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Monday, August 8, 2022

उज्जवला योजनाः धुएं को करना था दूर, उसने फिर भी किया बेहाल, महंगाई के दौर में चूल्हा बना सहारा

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर व वंचित वर्ग की महिलाओं को खाना बनाने में सुविधा और चूल्हे के धुएं से छुटकारा देने के लिए उज्जवला योजना (Ujjwala Yojana) की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत महिलाओं को गैस का कनेक्शन दिया गया, जो इसे लेने में सक्षम नहीं थीं। हालांकि, बढ़ती महंगाई व अन्य कारणों से अब ये महिलाएं गैस सिलेण्डर भरा पाने में सक्षम नहीं है।

संसद में पेश किए गए आंकड़े हैरान करने वाले

मानसून सत्र के दौरान सरकार द्वारा संसद में सौंपे गए जवाब के मुताबिक 4 करोड़ 95 लाख उपभोक्ताओं ने वित्त वर्ष 2022 में 3 या 3 से ज्यादा रसोई गैस सिलेंडर का इस्तेमाल किया। यानी तकरीबन आधे उपभोक्ताओं ने 3 या 3 से कम गैस सिलेंडर का इस्तेमाल किया है। पेट्रोलियम और नैचुरल गैस मंत्रालय के राज्य मंत्री रामेश्वर तेली ने सरकार की तरफ से राज्य सभा में रसोई गैस (गैस सिलेंडर) को लेकर यह लिखित जानकारी सौंपी है। जिसमें सरकार ने राज्यसभा में लिखित जवाब दिया है कि देश भर में रसोई गैस के तकरीबन 30 करोड़ 90 लाख उपभोक्ता हैं। जिसमें से तकरीबन 2 करोड़ उपभोक्ताओं ने वित्त वर्ष 2022 में एक भी सिलिंडर नहीं खरीदा।

इस जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश में ऐसे सबसे ज्यादा उपभोक्ता (तकरीबन 29 लाख) हैं। जिन्होंने साल 2022 में एक भी गैस सिलिंडर नहीं लिया। दूसरे नंबर पर पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र का नंबर आता है। जहां पर तकरीबन 17 लाख और 16 लाख उपभोक्ताओं ने एक भी सिलिंडर नहीं लिया। द मूकनायक ने इन आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए पड़ताल कि तो सबसे ज्यादा उज्जवला योजना के तहत लाभार्थियों को सिलेण्डर भरवाने में परेशानी के मामले सामने आए है।

राज्यसभा में पेश किए आंकड़ों के अनुसार पश्चिम बंगाल दूसरा राज्य है, जहां सबसे कम लोगों से वित्तीय वर्ष 2022 में सिलेंडर नहीं भराया। पश्चिम बर्धवान जिले की रहने वाली एक महिला ने नाम नहीं लिखने की शर्त पर कहा कि उसके पास 14.5 लीटर वाला बड़ा सिलेंडर है। लेकिन काम धंधा ठीक से नहीं चलने के कारण पिछले लंबे समय से उसे भरवा नहीं पा रही हैं। इसलिए छोटा सिलेंडर और कोयले वाला चूल्हा रखा है।

उषा नाम की महिला का कहना है कि, उनके परिवार में वह और उनके पति हैं। पति न्यूजपेपर बांटते हैं। “उज्जवला योजना के तहत सिलेंडर मिला है। क्योंकि हम दो लोग हैं। महंगाई के इस दौर में हर महीने सिलेंडर भराना बड़ा मुश्किल है। इसलिए हर ढाई से तीन महीने तक एक सिलेंडर को चलाती हूं।”

मीना नाम की महिला को लगभग एक साल पहले उज्जवला योजना के तहत गैस चूल्हा और सिलेंडर मिला है। वह बताती है कि, पिछले एक साल में एक बार भी सब्सिडी नहीं मिली है। मीना कहती हैं कि, “सिलेंडर भराती हूं, लेकिन हर महीने नहीं। गैस के साथ चूल्हा भी जलाती हूं, ताकि ज्यादा खर्चा न हो।

मीना के साथ ही उनके मुहल्ले में रीना को भी उज्जवला योजना का लाभ मिला। रीना लोगों के घरों में काम करती है। वह बताती है कि गैस तो मिल गया है। लेकिन हर महीने उसे भरवाना संभव नहीं हो पाता है। इसलिए विकल्प के तौर पर चूल्हे का इस्तेमाल करते हैं। “आज भी ज्यादातर चूल्हे का ही इस्तेमाल करते हैं। इससे गैस दो से तीन महीने तक चल जाता है,” वह कहती है।

सिलेंडर की लगातार बढ़ रही कीमतें

आपको बता दें कि, मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान साल 2014 में गैस सिलेंडर की कीमत 410 रुपए थी। इन आठ सालों में लगातार बढ़ती सिलेंडर की कीमतें जनता की जेब पर सीधे असर डाल रही हैं। आज सिलेंडर की कीमत 1000 रुपए पार कर गई है, जिसके कारण कई लोग गैस चूल्हे की जगह वैकल्पिक रूप में कोयला या लकड़ी के चूल्हा का इस्तेमाल कर रहे हैं। गैस की महंगाई का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जनवरी 2021 को गैस की कीमतें 694 थीं। जबकि, जनवरी 2022 में गैस की कीमत में वृद्धि होकर 900 तक पहुंच गईं। जिसके छह महीनों बाद यह कीमत 1000 पार कर गई।

क्या है उज्जवला योजना?

योजना के अनुसार 18 साल से अधिक उम्र वाली जरूरतमंद और वंचित महिला को सालभर के 12 सिलेंडर 200 रुपए की सब्सिडी पर दिए जाएंगे। लेकिन इस योजना के महज 6 साल बाद आलम यह है की लोग एक सिलेंडर भी नहीं भरवा पा रहे हैं। आपको बता दें कि, इस योजना के तहत अब तक 9 करोड़ कनेक्शन दिए जा चुके हैं।

सिर्फ उज्जवला लाभार्थियों को सब्सिडी

सरकार ने कोरोना की पहली लहर के दौरान जून 2020 में ही ऐलान कर दिया था कि उज्ज्वला योजना के अलावा और किसी को भी सब्सिडी नहीं दी जाएगी। इस ऐलान के तहत उज्जवला योजना वाले को भी सिर्फ 200 रुपए दिए जाएंगे। जिसका नतीजा यह हुआ है कि 2020-21 में केंद्र सरकार ने सब्सिडी के रूप में 11,896 करोड़ रुपए खर्च किए थे, वहीं 2021-22 में यह खर्च घटकर महज 242 करोड़ रुपए रह गया है।

Poonam Masih
Poonam Masih, Journalist The Mooknayak

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