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Wednesday, November 30, 2022

दलित हूं इसलिए तिरंगा फहराने पर फोड़ा सिर, बाबा साहेब को दी गालियां

देश के प्रधानमंत्री 15 अगस्त के दिन जहां देश को संबोधित कर रहे थे वहीं देश की राजधानी तुगलकाबाद में जाटव समुदाय के लोगों पर पत्थर बरसाए जा रहे थे, लाठियों से पीटा जा रहा था साथ ही महिलाओं के कपड़े फाड़े जा रहे थे. ये हम नहीं तुगलकाबाद के जाटव समुदाय के लोग ही कहे रहे थे.
बात शुरू होती है झंड़ा फहराने को लेकर जो इतनी बढ़ जाती है कि चल जाती है लाठियां हो जाता है पत्थराव. जाटव महोल्ले में एक सरकारी जमीन है जहां पर बाबा साहेब आंबेडकर की मूर्ति लगी हुई है. उस जमीन पर जाटव समाज के कुछ लोग, महिलाएं और बच्चें 15 अगस्त के दिन झंड़ा फहराने जाते हैं लेकिन गुजर समाज का एक परिवार उनको झंडा फहराने से रोकता है. इस बात को लेकर जाटव समाज के लोग कई सवाल करते हैं जिसपर वह परिवार जातिसूचक शब्द बोलने लगता है साथ ही मारपीट पर उतारु हो जाता है. इसपर बात करने के लिए हमने उस पत्थराव में घायल एक महिला से बात की जिन्होंने बताया कि किस तरह ये मामला शुरू हुआ.
घायल महिला ने बताया कि उनके सर में सात टांके लगे हैं साथ ही शरीर में गुम चोट भी आई हैं. शरीर में कमजोरी है क्योंकि चोट के चलते खून काफी ज्यादा गया है. उन्होंने बताया कि जब पत्थराव हुआ था तो हम भागने लगे. लेकिन वो लोग मारने के लिए भागे हम अपने आप को बचाने के लिए भाग रहे थे लेकिन उन्होंने हमारे कपड़े तक फाड़े.
हम लोग उस जमीन पर बाबा साहेब की मूर्ति पर फूल चढ़ाने जाते हैं तो वह लोग हमें गालियां देते हैं कहते हैं तुम चमार हो चमटी हो, तुम्हें किसने इज्जात दी तुम इस जमीन की इज्जात लेकर आए हो हर बार यहां आ जाते हो. हमारे समाज को वह कई तरह की गालियां देते हैं और यह पहली बार नहीं है जब इस तरह का व्यहवार किया गया हो. उन्होंने बताया कि इससे पहले भी जब वह बाबा साहेब की मूर्ति पर फूल चढ़ाने जाती थी तब-तब उनके साथ जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया.
घायल महिला ने बताया कि किस तरह वह 3 लोग अपने साथ कई लड़कों को लेकर आए थे. वह पूरी तरह से सोच के आए थे. उन्होंने हमें वहां झंडा लगाने नहीं दिया. उन्होंने कहां कि पहले ही तुमने इस चमार (बाबा साहेब की मूर्ति के लिए कहे गए शब्द)की मूर्ति लगाकर जमीन को अशुद्ध कर दिया है हम इतना गंगाजल कहां से लेकर आएंगे हर बार इस जमीन को शुद्ध करने के लिए.
आप सोचिए हमारे देश की आजादी को 75 साल पूरे हो चुकें है लेकिन आज भी दलितों की स्थिति हमारे समाज में क्या है?
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