ सहायक की नौकरी लग गई। नौकरी पाने के बाद जितेंद्रपाल की लाइफ स्टाइल बदल गई, वह मूंछों के ताव के साथ सोशल मीडिया पर फोटो अपलोड करता रहता था।

परिवार का आरोप

मीडिया रिपोर्ट द क्विंट के अनुसार, जितेंद्र पाल के परिवार ने आरोप लगाया कि जितेंद्र मेघवाल को दलित (Dalit) होते हुए गुड लुकिंग पर्सनैलिटी मैनटैन करने के लिए मार दिया गया। मामले का खुलासा करते हुए पुलिस ने हत्या के आरोप में आरोपी सूरज सिंह और रमेश सिंह को बाड़मेर जिले के पचपदरा के दूदवा गांव से गुरुवार को गिरफ्तार किया है।

जितेंद्रपाल के मित्र का खुलासा

जितेन्द्रपाल के मित्र अशोक ने “द मूकनायक” से बात करते हुए बताया कि, जितेन्द्रपाल की लाइफ स्टाइल व जातिवाद के कारण उसके साथ पहले भी मारपीट की गई थी। मामला शांत होने के बाद अब आरोपियों ने जितेंद्रपाल की हत्या कर दी। “जितेंद्रपाल का मूछों पर ताव देने वाला सोशल मीडिया पर डाला गया फोटो आरोपियों को खटकता था जिसके कारण उसकी हत्या कर दी गई। जितेंद्रपाल के परिवार वालों न्याय मिलना चाहिए।” – अशोक ने बताया।

पुलिस का पक्ष

मामले लेकर “द मूकनायक” को पाली एसपी राजन दुष्यंत ने बताया कि, “विशेष टीमों का गठन कर आरोपी सुरजसिंह पुत्र बाबुसिंह व रमेशसिंह पुत्र शंकरसिंह राजपुरोहित, निवासी बारवा को गिरफ्तार कर लिया गया है।” मामले में राजस्थान पुलिस ने एक ट्वीट के माध्यम से जानकारी दी है कि, मामले में धारा 219/22u/s 143, 323, 341, 504, 506, 354, 379 आईपीसी व sc/st एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ है। उन्होंने बताया कि, प्रकरण को लेकर पूछताछ कर अग्रिम विधिक कार्यवाही जारी है।

राजस्थान पुलिस के अनुसार, “जितेंद्रपाल हत्याकांड में दलित समाज के व्यक्ति के मूछ रखने व पहनावे से लेकर कोई संबंध नही है। वर्ष 2020 में दर्ज मुकदमे की आपसी रंजिश को लेकर हत्या की घटना कारित की गई है। हत्याकांड के दोनों मुख्य आरोपियों को हिरासत में लिया गया है।”

जितेंद्र के न्याय के लिए सोशल मीडिया पर एकजुट हुए लोग

जितेंद्रपाल मेघवाल की हत्या की सूचना सोशल मीडिया पर आते ही लोग उनके न्याय के लिए #JusticeForJitendraMeghwal का ट्विटर ट्रेंड चलाना शुरू कर दिए।

मामले पर फिल्ममेकर नीरज घेवान लिखते हैं कि, “राजस्थान में सिर्फ मूंछ रखने के कारण दलित जितेंद्र मेघवाल की हत्या कर दी गई। अब अपनी पसंद पर फिर से विचार करें।”

मामले पर पत्रकार व द मूकनायक की फाउंडर मीना कोटवाल लिखती हैं कि, ” ये दलित युवक जितेंद्रपाल मेघवाल हैं, इनकी हत्या सिर्फ इसलिए कर दी गई क्योंकि इन्होंने मूंछ रख ली। सदियों से बदस्तूर यह जारी है लेकिन इसपर किसी का खून नहीं खौलता क्योंकि यहां दलितों की जान की कोई कीमत नहीं है। कश्मीर फाइल्स पर आसूं बहाने वाले कहां हैं?”

Azrudin
अजरूद्दीन स्वतंत्रत पत्रकार हैं. अजरूद्दीन ने जनतंत्र टिवी, जन टिवी राजस्थान, प्राइम न्यूज़ टीवी, मैगजीन प्रिन्ट मीडिया में काम कर चुके हैं. इन्हें पत्रकारिता क्षेत्र में 3 वर्ष हो चुके हैं. अजरूद्दीन ने शुरूआती पढ़ाई बाड़मेर जिले के सिवाना कस्बे से की है. इन्होंने हमेशा दलित, मुस्लिम, पिछड़ों के अधिकारों की आवाज उठाने का काम किया है.

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