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Friday, October 7, 2022

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी फीस वृद्धिः अगर आज फीस वृद्धि होती है तो परिजन हमें पढ़ने के बजाए भाई की पढ़ाई को तव्वजो देंगे : तान्या

नई दिल्ली। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी मेें फीस वृद्धि को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन जारी है। वर्तमान सत्र से फीस की वृद्धि 400 फीसदी तक कर दी गई है। लगभग 15 दिन पहले ही बीए, बीकॉम, बीएससी, एमए, एसएससी, एमकॉम, एलएलबी, एलएलएम जैसे कोर्सेज की अनुमानित 12 हजार सीटों के लिए फीस वृद्धि की गई है। इस अधिसूचना के बाद से ही यूनिवर्सिटी में विरोध प्रदर्शन जारी है।

सभी छात्रसंघ पार्टियों ने लिया हिस्सा

इस सप्ताह प्रदर्शन में काफी आक्रोश देखने को मिला। मंगलवार के दिन स्टूडेंट्स कुलपति कार्यालय नारे लगाते हुए पहुंचे। इसी दौरान बीए मास मीडिया थर्ड ईयर के छात्र आयुष प्रियदर्शी कुलपति कार्यालय में तीसरी मंजिल पर चढ़ गया। फीस वृद्धि के खिलाफ एक स्टूडेंट ने आत्मदाह करने की कोशिश की। जिसे समय रहते वहां मौजूद स्टूडेंट्स द्वारा बचा लिया लगा।

इस बीच यूनिवर्सिटी में विरोध प्रदर्शन में सभी राजनैतिक पार्टियों के छात्रसंघ ने हिस्सा लिया है। यहां तक की भाजपा की छात्रसंघ इकाई एबीवीपी ने भी हिस्सा लिया है। इसके अलावा समाजवादी पार्टी और लेफ्ट पार्टियों के छात्रसंघ इकाई भी शामिल है। पूरी यूनिवर्सिटी परिसर पुलिस छावनी में तब्दील हो चुका है। हर चपे पर पुलिस की मौजूदगी है।

इसके साथ ही यूनिवर्सिटी में धरना प्रदर्शन भी चल रहा है। फीस वृद्धि के लिए धरना प्रदर्शन पर बैठने वाले छात्र देवेन्द्र आजाद का कहना है कि हमने यूनिवर्सिटी के इस फैसले के खिलाफ सबसे पहले धरना प्रदर्शन किया, फिर आमरण अनशन किया। जिसके कारण कुछ विद्यार्थी बीमार भी पड़े। यहां तक की उन्हें अस्पताल में भी भर्ती कराया गया। इसी दौरान सभी राजनैतिक पार्टियों के छात्रसंघ भी इसमें जुट गए। लेकिन प्रशासन की तरफ से न तो कोई छात्रों से मिलने के लिए गया। न ही फीस वृद्धि की वापसी को लेकर कोई बात कही गई है। वह सिर्फ स्टूडेंट्स पर ही कार्रवाई कर रहे हैं। उन पर एफआईआर की जा रही है।

लड़कियों का पढ़ना होगा मुश्किल

तान्या यूपी के ही आगरा की रहने वाली है। वह विश्वविद्यालय में फीस बढ़ने के कारण पड़ने वाले प्रभाव के बारे में कहती है कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हुई फीस वृद्धि पहले से व्याप्त सामाजिक और लैंगिक भेदभाव को बढ़ाने वाला कदम है। इसका लड़कियों पर असर ज्यादा होगा क्योंकि जब विश्वविद्यालय की फीस ज्यादा होगी तो हमारे परिजन हमें पढ़ाने से ज्यादा हमारे भाई को पढ़ाने पर ध्यान देंगे तो सदियों से व्याप्त पितृसत्ता का ढांचा और मजबूत होगा। इसीलिए जब तक फीस वृद्धि वापस नहीं होती हम इस आंदोलन में बने रहेंगे।

इस धरना प्रदर्शन में बीए के स्टूडेंट्स से लेकर पीएचडी के शोधार्थियों ने हिस्सा लिया है। हर कोई इस फीस वृद्धि का विरोध कर रहा है। चंद्रप्रकाश, बीए सेकेंड ईयर के स्टूडेंट हैं। उनका कहना है कि फीस वृद्धि का मामला कोई एक दिन का नहीं है। मान लेते हैं फीस इस साल बढ़ा दी जाती है। इसकी क्या गैरेंटी है कि आगे फीस नहीं बढ़ेगी। वह कहते हैं कि ऐसे ही अगर लगातार फीस बढ़ती रहेगी तो एक दिन यह प्राइवेट यूनिवर्सिटी के बराबर हो जाएगी। ऐसे में कोई भी अभिभावक अपने बच्चे को यहां क्यों पढ़ाना चाहेगा। जहां टीचर भी उपलब्ध नहीं है। सुविधा की तो बहुत दूर की बात है।

दलित आदिवासियों के बच्चे शिक्षा से वंचित हो जाएंगे

धरना प्रदर्शन में शामिल हुए एक और युवक का कहना है कि यह विरोध प्रदर्शन उन गरीब, मजदूर के परिवारों के लिए है जो छोटी जगहों से बड़े विश्वविद्यालय में पढ़ने का सपना देखते हैं वह नहीं देख पाएंगे। जाहिर सी बात है हम उन सपनों को ही बचाने की कोशिश कर रहे हैं। ताकि आने वाली पीढि़यों के लिए सस्ती और सुलभ शिक्षा बची रहे और सब अपने सपनों को साकार कर सकें। पूर्वांचल और पश्चिमांचल के गरीब बच्चों के लिए शिक्षा को बचाया जा सके। लेकिन शिक्षा के बाजारीकरण के चक्कर में गरीबों के भविष्य के साथ खेला जा रहा है।

धरना प्रदर्शन पर बैठे आयसा के उपाध्यक्ष आयुष्य का कहना है फीस वृद्धि होने के कारण दलित, आदिवासी, पिछड़े, कमजोर तबके के लोग उच्च शिक्षा से पूरी तरह से दूर हो जाएंगे। हमारी यूनिवर्सिटी को पूरब का ऑक्सफोर्ड कहा जाता है। जहां से कई गरीब बच्चों का आगे बढ़ने का सपना पूरा होता है। कई बच्चे यहां आकर बड़े अधिकारी बनते हैं। ऐसे में जरूरी है कि इस फीस वृद्धि को रोका जाए ताकि गरीब से गरीब उच्च शिक्षा को हासिल कर सके।

यूनिवर्सिटी की प्रतिक्रिया

फीस वृद्धि की खबर के बाद लगातार चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार विश्वविद्यालय की पीआरओ डॉक्टर जया कपूर चड्ढा का कहना है कि बहुत से बच्चे ऐसे हैं जो इस प्रोटेस्ट को लीड कर रहे हैं जिनके यूनिवर्सिटी में अलग-अलग मामलों में सस्पेंडे कि गए हैं, कुछ लोगों को डिबार्ड किया गया है, कुछ पुराने छात्र हैं जो राजनीति से जुड़े हुए हैं, उन पर भी अलग-अलग तरह के ऐक्शन हुए हैं। उनके अनुसार पिछले दिनों में अलग-अलग मामलों में तीन एफआईआर कराई गई हैं।

गरीब बच्चों की फीस माफ कर दी जाएगी

वहीं लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शन के बीच गत बुधवार को कुलपति प्रो. सगीता श्रीवास्तव अपना पक्ष रखते हुए एक प्रेस रिलीज जारी करते हुए कहा कि यूनिवर्सिटी में पहले वार्षिक फीस 975 थी, जिसे 12 महीनों में बांट दें तो यह 81 रुपए प्रतिमाह होती है।

अब 4151 रुपए हो गई है। 12 महीने के हिसाब से देखा जाए तो 333 प्रतिमाह फीस होगी। लेकिन कुछ लोग गलत मैसेज फैला रहे हैं कि फीस 400 प्रतिशत बढ़ा दी गई है।

उन्होंने कहा-”मैं वायदा करती हूं कि जो गरीब छात्र हैं या कोविड काल में अपने माता-पिता को खो चुके हैं। उनकी पूरी फीस माफ कर दी जाएगी।”

Poonam Masih
Poonam Masih, Journalist The Mooknayak

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