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Friday, October 7, 2022

राजस्थान: दलित छात्र ने सवर्ण शिक्षक की मटकी से पानी पिया, सजा मिली मौत!

आजादी के जश्न के बीच शिक्षा के मंदिर में दलित अत्याचार की घटना, परिजनों का आरोप- दलित होने के कारण मटकी को छुआ तो इतना पीटा कि, कान की नस फटी। आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज।

रिपोर्ट- अब्दुल माहिर, दिलीप सोेलंकी, अजहरूद्दीन

जयपुर। देश की जनता आजादी का अमृत महोत्सव मनाने में व्यस्त है। इस बीच राजस्थान के जालौर जिले से चौकाने वाली खबर सामने आई है। राजस्थान के जालोर जिले के सायला थाना क्षैत्र के सुराणा गांव में टीचर की पिटाई से शनिवार को 9 साल के छात्र की मौत हो गई। पिछले करीब 25 दिन से बच्चे का अहमदाबाद में इलाज चल रहा था। इससे पहले उदयपुर में भी इलाज चला था। प्रारंभिक तौर में सामने आया है कि 20 जुलाई को तीसरी कक्षा के स्टूडेंट इंद्र मेघवाल ने मटका छू लिया था। परिजनों का आरोप है कि इस पर स्कूल में तैनात टीचर छैल सिंह ने इतनी पिटाई की थी कि उसकी हालत गंभीर हो गई।

बच्चे के पिता देवाराम ने बताया कि, पिटाई के बाद बच्चे की तबीयत खराब होने लगी तो उसे जालोर डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल ले गए। यहां से उसी दिन उदयपुर रेफर कर दिया गया था। यहां भी तबीयत में सुधार नहीं हुआ तो कुछ दिनों बाद अहमदाबाद ले गए थे। इस बीच शनिवार दोपहर इलाज के दौरान मौत हो गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि पिटाई के दौरान बच्चे के कान की नस फट गई थी। मौत के बाद शनिवार शाम टीचर छैल सिंह को सायला पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पिता का आरोप है कि थप्पड़ मारने के बाद बेटे की स्थिति गंभीर हो गई थी।

मृतक के चाचा ने बताया कि, उसके भाई देवाराम मेघवाल का 9 वर्षीय पुत्र इंद्रकुमार गांव के ही एक निजी विद्यालय सरस्वती विद्या मंदिर में कक्षा 3 में पढ़ता था। हर दिन की तरह 20 जुलाई 2022 को भी स्कूल पढ़ने गया था। सुबह साढ़े 10 बजे से 11 बजे के बीच छात्र को प्यास लगी तो उसने स्कूल में रखी मटकी से पानी पी लिया। इंद्र कुमार नादान होने से यह नहीं समझ पाया कि यह मटकी सवर्ण जाति के शिक्षक छैलसिंह के लिए अलग से रखी गई है।

मृतक के चाचा बताते हैं कि, “नन्हे छात्र ने भूलवश मटकी से पानी पिया तो आरोपी शिक्षक ने कक्षा 3 के छात्र को नीच व जातिसूचक शब्दों से अपमानित करते हुए उसकी पिटाई की। इससे उसके सिर, दाहिने कान व आंख में अंदरूनी चोट आई हैं।”

इलाज के लिए घूमते रहे परिजन

शिक्षक के पीटने के बाद कान में अधिक दर्द होने पर छात्र ने स्कूल के बाहर दुकान पर बैठे पिता को घटना की जानकारी दी। इस पर पिता एक मेडिकल स्टोर से दवा लेकर बेटे को घर ले गया। कान में दर्द बढ़ा तो अगले दिन बागोड़ा के एक अस्पताल में दिखाया। इसके बाद भी सुकून नहीं मिला तो भीनमाल के अलग अलग निजी अस्पतालों में दिखाया। इसके बाद डीसाए मेहसाणा व इसके बाद उदयपुर के अस्पताल में उपचार के लिए ले गए। इसके बाद भी फायदा नहीं हुआ तो अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया। यहां उपचार के दौरान शनिवार सुबह मौत हो गई।

आजादी के जश्न के बीच जातीय भेद का जहर

आजादी का 75वां जश्न मनाने की तैयारियों के बीच शिक्षा के मंदिर में जातीय भेद की इस घटना के बाद लोगो में गहरा आक्रोश है। राजस्थान की शिक्षण व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए लोग सरकार से सवाल पूछ रहे हैं। आखिर यह कैसी आजादी है। आजादी का कौनसा अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। जहां दलित छात्र के मटकी से पानी पीने की सजा मौत है। दलित उत्थान के लिए काम करने वाले संगठनों ने भी नाराजगी जाहिर करते हुए आरोपी को सख्त सजा देते हुए स्कूल की मान्यता रद्द करने की मांग की है।

शिक्षा विभाग ने दिए जांच के आदेश

घटना सामने आने के बाद शिक्षा विभाग भी सतर्क हो गया है। बच्चा सुराणा गांव के ही सरस्वती विद्या मंदिर में पढ़ता था। इस मामले के बाद मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी की ओर से जांच कमेटी बनाई गई है। आदेश में बताया कि सरस्वती विद्या मंदिर सुराना में एक बच्चे की पिटाई का मामला सामने आया है। पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी (पीईईओ) अशोक कुमार दवे और प्रतापराम को जांच सौंपी है। घटना की जानकारी मिलने के बाद एसपी हर्षवर्धन अग्रवाला और सीओ हिम्मत सिंह मौके पर पहुंचे। मामले की जांच जालोर सीओ हिम्मत सिंह चारण को सौंपी है।

प्राप्त स्थानीय जानकारी के अनुसार, अध्यापक स्वर्ण जाति का होने के कारण स्कूल में पीने के लिए मटकी अलग से रखता था ऐेसे में दलित छात्र ने भूल से उस मटकी से पानी पी लिया जिससे गुस्साए अध्यापक ने उसकी पीटाई कर दी जिसके कारण इलाज के दौरान मौत हो गई।

उधर मृतक छात्र के पिता देवराम मेघवाल ने शिक्षक की पिटाई से बेटे की मौत का जिक्र करते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से दलित उत्थान के लिए काम करने वाले संगठनों से न्याय की गुहार लगाते हुए रविवार को सायला में एकत्रित होने का आह्वान किया है।

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