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Wednesday, November 30, 2022

राजस्थान: बेमौसम बरसात ने किसानों की मेहनत पर फेरा पानी, फसल खराब

बारिश के चलते पूर्वी राजस्थान के कई जिलों में खरीफ की फसल 100 प्रतिशत तक खराबा, किसान कर रहे मुआवजे की मांग

जयपुर। राजस्थान के भरतपुर, कोटा व जयपुर सम्भाग में गत कुछ दिनों से हो रही बरसात ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। पकी पकाई फसल खेत व खलिहानों में ही खराब हो गई। मानो कुदरत ने किसान के मुंह में आया निवाला छीन लिया है। प्राकृतिक आपदा से पूर्वी राजस्थान के कई जिलों में खरीफ फसल पूरी तरह तबाह हो गई। अब बेबस किसान आर्थिक सम्बल की उम्मीद में सरकार की तरफ देख रहा है, लेकिन राजस्थान सरकार का खराब हुई फसल पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया। खास बात यह है कि फसल खराबे का आकलन तक करने कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी खेतों तक नही पहुंचा। इससे किसानों में गहरा आक्रोश है। किसानों का कहना है उनकी फसलें तबाह हो गई हैं।

सार्वजनिक निर्माण विभाग मंत्री ने किया ट्वीट

भरतपुर जिले में बेमौसम बरसात से खराब फसल पर चिंता जताते हुए सार्वजनिक निर्माण विभाग मंत्री भजन लाल जाटव ने ट्वीट कर कहा कि, भरतपुर जिले में हुई भारी बरसात के कारण फसलों के भारी नुकसान होने की खबर चिंताजनक है। भरतपुर जिला कलेक्टर से बात कर फसलों में हुए नुकसान को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हर परिस्थिति में किसान भाइयों के साथ है।

भरतपुर सहित धौलपुर, करौली, सवाईमाधोपुर, बूंदी, कोटा, बारा, टोंक, झालावाड़, दौसा, जयपुर सहित पूर्वी राजस्थान के ज्यादातर जिलों में बीते तीन दिनों से लगातार बारिश हो रही है। बरसात से यहां खरीफ की फसल चौपट हो चुकी है।

भारतीय किसान संघ सवाईमाधोपुर जिलाध्यक्ष कानजी मीना जस्टाना ने द मूकनायक को बताया कि “भरतपुर सम्भाग में बाजरा, तिल, मूंग व उड़द प्रमुख फसलें है। इन दिनों हर तरफ खरीफ की फसलें पक चुकी हैं। ज्यादातर किसानों ने फसल काट कर खलिहान में रखी है। अभी बाजरे की छंटाई चल रही थी। तिल को सुखाने के लिए झोला ( ढेरी ) लगा रखे है। मूंग व उड़द भी सूखने के लिए ज्यों की त्यों खेतों में पड़े हैं। किसान मेहनत कर पकी फसल को तैयार करने के लिए परिवार के साथ रात दिन खेतो में डेरा डाले हैं। इस बीच बेमौसम बरसात कहर बनकर किसानों के अरमानों पर टूट पड़ी।”

किसानों का कहना है कि, यहां 100 प्रतिशत फसल में नुकसान हुआ है। राजस्थान सरकार अपने अधिकारियों को दफ्तरों से निकाल कर खेतों में भेजे। ताकी किसानों की तबाही का सच इनके सामने भी आए। सरकार को चहिए फसल बीमा योजना की जटिलता को खत्म करते हुए क्लेम के आसान नियम बनाये। ताकि अनपढ़ किसान भी आसानी से अपनी पीड़ा बीमा कम्पनी को बता सकें।

कोटा जिले के सांगोद के रहने वाले किसान शाहबुद्दीन ने द मूकनायक को बताया कि, “बारिश से धान फसल में काफी नुकसान हुआ है। सोयाबीन में पानी भर गया है। मूंग, उड़द व मक्का में भी नुकसान है।” शाहबुद्दीन बताते हैं कि, “कुदरत के सामने सब बेबस हैं। सरकार से यही उम्मीद है कि फसल खराबे का ईमानदारी से आकलन कर पीड़ित किसानों के मेहनत व लागत का मुआवजा दें।”

Abdul Mahir
अब्दुल माहिर 2003 से लगातार राजस्थान पत्रिका में बतौर रिपोर्टर के रूप में काम कर चुके हैं। इसके अलावा पत्रिका टीवी में भी कार्य कर चुके हैं। मौजूदा समय में अब्दुल माहिर राजस्थान से द मूकनायक के लिए रिपोर्ट कर रहे हैं।

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