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Friday, October 7, 2022

मध्य प्रदेश: कूनो राष्ट्रीय अभयारण्य में आएंगे अफ्रीकन चीता, जानिए भारत में विलुप्त हो चुके शिकारी जानवर का क्या है इतिहास!

भोपाल। मध्यप्रदेश के कूनो राष्ट्रीय अभयारण्य (Kuno National Sanctuary) में चीता लाने की तैयारी की जा रही है। यह चीते 17 सितंबर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के जन्म दिन पर मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो राष्ट्रीय अभयारण्य में दक्षिण अफ्रीका से लाए जा रहे हैं। देश से विलुप्त हो चुके यह चीते लगभग 70 साल बाद देश में एक बार फिर चहल कदमी करेंगे। 

भारत में यह रहा चीतों का इतिहास

भारत में चीतों का विलुप्त हो जाना एक तरह से चिंता का विषय था। एक्पर्ट मानते है कि, यदि कोई वन्य जीव की प्रजाति बिलुप्त होती है, तो यह पर्यावरण में तेजी से हो रहे बदलाव का कारण है। 1952 में भारत चीता विलुप्त घोषित कर दिया गया था। चीतों के इतिहास के बारे में पहली बार चीता पालने का साक्ष्य संस्कृत ग्रंथ मनसोल्लास में मिलता है।

मनसोल्लास 1129 ई. में रचित महत्त्वपूर्ण संस्कृत ग्रंथ है। इसके रचयिता चालुक्यवंश के राजा सोमेश्वर तृतीय थे। इसे ‘अभिलाषितार्थचिन्तामणि’ भी कहते हैं। ऐसा कहा जाता है कि मुगल बादशाह अकबर ने 49 वर्षों के शासनकाल के दौरान अपने शाही चिड़ियाघर में लगभग 9000 चीते रखे थे। वर्ष 1613 में मुगल सम्राट जहाँगीर ने अपनी आत्मकथा तुजुक-ए-जहाँगीरी में कैद में रखे गए किसी चीता द्वारा शावक को जन्म देने का दुर्लभ वर्णन भी किया है। यह अब तक का पहला तथा अंतिम साक्ष्य है जिसमें किसी ऐसी घटना का वर्णन किया गया है। इसके बाद चीते की जन्म कोई भी घटना दर्ज नहीं है। 

मध्यकालीन भारत में शिकार के लिये चीता का प्रयोग पूरे प्रायद्वीप में लोकप्रिय था। उस समय इनका प्रयोग काले हिरणों के शिकार के लिये किया जाने लगा। इसके अलावा कई साक्ष्यों से पता चलता है कि उस समय चीतों को पकड़ने तथा प्रशिक्षित करने के लिये राज्य के सेवक मौजूद रहते थे। जो इनके व्यावहारिक ज्ञान को समझते थे। 

चीतों के विलुप्त होने का कारण

वन्य जीव जानकारों के अनुसार, चीतों के विलुप्त होने के दो विशेष कारण थे। पहला- जानवरों के शिकार के लिये चीता को पालतू बनाया जाना और दूसरा- कैद में रहने पर चीता प्रजनन नहीं करते। जिसके कारण इनके वंश का विकास नही हो सका। 

चीतों को पालतू बनाया गया

अपनी तेज़ गति तथा बाघ व शेर की तुलना में कम हिंसक होने की वजह से इसको पालना आसान था। भारत के तत्कालीन राजाओं और ज़मीदारों द्वारा इसका प्रयोग अक्सर शिकार के लिये होता था, जिसमें ये अन्य जानवरों को पकड़ने में उनकी मदद करते थे। एक तरह से इसे पालतू जानवर बना दिया गया जो इसके विलुप्त होने का मुख्य का कारण है। चीते को पालने का मुख्य कारण इनका सहज स्वभाव था और ये कुत्तों की तरह आसानी से पाले जा सकते थे। बाघ, शेर तथा तेंदुए के विपरीत यह कम उग्र जानवर है।

कूनो का बढ़ेगा कुनबा

मध्यप्रदेश के कूनो अभयारण्य के 750 वर्ग किलोमीटर को करीब दो दर्जन चीतों के रहने के लिए उपयुक्त पाया गया है। इसके साथ ही श्योपुर और शिवपुरी जिले का करीब 3 हज़ार किलोमीटर एरिया चीतों के रहने के लिए उपयुक्त है। भारत मे 2009 में चीता लाने की जो कोशिश शुरू हुई थी। लेकिन दूसरे देश से चीता लाने का प्रोसीजर पूरा नही हो पा रहा था। जानकारी के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीका के नामीबिया से कुल 13 चीते कूनो लाए जाने का रास्ता साफ हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को तीन चीतों के बाड़ों में इन्हें छोड़ेंगे। इनमें एक बाड़े में एक मादा चीता और एक बाड़े में दो नर चीते छोड़े जाएंगें। ताकि इनके कुनबे को बढ़ाया जा सके।

Ankit Pachauri
Journalist, The Mooknayak

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