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Wednesday, November 30, 2022

राजस्थान: दो कमरों में चल रहा सरकारी महाविद्यालय, 377 छात्र-छात्राओं का पंजीकरण!

सवाईमाधोपुर जिले के मलारना डूंगर उपखण्ड मुख्यालय पर संचालित है महाविद्यालय, तीन साल हो गए नहीं हुआ भवन निर्माण।

जयपुर। राजस्थान सरकार ने राजकीय महाविद्यालयों की संख्या में तो बढ़ोतरी कर दी, लेकिन सुविधा बढ़ाने में सिफर रहे। ऐसा ही एक सरकारी कॉलेज राज्य के सवाईमाधोपुर जिले के मलारना डूंगर उपखण्ड मुख्यालय पर संचालित है। जहां 377 छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के लिए एक कक्षा है, दूसरा कक्ष विभागीय कार्यकलाप के लिए है। इसकी भी समय पर सफाई नहीं होती। बैठने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से अब कॉलेज में विद्यार्थियों की संख्या भी कम नजर आने लगी है। ऐसे में परीक्षा परिणाम पर असर पड़ने की बात से भी इनकार नहीं कर सकते। कॉलेज के छात्र नेता समस्याओं को लेकर धरना प्रदर्शन भी करते हैं, लेकिन उच्चशिक्षा महकमा उनकी मांगों की अनदेखी कर रहा है।

छात्र संख्या तो बढ़ी, लेकिन सुविधा नहीं

राज्य सरकार ने 2020 में सवाईमाधोपुर विधायक दानिश अबरार की अभिशंषा पर राजकीय महाविद्यालय स्वीकृत किया। सरकारी कॉलेज के लिए अपना भवन नहीं होने से जिला कलक्टर के हस्तक्षेप के बाद यहां राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मलारना डूंगर के 5 कमरे कॉलेज संचालन के लिए अलॉट किए गए। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि उन्हें केवल दो कमरे दिए गए। एक कमरे में कार्यालय व दूसरे में अध्ययन कक्ष बनाया गया।

विद्यालय छात्र संघ महासचिव मुतल्लिब हाजी ने द मूकनायक को बताया कि “शैक्षिक सत्र 2020 में राजकीय महाविद्यालय में प्रथम वर्ष के प्रवेश शुरू होने के साथ ही पढ़ाई शुरू हुई, लेकिन कोरोना के कारण कॉलेज बन्द कर दिया गया। दो साल तक ऑनलाइन पढ़ाई के साथ ही अब तृतीय वर्ष तक यहां छात्र-छात्राओं की संख्या 377 हो गई, लेकिन कमरों की संख्या में इजाफा नहीं हुआ। विद्यार्थी कॉलेज आते हैं, लेकिन जगह की कमी के कारण यहां पढ़ाई नहीं होती।”

बेटों के मुकाबले बेटियों की संख्या अधिक

राजकीय महाविद्यालय में अध्ययनरत 377 विद्यार्थियों में से 199 छात्राएं पढ़ती हैं। स्थानीय कॉलेज से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस सत्र में यहां प्रथम वर्ष में 69 छात्र व 64 छात्रा है। द्वित्तीय वर्ष में 54 छात्रों के मुकाबले 62 छात्राएं हैं, जबकि तृतीय वर्ष में 55 छात्र व 73 छात्राएं अध्ययनरत हैं। यह बात अलग है कि बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ के नारे से प्रेरित होकर स्कूल कॉलेजों में बेटियों की संख्या तो बढ़ गई, लेकिन इन्हें पढ़ने के लिए सरकार सुविधा नहीं बढ़ा रही है।

अतिथि शिक्षकों के भरोसे पढ़ाई की जिम्मेदारी

राजकीय महाविद्यालय मलारना डूंगर में वर्तमान में एक स्थायी लेखाधिकारी कार्यरत है। इसके अलावा प्राचार्य डॉ. सोनूलाल मीना को प्रतिनियुक्ति पर नोडल अधिकारी लगा रखा है। यह राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय गंगापुर सिटी से प्रतिदिन 40 किलोमीटर का सफर तय कर मलारना डूंगर आते है। कॉलेज में शैक्षणिक स्वीकृत सभी 8 पद रिक्त हैं। अशैक्षणिक के 13 में से 12 पद खाली चल रहे हैं। यहां एक भी स्थायी प्रोफेसर नहीं है। विद्या सम्बल योजना के तहत 8 प्रोफेसर शिक्षक कार्यरत है। यह भी कभी कभी कॉलेज में नजर आते हैं। प्रोफेसर महेंद्र कुमार नावरिया ने बताया कि वर्तमान में यहां कला वर्ग में राजनीति विज्ञान, भूगोल, हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी, इतिहास व समाज शास्त्र विषय स्वीकृत हैं।

प्रोफेसर महेंद्र कुमार ने द मूकनायक को बताया कि, “जगह की कमी है। क्लास में आने वाले विद्यार्थियों को पेड़ों के नीचे बैठ कर भी पढ़ाते हैं। कॉलेज का अपना भवन बने तो शैक्षणिक सुविधाओं में भी सुधार होगा।”

कॉलेज भवन निर्माण में देरी

राजकीय महाविद्यालय भवन निर्माण के लिए राज्य सरकार ने 4 करोड़ 17 लाख 31 हजार 119 रुपए की वित्तीय स्वीकृति जारी कर 6 जून 2022 को टेंडर जारी कर दिया। टेंडर के अनुसार कार्यकारी एजेंसी राजस्थान स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड डिवीजन टोंक के निर्देशन में गत 14 जुलाई 2022 को भवन निर्माण शुरू किया गया। लेकिन अगले ही दिन निर्माण रोक दिया गया। अब लगभग 4 महीने से भवन निर्माण कार्य बंद है। जबकि टेंडर के अनुसार कॉलेज भवन निर्माण कार्य 13 सितंबर 2023 तक पूर्ण करना है।

भवन निर्माण में अतिक्रमण बन रहा बाधक

कॉलेज भवन निर्माण कार्यकारी एजेंसी राजस्थान स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड डिवीजन टोंक के सहायक अभियंता गंगापुर सिटी रामरतन मीना ने द मूकनायक को बताया कि, “हमने भवन निर्माण समय पर शुरू कर दिया था। मौके पर कॉलेज के लिए आवंटित भूमि पूरी नहीं है। इस लिए कार्य रोक दिया गया। हमने कॉलेज प्रशासन से मौके पर उपलब्ध आवंटन से कम भूमि पर निर्माण की अनुमति मांगी है, लेकिन वहां से जवाब नहीं मिला है।” इस संबंध में जब सम्बंधित हल्का पटवारी प्रेमराज गुर्जर से बात की गई। उन्होंने बताया कि राजकीय महाविद्यालय के लिए कस्बे में 21 बीघा 14 बिस्वा भूमि आवंटन कर कॉलेज प्रशासन को कब्जा सम्भला दिया था। पटवारी ने बताया कि कुछ हिस्से पर अस्थायी अतिक्रमण है। कॉलेज प्रशासन लिख कर देगा तो अतिक्रमण भी हटवाया जाएगा।

राजकीय महाविद्यालय मलारना डूंगर के नोडल प्राचार्य डॉ. सोनूलाल मीना ने बताया कि कॉलेज अस्थायी भवन में चल रहा है। असुविधा हो रही है। कॉलेज भवन का निर्माण कार्य भी बन्द है। हमारे हाथ में कुछ नहीं है। उच्च अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है।

Abdul Mahir
अब्दुल माहिर 2003 से लगातार राजस्थान पत्रिका में बतौर रिपोर्टर के रूप में काम कर चुके हैं। इसके अलावा पत्रिका टीवी में भी कार्य कर चुके हैं। मौजूदा समय में अब्दुल माहिर राजस्थान से द मूकनायक के लिए रिपोर्ट कर रहे हैं।

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