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Wednesday, November 30, 2022

फॉलोअप: मृतक सफाईकर्मी व सिक्योरिटी गार्ड के परिजनों को मुआवजा नहीं देने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने डीडीए को लगाई फटकार

देश में साल 2013 से ही हाथ से मैला ढोने की प्रथा का कानूनी तौर पर अंत कर दिया गया है, लेकिन आए दिन सीवर में जहरीली गैस से दम घुटने के कारण सफाई कर्मचारियों की मौत में कोई कमी नहीं आ रही है।

इसी साल सितंबर में बाहरी दिल्ली के मुंडका इलाके के डीडीए के सैप्टिक टैंक की सफाई करते हुए रोहित नाम के सफाई कर्मचारी की मौत हो गई थी। वहीं रोहित को बचाने के लिए आगे आए गार्ड अशोक कुमार की भी जहरीली गैस से दम घुटने के कारण मौत हो गई थी। जिस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने डीडीए (दिल्ली विकास प्राधिकरण) को पीड़ित के परिवार को 10-10 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया था। लेकिन अक्टूबर में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेश के बाद नवंबर महीने की अगली सुनवाई तक पीड़ित परिवारों को कोई भी मुआवजा नहीं मिला।

यह भी पढ़ें- ग्राउंड रिपोर्ट: आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा रोहित का परिवार, मुंडका में सीवर सफाई के दौरान जहरीली गैस से हुई थी मौत

दिल्ली हाईकोर्ट ने डीडीए को फटकार लगाते हुए कहा कि प्रशासन को मृतकों के परिवार वालों को मुआवजे का भुगतान करने के लिए कहा गया था। क्योंकि परिवार की रोजी-रोटी की जिम्मा उनके सिर पर था। ऐसे मे जब वह नहीं हैं तो उन्हें मुआवजा मिलें। जिस वक्त यह सुनवाई हो रही थी उस समय डीडीए के वाइस चेयरमैन मनीष गुप्ता भी सुनवाई के दौरान मौजूद थे।

दिल्ली जलबोर्ड को भी किया था तलब

इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने मुंडका सफाई कर्मचारी की मौत के मामले में डीडीए, दिल्ली पुलिस और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग को नोटिस जारी किया था। जिस पर बाद में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने दिल्ली जलबोर्ड और डीडीए को इस मामले में तलब किया था।

दिल्ली हाईकोर्ट के तलब करने के बाद सिंतबर में अदालत में पेश दिल्ली जल बोर्ड और एमसीडी के वकीलों ने इस मामले से पल्ला झाड़ते हुए अपनी-अपनी दलील पेश की। अदालत ने वकीलों से पूछा कि उनके मुवक्किल मृतकों के परिवार वालों को मुआवजा और नौकरी देने को तैयार है? जिसके जवाब में दिल्ली जल बोर्ड के वकील ने कहा कि जहां यह घटना हुई है वह इलाका डीडीए के अंतर्गत आता है। इसलिए दिल्ली जल बोर्ड द्वारा मुआवजा देने से इंकार कर दिया है। जबकि एमसीडी के वकील ने साफ कह दिया था कि इस मामले में एमसीडी जिम्मेदार नहीं है।

नवंबर तक मुआवजा देने का आदेश

अक्टूबर में हुई सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वही पीठ ने डीडीए को फटकार लगाते हुए पीड़ित परिवार को अगली सुनवाई तक मुआवजा देने का आदेश दिया था। डीडीए का इस पर जवाब था कि सफाई कर्मचारी निजी तौर पर हायर किया गया था। इसलिए सच्चाई का पता लगाना मुश्किल है।

नवंबर को हुई सुनवाई से पहले पीड़ित परिवारों को मुआवजा नहीं मिलने पर दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने डीडीए को फटाकर लगाते हुए कहा कि मेरा सिर शर्म से झुक गया है। अभी तक पीड़ित परिवारों को किसी तरह का मुआवजा नहीं दिया गया है।

आपको बता दें कि, सितंबर के महीने में बाहरी दिल्ली के मुंडका में डीडीए में सफाई के दौरान रोहित जहरीली गैस के कारण बेहोश हो गया। जिसे बचाने के लिए सिक्योरिटी गार्ड गया। जैसे ही वह भी टैंक में उतरा जहरीली गैस से दम घुटने के कारण दोनों की मौत हो गई थी।

Poonam Masih
Poonam Masih, Journalist The Mooknayak

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