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Wednesday, November 30, 2022

मध्य प्रदेश: एग्रीकल्चर के फर्जी कॉलेज धड़ल्ले से बांट रहे डिग्रियां, लैब और टीचर तक नहीं!

भोपाल। मध्यप्रदेश में फर्जी डिग्री देने वाले कॉलेजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह पूरा मामला एग्रीकल्चर कोर्स को बिना अनुमति के संचालित करने का है। प्राइवेट यूनिवर्सिटी के साथ ही राज्य शासन की शासकीय विश्वविद्यालय भी अवैधानिक रूप से एग्रीकल्चर से सम्बंधित कोर्सों का संचालन कर रहे हैं। ऐसे में इन कॉलेज और यूनिवर्सिटी में एग्रीकल्चर की पढ़ाई करने वाले छात्रों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। द मूकनायक ने इस मामले की पड़ताल की है। पढिए हमारी ये खास रिपोर्ट..

प्रदेश में पूर्व में फर्जी नर्सिंग कॉलेजों का मामला सामने आया था। लेकिन अब एग्रीकल्चर कॉलेज और यूनिवर्सिटी के फर्जी संचालन का मामला सामने आया है। छात्रों के भविष्य को ताक पर रखते हुए राज्य में फर्जी कॉलेज चल रहे हैं। कॉलेज के साथ ही कुछ यूनिवर्सिटी भी है। जिन्होंने बिना नियम के पालन कर सिर्फ उच्च शिक्षा विभाग के आदेश का पालन करते हुए नई शिक्षा नीति के अंतर्गत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के नियमों को अनदेखा कर विश्वविद्यालय में कृषि विभाग का संचालन शुरू कर दिया। एग्रीकल्चर में बीएससी और एमएससी जैसे कोर्सों को संचालित कर रहे हैं।

लैब और टीचर तक नहीं!

जब द मूकनायक इस मामले में बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी (बीयू) के कुछ छात्रों से बात की तब उन्होंने नाम नहीं लिखने की शर्त पर बताया कि एग्रीकल्चर के लिए न तो टीचर हैं और न ही लैब। बीयू में बीएससी एग्रीकल्चर का पहला बैच तीन महीने पहले अगस्त में शुरू हुआ था। इस बैच में 12 स्टूडेंट्स ने एडमिशन लिया था। इसमें से 10 स्टूडेंट छत्तीसगढ़ के और दो मध्यप्रदेश के हैं। छात्रों के मुताबिक विश्वविद्यालय ने यह कोर्स शुरू तो करा दिया, लेकिन सुविधाएं शून्य हैं। एक छात्र ने बताया कि बायोसाइंस डिपार्टमेंट को इसका नोडल डिपार्टमेंट बनाया है। इसकी फैकल्टी इन स्टूडेंट्स को पढ़ा रही है। इन्हें पढ़ाने के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च (आईसीएआर) के अनुसार सब्जेक्ट एक्सपर्ट फैकल्टी नहीं हैं। यूनिवर्सिटी ने इस कोर्स को शुरू करने की इतनी जल्दबाजी दिखाई कि कार्यपरिषद के निर्णय को भी नहीं माना। बिना आईसीएआर की सहमति के इसे शुरू कर दिया गया।

यूनिवर्सिटी एक्ट में बगैर संशोधन के संचालित किए कोर्स

हमने इस मामले की जब पड़ताल की गई तो खुलासा हुआ कि एग्रीकल्चर कोर्स संचालित कर रहे तमाम यूनिवर्सिटी और कॉलेजों ने अपने विश्वविद्यालय एक्ट में संशोधन ही नहीं किया है। दरअसल, जब किसी प्राइवेट या शासकीय यूनिवर्सिटी का गठन किया जाता है। तब यूनिवर्सिटी के एक्ट में संचालित कोर्सों का विवरण दिया जाता है। ऐसे नए कोर्सों को संचालित करने के लिए एक्ट में संशोधन किया जाता है। लेकिन इसके पहले उस कोर्स की काउंसिल से अनुमति लेनी होती है। जिसके लिए काउंसिल एक मापदंड निर्धारित करती है। लेकिन विवि ने बिना किसी मापदंड को पूरा किए कोर्स का संचालन शुरू कर दिया।

छात्रों के भविष्य पर संकट

मध्यप्रदेश में फर्जी एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी और कॉलेजों का मामला सामने आ गया है। जिस तरह से मापदंडों को ताक पर रखकर नर्सिंग कॉलेज संचालित हो रहे हैं। ठीक उसी तरह प्राइवेट कृषि कॉलेज भी मापदंडों की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं।

41 कॉलेज और 6 यूनिवर्सिटी में संचालित है कोर्स

जबलपुर के आरटीआई कार्यकर्ता शुभम पटेल ने द मूकनायक को बताया कि सूचना के अधिकार अधिनियम से मिली जानकारी के मुताबिक, मध्यप्रदेश में ऐसे 41 कॉलेज और 6 यूनिवर्सिटी संचालित हो रहे हैं जो फर्जी हैं। इन कॉलेजों में छात्रों को एग्रीकल्चर कोर्स की फर्जी डिग्री दी जा रही है। मध्यप्रदेश राजपत्र में दिए गए नियम के मुताबिक फिलहाल मध्यप्रदेश में ऐसी कोई संस्था नहीं है जो एग्रीकल्चर कॉलेज या यूनिवर्सिटी खोले जाने की अनुमति देता हो।

आपको बता दें कि, मध्यप्रदेश में कृषि शिक्षा के नाम पर यह छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। इसका परिणाम उन छात्रों को भुगतना पड़ रहा है जो नियम के तहत कड़ी मेहनत कर कृषि विश्वविद्यालयों में परीक्षा के जरिए एडमिशन लेते हैं। इसके अलावा जिन कॉलेज, यूनिवर्सिटी अवैधानिक तरीके से एग्रीकल्चर के कोर्स संचालित हो रहे उनमें कोई भी प्रवेश परीक्षा की प्रक्रिया नहीं है।

Ankit Pachauri
Journalist, The Mooknayak

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