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Wednesday, November 30, 2022

मध्यप्रदेश: विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने के लिए किसानों का हल्ला बोल

अचानक आंदोलन स्थल पर पहुंचे मुख्यमंत्री शिवराज, किसानों को लुभाने के लिए की कई घोषणाएं।

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में गत मंगलवार को प्रदेशभर से बड़ी तादात में किसान एकत्र हुए। किसान एक बार फिर विधानसभा का 7 दिन का विशेष सत्र बुलाए जाने की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि इसमें सिर्फ खेती-किसानी से जुड़े मुद्दे और समस्याओं पर ही चर्चा हो। किसान संघ के प्रोग्राम में आईडीए (इंदौर विकास प्राधिकरण) को भंग करने की मांग भी की गई। इस बीच आंदोलन में सीएम शिवराज सिंह चौहान जा पहुंचे और किसानों के फायदे की कई घोषणाएं कर दीं।

दरअसल, एक दिवसीय आंदोलन भारतीय किसान संघ के बैनर तले किया जा रहा था। लोगों का मानना है कि, भारतीय किसान संघ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) का अनुसांगिक संगठन है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) भी आरएसएस की विचार धारा से जुड़ी पार्टी है। ऐसे में सीएम शिवराज का भारतीय किसान संघ के आंदोलन में अचानक जाना और घोषणाएं करना प्रायोजित कार्यक्रम दिखाई पड़ता है!

आंदोलन स्थल पर पहुंचे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, फोटो- अंकित पचौरी, द मूकनायक
आंदोलन स्थल पर पहुंचे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, फोटो- अंकित पचौरी, द मूकनायक

किसान संघ के आंदोलन के संयोजक गिरजभान ठाकुर ने कहा कि अगले आंदोलन में प्रदेशभर से महिलाएं भी जुटेंगी। सरकार के मंत्री और विधायकों को चूड़ियाँ सौंपी जाएंगी। संघ के राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य नानजी आकले ने कहा, “मैं जैसा समझता था वैसा मध्यप्रदेश का किसान सुखी नहीं है। ये दुर्भाग्य की बात है। ये दुर्भाग्य मध्यप्रदेश में शासनकर्ताओं की वजह से है। ये उनके निकम्मेपन का उदाहरण है। मध्यप्रदेश सरकार जिंदा है तो दिखाए।” उन्होंने कहा, किसानों की समस्याओं को सरकार गंभीरता से ले।

18 मुद्दों पर किसानों ने सरकार को घेरा

भारतीय किसान संघ 18 मांगों को लेकर किसान आंदोलन कर रहा है। आंदोलन के मंच को फूलों के साथ टोकरियों में फल और सब्जियां रखकर सजाया गया है। भारतीय किसान संघ ’किसान शक्ति शंखनाद, ग्राम सभा से विधानसभा’ के तहत हो रहे कार्यक्रम में प्रदेशभर से हजारों किसान जुटे हैं। इसे लेकर एमवीएम कॉलेज ग्राउंड में बड़ा पंडाल बनाया गया है। जिला और तहसील स्तर से किसानों को जुटाने के लिए पिछले 4 महीने से तैयारियां चल रही थीं।

किसानों से जुड़े 18 मुद्दों को लेकर किसान भोपाल में जुटे हैं, उनमें खाद, बीज, मुआवजा, भावांतर समेत हर बिंदू शामिल हैं। किसानों की मांग है कि अनाज और सब्जियों पर भावांतर योजना लागू की जाए। इससे उन्हें मंडियों में कम दाम न मिले। सबसे बड़ा मुद्दा विधानसभा सत्र बुलाने का ही है। किसान चाहते हैं कि विधानसभा का 7 दिवसीय विशेष सत्र बुलाकर सरकार सिर्फ उन्हीं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करे।

सालों से मांग, लेकिन समाधान नहीं

किसान संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार से लंबे समय से मांग की जा रही है, लेकिन उनका समाधान नहीं हुआ। इसलिए अब मैदान में उतरेंगे। किसानों ने कहा कि उनकी मांग पूरी नहीं होने पर वह आंदोलन को और भी विस्तार देंगे। लेकिन अब अचानक आंदोलन में सीएम शिवराज के पहुँचने से पूरा आंदोलन प्रायोजित नजर आने लगा है। लोगों द्वारा अटकलें लगाई जा रहीं हैं कि आखिर आरएसएस के अनुसांगिक संगठन को आंदोलन की क्या जरूरत पड़ गई। वे चाहते तो सीधे सीएम शिवराज सिंह मिलकर मांगों का निराकरण कर सकते थे, और आंदोलन के बीच में पहुचें मुख्यमंत्री शिवराज ने घोषणाएं कर किसानों को साधने की कोशिश की है।

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसा हो ही नहीं सकता कि किसान आए और मामा उनके बीच न आए, ये हो ही नहीं सकता। इसी के साथ उन्होने घोषणा की। उन्होंने कहा जो किसान डिफॉल्टर हो गए है, उनके कर्ज का ब्याज सरकार भरेगी।

ये हैं 18 सूत्रीय मांगें-

  • मध्यप्रदेश सरकार खेती-किसानी से संबंधित विषयों पर चर्चा के लिए विधानसभा का सात दिवसीय विशेष सत्र बुलाए। इसे किसान संघ ने प्रमुख बताया है।
  • वायरस या अफलन से हुए नुकसान की भरपाई के लिए भावांतर, मुआवजा दें।
  • डिफॉल्टर किसानों का ब्याज माफ कर उन्हें सोसाइटियों के जरिए खाद-बीज प्रदान किया जाए।
  • मुख्यमंत्री कृषि पंप अनुदान योजना जल्द चालू हो।
  • सभी वितरण केंद्र स्तर पर बिजली समस्या समाधान कैम्प लगाकर तत्काल किसानों की समस्याएं दूर की जाएं।
  • मुख्यमंत्री खेत सड़क योजना एवं बलराम तालाब योजना फिर से चालू हो।
  • प्रदेश की सभी नहरों की मरम्मत की जाए, समय पर किसानों को बेहतर तरीके से पानी मिल सके।
  • प्रदेश के सभी गोपालक किसानों को 900 रुपए प्रति माह दिया जाए।
  • मुख्यमंत्री सम्मान निधि की राशि 4 हजार से बढ़ाकर 10 हजार रुपए की जाए।
  • राजस्व के प्रकरणों का पंचायत स्तर पर कैम्प लगाकर शीघ्र निराकरण किया जाए।
  • जमीन क्रय करने वाले व्यक्ति की रजिस्ट्री के बाद अधिकतम सात दिन के अंदर नामांकरण भी किया जाए, ताकि जालसाजी न हो सके।
  • जंगली जानवरों एवं आवारा पशुओं से होने वाले किसानों के नुकसान की भरपाई सरकार करे।
  • जिन क्षेत्रों में कृषि भूमि की गाइडलाइन बहुत कम है, उसे बढ़ाया जाए और भूमि अधिग्रहण करते समय किसानों को गाइडलाइन का चार गुना मुआवजा दिया जाए। बहुत जरूरी होने पर ही उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण हो।
  • मंडियों में कार्यरत महिला मजदूरों को हम्माल का दर्जा दिया जाए।
  • प्रदेश के विकास प्राधिकरणों को भंग किया जाए, जिससे योजनाओं के नाम पर किसानों के साथ होने वाली लूट बंद हो सके।
  • मंडियों में डोकोज टेस्टिंग मशीनें लगाई जाएं।
  • अनाज तौलने के लिए 10 टन के फ्लेट कांटे लगें।
Ankit Pachauri
Journalist, The Mooknayak

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