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Thursday, May 19, 2022

झारखंड : शिक्षक अमानत हुसैन के पैर से पुलिस ने क्यों निकाला नाखून?

द मूकनायक के लिए रांची से आनंद दत्त की रिपोर्ट –

झारखंड पुलिस ने 30 दिसंबर की रात बर्बरता की हद पार दी. शिक्षक अमानत हुसैन को इतना पीटा कि उनके पैर से नाखून निकाल दिए. आरोप था कि उन्होंने अपने पड़ोसी के घर में चोरी करवाई है. उनकी पत्नी के साथ भी थाने में महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों ने बाल खींच कर मारपीट की. घटना बोकारो जिले के बालीडीह थाना क्षेत्र की है.

द मूकनायक से बात करते हुए अमानत हुसैन ने बताया कि, ‘’बीते 22 साल से मैं पढ़ाने का काम करता हूं. मखदुमपुर गांव में एशियन पब्लिक स्कूल नाम से मेरा एक स्कूल है. स्कूल के बगल में युनूस हाशमी का परिवार रहता है. वो मेरे दोस्त भी हैं. बीते साल 07 दिसंबर को उन्होंने मुझे बुलाकर कहा कि वह अपनी बेटी के इलाज के लिए दिल्ली जा रहे हैं. वापस लौटने में कुछ समय लगेगा. तब तक आप मेरे घर में रात को सो जाएं.’’

‘’शुरूआत में मैंने मना किया, लेकिन उनके जिद करने के बाद मैं 08 दिसंबर से उनके घर में रात को सोने लगा. 14 तारीख तक मैं लगातार सोया. अगले दिन यानी 15 को मेरी तबियत खराब हो गई. उस रात मैं सोने के लिए अपने घर चला गया. अगली सुबह जब मैं उनके मुर्गियों को दाना देने के लिए गया तो देखा कि घर का ताला टूटा हुआ है. मुर्गियों को दाना देने के बाद मैंने उन्हें फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी.’’

शिक्षक अमानत हुसैन / फोटो : आनंद दत्ता
शिक्षक अमानत हुसैन / फोटो : आनंद दत्त

वो आगे बताते हैं, ‘’जानकारी देने के बाद उन्होंने कहा कि उनके मेमेरे भाई जफर हाशमी को बुला लें और थाना जाकर रिपोर्ट दर्ज करा दें. हमने साथ जाकर थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी. घटना के 15 दिन बाद यानी 30 दिसंबर की शाम 7.30 बजे मेरे पास बालीडीह थाना से फोन आया. पुलिस वाले ने कहा कि आपसे पूछताछ करनी है, जल्दी थाना पहुंचिये नहीं तो हम घर से घसीट कर ले आएंगे.’’

पैर-हाथ डंडे से बांधकर पत्नी के सामने पीटा

कराहते हुए अमानत हुसैन बताते हैं, ‘’मेरी पत्नी जिद करने लगी कि वह भी जाएगी. इसके बाद मैंने अपने बड़े भाई को साथ लिया और थाने पहुंचे. पहले तो मुझे अलग कमरे में बिठाकर पूछताछ किया जाने लगा. इस दौरान गाली-गलौज लगातार जारी रहा. तभी थानेदार नूतन मोदी अचानक चिल्लाने लगी और उनके कहने पर मेरे दोनों हाथ और पैर में डंडा बांध दिया गया. इसके बाद दो पुलिस वालों ने अलग-अलग पैर पकड़ा और जहां-तहां डंडे मारे लगे. इतना पीटा कि मेरे दाहिने पैर के अंगूठे से नाखून निकाल दिया. उस वक्त तो एक – एक सेकेंड ऐसा लग रहा था कि अब मर जाएंगे.’’

‘’यही नहीं, मेरी पत्नी के भी बाल नोचे गए. उसके साथ महिला और पुरुष दोनों पुलिसवालों ने काफी मारपीट की. वह काफी बीमार हो गई है. घटना के बाद दोनों सदर अस्पताल गए और वहां इलाज कराकर घर लौटे हैं.’’

पांच बेटी और एक बेटे के पिता अमानत कहते हैं, ‘’22 सालों की मेहनत को पुलिसवालों ने महज कुछ घंटे में तबाह कर दिया. समाज में मेरी बनाई इज्जत को बर्बाद कर दिया. अब क्या किसी को मूंह दिखाउंगा. स्कूल में 125 बच्चे पढ़ रहे हैं, उनके लिए मैं एक सम्मानित शिक्षक था, अब उनके बीच क्या मूंह लेकर जाउंगा पढ़ाने.’’

आरोपी थानेदार नूतन मोदी ने बताया कि मैं अपना लिमिट जानती हूं. मेरी उनसे कोई दुश्मनी नहीं है जो मैं मारपीट करूंगी. हालांकि वो ये नहीं बता पाईं कि जो व्यक्ति आज तक थाना नहीं गया, वो अचानक पुलिस पर ये आरोप क्यों लगा रहे हैं. वहीं थाने से लौटने के बाद ही उनके पैर के नाखून क्यों निकले हुए हैं. बातचीत के बीच में ही उन्होंने कहा कि कोर्ट से फोन आ रहा है, और फिर फोन काट दिया.

घटना के बाद मामले के जांच का आदेश दिया गया है. हेड क्वार्टर डीसएसपी मुकेश कुमार को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है. बोकारो के एसपी चंदन झा ने द मूकनायक को बताया कि, ‘’पुलिस पर जो आरोप लगे हैं, उसकी जांच का जिम्मा डीएसपी को दिया गया है. उन्हें 3 जनवरी की शाम तक रिपोर्ट सौंपने को कहा है, जैसी जांच रिपोर्ट आएगी, उसके मुताबिक कार्रवाई की जाएगी.’’

वहीं राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन ने ट्विटर के माध्यम से बोकारो एसपी को जांच के लिए कहा है.

पुलिस और न्यायिक हिरासत में हो चुकी हैं 166 लोगों की मौत

हेमंत सरकार में ये कोई पहला मामला नहीं है जब अल्पसंख्यकों के साथ इस तरह का अत्याचार किया गया हो. इससे पहले कश्मीरी व्यापारियों के साथ बीते साल नवंबर महीने में लगातार चार बार मारपीट की घटना हुई है.

वहीं लोकसभा में सांसद जगदंबिका पाल की ओर से पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में केंद्र सरकार ने बताया है कि साल 2018 से 2021 तक झारखंड में पुलिस हिरासत में कुल 10 मौतें और न्यायिक हिरासत में कुल 156 मौत के मामले सामने आई हैं. वहीं इस दौरान देशभर में पुलिस कस्टडी में 348 मौतें और न्यायिक हिरासत में कुल 5221 लोगों ने अपनी जान गंवाई है.

आरोपी थानेदार नूतन मोदी/ फोटो: आनंद दत्ता
आरोपी थानेदार नूतन मोदी/ फोटो: आनंद दत्त

आरोपी थानेदार नूतन मोदी को राज्य के एक मंत्री का करीबी बताया जा रहा है. रिकॉर्ड के मुताबिक साल 2012 में बतौर ट्रेनी एसआई उनकी नियुक्ति झारखंड पुलिस में हुई. तब से अब तक वह बोकारो जिले में ही पदस्थापित हैं. इस दौरान केवल पांच महीने के लिए उन्हें पलामू ट्रांसफर किया गया था.

पीयूसीएल के मेंबर झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता शैलेष पोद्दार कहते हैं, ‘’ये आंकड़ें घटे हुए हैं, ये वो मामले हैं जो मीडिया में आ गया, परिजन कोर्ट तक पहुंचे, कई सारे मामले तो अखबार में आते तक नहीं हैं, हम परिजनों से मिलकर पूछते हैं कि आपको आगे केस ले जाना है कि नहीं. अधिकांश मामलों में नहीं ले जाना चाहते हैं. इसमें उनके ऊपर पुलिस का दवाब होता है. पीड़ित परिवार को भय, दवाब, प्रलोभन देकर मामला दबा दिया जाता है.’’

इसी तरह की एक घटना का जिक्र करते शैलेष बताते हैं, ‘’साल 2021 में जब दूसरा लॉकडाउन लगा तब हजारीबाग के चौपारन थाना में पुलिस की पिटाई से छगन भुइयां नाम के व्यक्ति की मौत हो गई थी. वो अपने भाई और पत्नी के साथ एक शादी में शामिल होने जा रहे थे. उस वक्त शादी में 50 लोगों के शामिल होने का प्रशासनिक अऩुमति थी. रास्ते में तैनात पेट्रोलिंग टीम की पिटाई से उनकी मौत हो गई. परिवार मामले को आगे लेकर नहीं गई. उस मामले में क्या हुआ, आज तक किसी को कुछ पता नहीं है.’’

आपकी सेवा में सदैव तत्तपर का नारा देनेवाली झारखंड पुलिस को अपने इस स्लोगन को पुलिसकर्मियों को बताना चाहिए. इसके मायने समझाने चाहिए. तभी इस तरह की बर्बरतापूर्ण कार्रवाई को रोका जा सकता है.

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