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Wednesday, November 30, 2022

मध्य प्रदेशः 184 निजी स्कूलों की मान्यता सरकार ने आधे सत्र में की समाप्त, विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर!

भोपाल। मध्यप्रदेश में कई निजी स्कूलों की मान्यता समाप्त कर दी गई है। यह मान्यता उस समय खत्म की गई जब स्कूलों के सत्र 2022-23 के चार महीने बीत चुके हैं। ऐसे में इन स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। दरअसल, लोक शिक्षण संचालनालय ने प्रदेश के अनेक हाईस्कूल और हायर सैकेंडरी स्कूलों की मान्यता समाप्त की है। मान्यता समाप्त हो जाने से इन स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लग गया है। वहीं छात्रों के अभिभावक भी चिंता में है।

डीपीआई ने स्कूल की मान्यता की रद्द

जानकारी के अनुसार लोक शिक्षण संचालनालय (क्च्प्) ने प्रदेश के 184 हाई स्कूल और हायर सैकेंडरी स्कूलों की मान्यता समाप्त कर दी है। इसमें राजधानी भोपाल के 12 स्कूल भी शामिल हैं। गौरतलब है कि प्रदेश के 1064 स्कूलों में कमियां निकालकर मान्यता समाप्त कर दी थी। अपील के बाद कुछ स्कूलों की मान्यता जारी कर दी गई थी, लेकिन 184 स्कूल में मापदंड के अनुसार व्यवस्था नहीं थी। अब डीपीआई ने इन स्कूलों की मान्यता समाप्त कर दी है।

वहीं द मूकनायक से बातचीत करते हुए निजी स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष अजीत सिंह ने बताया कि संयुक्त संचालकों ने प्रदेश के 1064 स्कूलों में कमियां निकालकर मान्यता समाप्त कर दी थी। इसमें भोपाल के 56 स्कूल भी शामिल थे। इसके बाद डीपीआई में अपील लगाई गई थी। अपील के मामलों की सुनवाई का काम 23 अप्रेल से 31 मई तक किया गया। अपील के बाद कुछ स्कूलों की मान्यता जारी कर दी गई थी, लेकिन जांच के बाद 184 स्कूल ऐसे पाए गए, जिनमें मापदंड के अनुसार व्यवस्था नहीं थी। डीपीआई ने अब इन स्कूलों की मान्यता समाप्त कर दी है। अजीत सिंह ने कहा नए सत्र को चार महीने बीत गए है, और अभी चार महीने बचे है। ऐसे में 184 स्कूल की मान्यता रद्द करना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा सरकार को इसे गंभीरता दिखाते हुए मान्यता को बहाल करना चाहिए ताकि विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित हो सके।

निजी स्कूल एसोसिएशन ने उठाए सवाल

मध्यप्रदेश निजी स्कूल एसोशिएशन ने स्कूलों की मान्यता रद्द किए जाने को लेकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अजीत सिंह ने कहा डीपीआई को सरकारी स्कूलों को देखना चाहिए, जिनमें कई परेशानियां है। उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि यदि सरकारी स्कूलों में सुविधाएं होती तो बच्चों के अभिभावक प्राइवेट स्कूल में बच्चों का एडमिशन नहीं कराते। सरकार के स्कूलों की हालात खराब है। जमीनी स्तर पर देखा जाए तो कई स्कूलों में टॉयलेट और पानी पीने तक की ठीक व्यवस्था नहीं है। गंदगी और पढ़ाई की गुणवत्ता में भी कमी है। सिंह ने कहा ऐसे में सरकार सरकारी स्कूलों को छोड़ कर प्राइवेट स्कूलों पर योजनाबद्ध तरीके से टारगेट कर रही है। ताकि बच्चे सरकारी स्कूलों में एडमिशन ले सकें। लेकिन उनमें सुविधाएं नहीं है। अजीत सिंह ने द मूकनायक से कहा “मैं जानता हूँ। बच्चे बाद में सरकारी स्कूल से टीसी कटवाकर प्राइवेट स्कूलों में ही दाखिला लेंगे।“

अभिभावकों में दिख रही चिंता

इस मामले में द मूकनायक ने एक निजी स्कूल के अभिभावक से बातचीत की उन्होंने नाम नहीं लिखने की शर्त पर बताया कि उनके एक बेटी और बेटा भोपाल के एक निजी स्कूल में पढ़ते हैं। उन्हें अभी जानकारी मिली है कि उनके बच्चों के स्कूल की मान्यता समाप्त कर दी गई है। उन्होंने बताया कि ऐसे में उनके सामने नए स्कूल में एडमिशन कराने की समस्या सामने आ गई है, लेकिन फिलहाल किसी अन्य स्कूल में सत्र के बीच मे दाखिला मिलना भी मुश्किल है। वहीं अब उन्हें सरकारी स्कूल में एडमिशन ट्रांसफर किए जाने की बात की जा रही है।

मंत्री ने कहा सरकारी स्कूलों में ट्रांसफर होंगे एडमिशन

मध्यप्रदेश सरकार के शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने इस मामले में सोमवार को कहा कि अभिभावकों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। बच्चों के एडमिशन निकटतम शासकीय स्कूल में ट्रांसफर कर दिए जाएंगे।

स्कूलों में क्या थी कमियां?

मध्यप्रदेश के 184 निजी स्कूलों की मान्यता अलग-अलग कारणों के चलते समाप्त की गई है। जानकारी के अनुसार स्कूलों में खेल के मैदान, स्कूल भवन के नियमानुसार उपयुक्त नहीं होना। डीपीआई की गाइडलाइंस के अनुसार पात्र शिक्षक नहीं होना मान्यता रद्द किए जाने के मुख्य कारण है।
दरअसल स्कूल की मान्यता एवं नवीनीकरण का काम 2014-15 तक स्कूलों की मान्यता एवं संबद्धता देने का काम माध्यमिक शिक्षा मंडल के पास था। 2016 शासन ने स्कूल की मान्यता एवं नवीनीकरण का काम लोक शिक्षण संचालनालय यानि डीपीआई को दे दिया। जिसके बाद डीपीआई ने स्कूलों का निरीक्षण जिले स्तर पर करवाया था। अपात्र स्कूलों को सत्र प्रारम्भ होने पर नोटिस दिए गए थे। लेकिन समय पर कमियों को दूर नहीं करने पर स्कूलों की मान्यता रद्द कर दी गई।

Ankit Pachauri
Journalist, The Mooknayak

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