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Wednesday, November 30, 2022

विदेशों से लाशें भारत लाती हूं ताकि उनके परिजन एक बार देख सकें, अंतिम संस्कार कर सकें- अमनजोत कौर

नई दिल्ली। अगर महिलाएं चाहे तो कुछ भी कर सकती हैं। ऐसा ही कुछ पंजाब की अमनजोत कौर रामूवालिया ने किया है जो विदेशों से जली कटी लाशों को भारत लाकर उनके परिजनों के सुपुर्द करती है ताकि मृतकों का विधि विधान से अंतिम क्रिया की जा सके। इसके साथ ही पंजाब की लड़कियों के साथ शादी के नाम पर धोखा करने वाले एनआरआई दूल्हों के खिलाफ लीगल लड़ाई लड़ती हैं। ताकि लड़कियों को न्याय मिल सके।

लोगों की सेवा के लिए कनाड़ा से भारत वापस आईं

द मूकनायक ने अमनजोत कौर रामूवालिया से इस बारे में खास बातचीत की है। अपने इस काम के बारे में अमनजोत कौर बताती हैं कि उनके पिताजी ने यह काम 40 साल पहले शुरू किया था। उनके इस काम से इंस्पायर होकर अमनजोत लगभग 15 साल पहले इस काम से जुड़ गईं। उससे पहले वह कनाड़ा रहती थीं, लेकिन लोगों की सेवा करने के लिए स्वदेश वापस आ गईं और पिछले कई सालों से यह काम कर रही हैं।

विदेशों से लोगों की मौत हो जाने के बाद उनकी लाश को उनके घरों तक पहुंचाने का काम करती हैं। वह बताती हैं कि यह मेरे लिए एक धर्म का काम है। जिंदा रहते हैं हम हर इंसान की मदद कर सकते हैं लेकिन मरने के बाद किसी के परिवार को उसकी आखिरी यात्रा में पार्थिव शरीर विदेशों से सही सलामत पहुंचाना एक पुण्य का काम है। जिसमें मेरे साथ मेरे परिवार वाले भी जुड़े हैं।

वह बताती हैं कि उनका काम खासकर अरब और यूरोप देशों में फंसे लोगों के लिए है, जिसके लिए वह पहले उस देश में भारतीय दूतावास से संपर्क करती हैं और उसके बाद आगे के काम को करती हैं। अमनजोत कहती हैं कि इसके लिए कई बार अपने पास ही पैसे देती हैं। कुछ परिवार सक्षम नहीं होते हैं उनके हर संभव मदद करती हूं। यह काम वह सिर्फ भारतीयों के लिए ही नहीं करती बल्कि भारत की सीमा से सटे देशों के लिए भी करती हैं।

20 लड़कों को शेख के चंगुल से छुड़ाया

एक घटना का जिक्र करते हुए वह बताती हैं कि सऊदी अरब में एक शेख ने करीब 20 लड़कों को बंदी बना लिया था। उसमें से किसी एक लड़के ने अपने भाई को फोन करके बताया कि उन्हें पिछले कई दिनों से एक समुद्री जहाज में रखा गया है। उन्हें पता नहीं था वह कहां है। अमनजोत बताती हैं कि इसके लिए उसे लड़के का फौजी भाई मेरे पास आया और उसे बचाने की गुहार लगाई। वह कहती हैं पहले हमने उनकी लोकेशन मंगाई उसके बाद सऊदी अरब दूतावास से संपर्क कर लगभग 20 लड़कों को छुड़वाया, जिसमें कुछ पाकिस्तानी और नेपाली भी थे।

मानव तस्करी के एक और केस का जिक्र करते हुए वह कहती है कि पंजाब और उत्तर भारत से बड़ी संख्या में लेबर के रूप में लोग या तो अरब देश या फिर यूरोप के देशों में जाते हैं। कई लोगों को चीजों के बारे में पूरी जानकारी भी नहीं होती है, जिसके कारण एजेंट उनके साथ धोखा करते हैं।

नंगे पैर दुबई से वापस आई लड़की

पंजाब की एक लड़की की तस्करी का जिक्र करते हुए अमनजोत बताती हैं कि गरीब मां-बाप अपने बच्चों को बड़ी आस के साथ विदेश भेजते हैं कि वह कमाकर देंगे। उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। कुछ अपने बच्चों को उनके सपने पूरे करने के लिए भेजते हैं। ऐसे ही परिवार ने अपनी डेंटिस्ट बेटी को एजेंट के जरिए दुबई भेजा था। उस एजेंट ने पहले उसे अंधेरे कमरे में बंद रखा उसके बाद उसे शेख के हाथ बेच दिया। जहां उसका शारीरिक शोषण होता था। यह मामला लगभग दो महीने तक चला।

इसी बीच उसी के यहां काम करने वाले पाकिस्तानी ड्राइवर ने उसकी हालात को देखते हुए उसे अपने फोन से घर पर बात करने की सलाह दी। उस बच्ची ने अपने पिता को फोन करके सारी घटना के बारे में बताया। इसके बाद उसके पिता मेरे पास आए और बच्ची को बचाने के लिए गुहार लगाने लगे। मैंने उसी नंबर पर दोबारा फोन किया तो बात पाकिस्तानी ड्राइवर से हुई। ड्राइवर ने किसी तरह मेरी बात उस बच्ची से करवाई। मैंने उसे वहां का किसी तरह पता भेजने को कहा। लेकिन अरबी में लिखा होने के कारण वह भेज नहीं पाती थी। एक दिन शेख के परिवार ने पाकिस्तानी रेस्टोरेंट से खाना मंगाया, जहां उर्दू और अंग्रेजी में पता लिखा था। बच्ची ने हमें वह पता भेजा। जिसके बाद उसे इसकी इत्तला भारतीय दूतावास को दी गई और बच्ची को छुड़ाया गया। वह बच्ची जब दुबई से अमृतसर आई तो उसके शरीर पर चोटों के निशान थे जो शेख की बीबी द्वारा उसे दी गई थी। बच्ची दुबई से अमृतसर नंगे पांव आई थी।

तो ये थी मानव तस्करी की दास्तां अब बात परिजनों को आखिरी बार चेहरा दिखाने की। अमनजोत बताती हैं कि यह काम दुनिया का सबसे पुण्य का काम है। वह कहती हैं मैंने ऐसे-ऐसे केस देखे हैं जहां घर का इकलौता चिराग विदेश में जाकर बुझ गया और उनके परिवार आखिरी विदाई भी नहीं दे पा रहे थे। ऐसे ही एक परिवार का जिक्र करते हुए वह बताती हैं कि सऊदी अरब में एक लड़का ट्राला (बड़ा ट्रक) चलाता था। ठीकठाक काम करता था। एक दिन उसकी गाड़ी में कोई दिक्कत आई वह गाड़ी के नीचे जैसे ही उसे ठीक करने के लिए उतरा ट्रक पर लदा कैमिकल उसके ऊपर गिर गया। लड़का वहीं झुलस कर मर गया। वह पांच बहनों का एकलौता भाई था। अब उसकी बॉडी भारत लेने की बारी थी। उसके घर वालों को मेरे बारे में जानकारी मिली। उन्होंने मुझसे संपर्क किया। फिर हमने दूतावास से संपर्क कर उसकी बॉडी को यहां मंगवाया। वह बताती हैं कि उसे लड़के के अंतिम संस्कार में मैं स्वयं शामिल होने गई थी।

ऐसी ही एक दर्दनाक घटना जिक्र करते हुए वह बताती हैं कि कोरोना के दौरान यूपी के एक बच्चे की कनाडा में हार्ट अटैक आने के कारण मौत हो गई। उसके घर वालों को जब इस बारे में पता चला तो उन्होंने मुझसे संपर्क किया। लड़का कनाडा में पढ़ने गया था। उसकी मौत के बाद घर वालों ने हमें वहीं उसका अंतिम संस्कार करने को कहा। अमनजोत बताती हैं कि ऐसी स्थिति में मेरी बहन और भाई भी मेरा साथ देते हैं। वह कहती हैं मेरी बहन ने पहले उस लड़के का अस्पताल का सारा काम कराया और उसके बाद अपने पैसे लगाकर हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार उसका अंतिम संस्कार किया और बाद में भारत आने के बाद उसकी अस्थियां और कपड़े उसके घरवालों को सौंप दिए।

अमनजोत कहती हैं : ऐसे मामलों में कई बार बहुत दिक्कतों का भी सामना करना पड़ता है। कई बार अरब देशों में मृतक के इश्योरेंस के पैसे लेने में परेशानी होती है। कंपनियों में काम करने वाले लोगों का इश्योरेंस शेख स्वयं रखना चाहते हैं ताकि पैसा सारा उन्हें मिले।

एनआरआई दूल्हों द्वारा लड़कियों को धोखा देने का जिक्र करते हुए वह कहती हैं कि 1990 से 2020 के बीच ऐसे केस बड़ी संख्या में सामने आए। अब लड़कियां पढ़ लिख गई हैं। थोड़ा समझदार हो गई है। लेकिन ऐसा नहीं कह सकते हैं कि यह खत्म हो गया है। यह आज भी चल रहा है। ऐसे लड़कियों को मजबूत बनाने के लिए हम तरह-तरह के काम करते हैं। उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का काम कर रहे हैं।

Poonam Masih
Poonam Masih, Journalist The Mooknayak

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