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Friday, October 7, 2022

“अगर पुलिस समय से हमारी सुन लेती तो इतना बड़ा हादसा न होता” – गोकुलपुरी अग्निकांड

“हम लोग गरीब हैं। कान साफ करके पैसा इकट्ठा किया था, ताकि अपनी बेटियों की शादी कर सकें। कुछ दहेज के लिए सामान भी रखा था, लेकिन सबकुछ राख हो गया है। हमारे पास अब पहनने के लिए कपड़े भी नहीं हैं।” – आग के भयावह मंजर को याद करते हुए मृतकों के परिजन।

दिल्ली। बीते शुक्रवार की सुबह खबर आई की उत्तर-पूर्वी दिल्ली के गोकुलपुरी में झुग्गियों में आग लग गई। यह सभी झुग्गियां मेट्रो पिलर के सामने थी। यह आग रात को लगभग 12:30 बजे लगी थी। रात अधिक होने के कारण सभी लोग सो गए थे, जिससे आग ने विकराल रूप ले लिया था। इसकी चपेट में आने से सात लोगों की दर्दनाक मौत हो गई जिसमें दो बच्चे और पांच अन्य एक ही परिवार के सदस्य थे।

घटना की खबर मिलने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल घटनास्थल पर पहुंचकर पीड़ित परिवारों में से 5 मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख और बच्चों के परिजनों को 5-5 लाख मुआवजा देने का ऐलान किया। वहीं दूसरी तरफ पीएम मोदी ने भी इस घटना पर अपनी संवेदना प्रकट की थी। अब इस घटना को लगभग एक सप्ताह होने वाला है। इस घटना पर द मूकनायक की टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर पीड़ित परिजनों से बात की।

गोकुलपुरी अग्निकांड के बाद राहत शिविरों में रात गुजारते वहां के लोग / फोटो: पूनम, द मूकनायक
गोकुलपुरी अग्निकांड के बाद राहत शिविरों में रात गुजारते वहां के लोग / फोटो: पूनम, द मूकनायक

मृतकों के पीड़ित परिजनों ने सरकार से की आवास की मांग

आग के इस वीभत्स घटना में 33 झुग्गियां जलकर राख हो गई। इसमें रहने वाले सभी परिवार अब राहत शिविर में रह रहे हैं। उन लोगों की मांग है कि उन्हें सरकार द्वारा रहने के लिए छत्त दी जाए ताकि, वह एक अच्छा जीवन जी सके।

शुक्रवार रात को लगी आग के बारे में बात करते हुए वहां के लोग द मूकनायक से बताते हैं कि रात का समय था, सभी लोग थके थे इसलिए सभी अपने-अपने घर में सो रहे थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि रात को इतनी भयानक आग लग जाएगी।

वह कहते हैं कि उन्हें यह भी नहीं पता कि आग कैसे लगी। मामले में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार आग शॉर्ट सार्किट के कारण लगी थी। जहां आग लगी वहां कई रद्दी के गते और काबड़ पड़ा हुआ था। जिसके कारण आग तेजी से फैल गई और लोग बाहर नहीं निकाल पाए।

प्रमाण पत्र न होने के कारण हो रही परेशानियां

गोकुलपुरी की इन झुग्गियों में रहने वाले लोग कानपुर के थारु समुदाय के हैं। जो यहां कान साफ करने का काम करते हैं। इस आग में उनके औजार भी झुलस गए हैं।

“हमारे सारे प्रमाण पत्र भी जल गए हैं। जिसके कारण बहुत परेशानी हो रही है। जहां भी मदद के लिए जाते हैं सबसे पहले प्रमाण पत्र ही मांगा जाता है। जब सबकुछ जल गया है तो प्रमाण पत्र कहां से लाकर दें।” एक महिला द मूकनायक को बताती हैं।

गोकुलपुरी अग्निकांड की आपबीती बताती सुमन / फोटो: पूनम, द मूकनायक
गोकुलपुरी अग्निकांड की आपबीती बताती सुमन / फोटो: पूनम, द मूकनायक

सुमन नाम की एक महिला जिसका भांजा (रोशन) जिसकी आग की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई, के बारे में वह बताती है कि, “बाहर आने का रास्ता बहुत ही संकरा था। लोग बड़ी मुश्किल से वहां से बाहर निकल पाएं। जो नहीं निकल पाएं वह वहीं झुलस गए।”

घटना पर प्रशासन की गतिविधियों पर बात करते हुए सुमन कहती है कि, आग रात को लगभग 12.30 बजे लगी और दमकल की गाड़ी दो बजे के बाद आई। “हम लोग लगातार पुलिस को फोन कर रहे थे। लेकिन पुलिस इस मामले में हमें उलझती रही कि यह क्षेत्र दिल्ली में है या यूपी। हमें न तो दिल्ली पुलिस वाले मदद कर रहे थे न यूपी वाले। काश वह समय से आ जाते तो शायद इतना बड़ा हादसा टल जाता है। मेरा भांजा और भांजी बच जाते।” वह बताती हैं।

बेटी की शादी के लिए रखा सामान हुआ राख

सुमन के बगल में खड़ी एक और महिला रोते हुए कहती है कि, “हमलोग गरीब लोग हैं। कान साफ करके पैसा इकट्ठा किया था, ताकि अपनी बेटियों की शादी कर सकें। कुछ दहेज के लिए सामान भी रखा था। लेकिन सबकुछ राख हो गया है।” हालात यह है कि हमारे पास पहनने को कपड़ों भी नहीं है। यहां जो कपड़ें हमें पहनने को दिए जा रहे हैं उसमें किसी की सलवार है तो कमीज नहीं और किसी की कमीज है तो सलवार नहीं।

बातचीत के दौरान भीड़ में एक और लड़का आगे आकर कहता है कि, इतना बड़ा हादसा हो गया सीएम आएं और सामने से ही मुआवजा देने का ऐलान करके चले गए। किसी से मिले भी नहीं। यहां तक कि जहां झुग्गियों में आग लगी थी वहां भी देखने नहीं गए।

हादसे में मारे यह लोग

इस दिन की भयावह आग में, बबलू(30), रंजीत(17), रेश्मा(16), प्रियंका(22), अमित उर्फ शहंशाह (11) जो एक परिवार के सदस्य थे, और दीपिका (8) और रोशन (13) दो बच्चे जिन्होंने अपने आप को आग से बचाने के लिए बक्से में बंद कर लिया था लेकिन झुलस गए और उनकी भी मौत हो गई।

Poonam Masih
Poonam Masih, Journalist The Mooknayak

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