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Wednesday, November 30, 2022

मध्य प्रदेश: दलित युवाओं के लिए लोन स्कीम बना कर भूली सरकार!

योजना का प्रचार-प्रसार नहीं, अन्य कार्यक्रमों और योजनाओं पर करोड़ो किए खर्च।

भोपाल। मध्यप्रदेश में सरकार की योजनाएं दोहरे मापदण्डों का शिकार हो रही है। इनमें खासकर दलित आदिवासियों के लिए चलाई गई योजनाओं के प्रचार-प्रसार पर सरकार की बेरुखी साफ देखी जा सकती है। ऐसा लग रहा कि कहीं सरकार मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम की लोन सबंधी योजनाओं को बना कर भूल गई है। अब योजना संचालित तो हो रही, लेकिन लाभान्वितों की संख्या और योजनाओं का लक्ष्य 10 प्रतिशत से भी कम है। द मूकनायक ने अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम द्वारा दलितों के लिए संचालित योजनाओं की लगातार पड़ताल की है। इसी क्रम में पढ़िए हमारी तीसरी रिपोर्ट..

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मध्यप्रदेश सरकार दलितों को आर्थिक रूप से मजबूत करने और व्यावसायिक रोजगार से जोड़ने की नियत से राज्य अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के माध्यम से 4 योजनाओं को संचालित कर रही है, जिसमें दलित युवाओं को 50 हजार से 2 करोड़ तक के लोन देने का प्रावधान है। लेकिन योजनाओं में निर्धारित लक्ष्य से प्रतिशत से कम आवेदन किए गए और स्वीकृत लोन 10 प्रतिशत से कम है। इसके साथ ही लोन वितरण की संख्या लगभग 5 प्रतिशत से कम है। असल में योजनाओं में निगम को आवेदन नहीं मिलने का कारण संचालित योजनाओं का प्रचार-प्रसार नहीं होता है।

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जब द मूकनायक इस विषय में पड़ताल की तो पता लगा कि सरकार ने अन्य कार्यक्रमों और योजनाओं के लिए करोड़ों के विज्ञापन जनसंपर्क संचालनालय के माध्यम से जारी किए लेकिन अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम की किसी भी योजना का एक भी विज्ञापन प्रदेश स्तर पर जारी नहीं किया।

प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के कार्यकमों के प्रचार के लिए करोड़ों खर्च!

जनसंपर्क संचालनालय के सूत्र के अनुसार, मिली जानकारी में कूनो नेशनल पार्क श्योपुर में और उज्जैन महाकाल लोक के प्रचार-प्रसार पर ही सरकार ने करोड़ों फूंक दिए। मध्यप्रदेश के लगभग हर संभाग में कॉमर्शियल स्पेस पर लाखों के होर्डिंग पोस्टर लगाए गए। इसके अलावा दैनिक अखबार और रीजनल, नेशनल न्यूज चैनलों को लाखों के विज्ञापन के आरओ जारी कर दिए। इससे पहले अमित शाह जबलपुर और भोपाल की सभाओं के साथ भारत सरकार के गृह मंत्री अमित शाह द्वारा एमबीबीएस पुस्तक विमोचन में भी जनसंपर्क ने लाखों के विज्ञापन के साथ पूरे प्रदेश में होर्डिंग पोस्टर लगा दिए थे।

महज दो साल में विज्ञापन पर 753 करोड़ किए खर्च

भाजपा सरकार ने पिछले विधानसभा 2018 के पहले तक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को विज्ञापन देने पर 753 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए थे। यह जानकारी मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने विधानसभा में कांग्रेस विधायक विनय सक्सेना द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में दी थी। उन्होंने कहा था कि 01 जनवरी 2016 से 10 नवंबर 2018 तक शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को विज्ञापन देने पर 753.57 करोड़ रुपए खर्च किए थे, जिसे जनसंपर्क विभाग एवं एक अन्य सरकारी एजेंसी ‘मध्य प्रदेश माध्यम’ द्वारा दिया गया था।

जब द मूकनायक ने इस मामले में अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के अधिकारियों से बात की तो उन्होंने बताया कि हम योजनाओं के प्रचार- प्रसार समय पर करते रहते हैं। लेकिन वर्तमान वित्तीय वर्ष में प्रादेशिक स्तर पर जनसंपर्क द्वारा विज्ञापन जारी नहीं हुआ। निगम के सहायक प्रबंधक एसके जैन ने बताया कि योजनाओं के प्रचार के संबंध में पम्पलेट्स छपाई के लिए भेजे हैं। आते ही जिला मुख्यालय पर भेजने की कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने कहा, योजनाओं में संशोधन के कारण पम्पलेट्स की छपाई में देरी हुईं है।

4 माह बाद लैप्स हो जाएगी राशि

वर्तमान वित्तीय वर्ष का बजट 31 मार्च 2023 में समाप्त हो जाएगा यानी 5 माह बाद आवंटित राशि इस्तेमाल नहीं होने पर लैप्स हो जाएगी। यह राशि पुनः वित्त कोष में समायोजित हो जाएगी।

सरकार अन्य योजनाओं पर कर रही फोकस

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश में चलाई जा रही अन्य योजनाओं की जानकारी के लिए बड़े स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह अपने कार्यक्रम और सभाओं में लाडली लक्ष्मी योजना स्कूल और उच्च शिक्षा, छात्रवृत्ति और अन्य योजनाओं की जानकारी देते रहते हैं। इन योजनाओं के विज्ञापन और पोस्टर भी जनसंपर्क समय-समय पर जारी करता है। लेकिन अनुसूचित जाति के युवाओं के लिए वित्त विकास निगम की योजना का प्रसार धीमा है। यहां सवाल उठता है कि आखिर सरकार दलितों की बनाई योजनाओं के प्रचार में दोहरे मापदंड क्यों अपना रही है? हाल ये है कि वर्तमान वर्ष में जब आधे से ज्यादा वर्ष बीत चुका है। तब, अभी तक सरकार ने दलितों की लोन योजनाओं का विज्ञापन तक जारी नहीं किया यहां तक पम्पलेट्स भी नहीं छप सके हैं।

Ankit Pachauri
Journalist, The Mooknayak

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